यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 17, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने कहा, धौनी की ये खासियत उन्हें बाकि खिलाड़ियों से करती है अलग
हम सोचते हैं कि दो ओवरों में 30 रन बनाना मुश्किल है, मगर धौनी सोचते हैं कि तीन छक्के लगाना पर्याप्त है

(संजय मांजरेकर का कॉलम)
कुछ दिन पहले हमें एक हारने वाली टीम की ओर से आइपीएल की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक देखने को मिली। यह टी-20 प्रारूप में महेंद्र सिंह धौनी की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से भी एक थी। चेन्नई को मैच जीतने के लिए आखिरी पांच ओवर में 76 रन की दरकार थी। इस प्रारूप में चमत्कारिक प्रदर्शन की संभावना के बीच यह एक नामुमकिन जैसा लक्ष्य था, लेकिन धौनी उसी मशहूर कथन पर भरोसा करते हैं कि नामुमकिन कुछ भी नहीं होता।
मुझे चैंपियन खिलाडि़यों को अपने स्तर का प्रदर्शन करते हुए देखकर बहुत रोमांच महसूस होता है। धौनी इस तरह की पारियां उतनी निरंतरता से अब नहीं खेल रहे हैं, जैसा कि खेला करते थे। वह बड़े शॉट उस तरह से नहीं लगा पा रहे हैं, जैसे कि लगाया करते थे। मगर उनका दिमाग बिल्कुल वैसा है जैसा हुआ करता था जिसकी वजह से वह खेल के ऊंचे मुकाम हासिल करने की ओर निरंतर देख रहे होते हैं।
कोई भी अन्य खिलाड़ी सबसे पहले यह सुनिश्चित करता है कि इस तरह के हालात पैदा ही न हों, जिसकी वजह से हार का ठीकरा उसके सिर फोड़ा जाए। ऐसे में वह अपने जोड़ीदार पर यह जिम्मेदारी डाल देता है, क्योंकि उसे खुद की क्षमताओं पर भरोसा नहीं होता। या फिर वह इस अंदाज में बड़े शॉट खेलने की कोशिश करता कि शॉट लगा तो ठीक वरना वह आउट हो जाता है और अंतिम ओवरों के इस दबाव का सामना आने वाले बल्लेबाज को करना पड़ता है।
मगर धौनी ऐसे नहीं हैं। वह हमेशा मोर्चे से अगुआई करना पसंद करते हैं और विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखते हैं। लुकाछिपी का खेल खेलना धौनी का अंदाज नहीं है। वह अपनी उस सोच पर टिके रहते हैं कि मैच को जितना लंबा खींच सकें खींचा जाए, आखिरी ओवर तक। आप कह सकते हैं कि धौनी धीमी शुरुआत करते हैं और तब तक कुछ मैचों में रन रेट इतना अधिक हो गया, जिसे धौनी पकड़ने में कामयाब नहीं हो सके। मगर बावजूद वह अपनी सोच पर अडिग हैं।
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मगर रन रेट बढ़ने के बावजूद धौनी कभी दबाव या तनाव में नहीं आते। तब भी नहीं जब पारी के आखिरी पांच ओवर ही बचे हों, क्योंकि वह जानते हैं कि आखिरी दो ओवरों में गेंदबाज गलती करेंगे और खराब गेंदबाजी पर रन लुटाएंगे। वो इसलिए क्योंकि वह जानते हैं कि गेंदबाज भी इन हालात में दबाव में होते हैं। यही वो जगह है जहां के धौनी किंग हैं। इन दो ओवरों में धौनी की सोच और क्षमताओं की ताकत छिपी है।
हम सोचते हैं कि दो ओवर हैं, मगर धौनी सोचते हैं कि 12 गेंदें हैं। हम सोचते हैं कि यह बहुत कम गेंदें हैं, मगर धौनी सोचते हैं कि यह बहुत ज्यादा हैं। हम सोचते हैं कि दो ओवरों में 30 रन बनाना मुश्किल है, मगर धौनी सोचते हैं कि तीन छक्के लगाना पर्याप्त है, इसके अलावा इधर-उधर एक चौका लग जाएगा और बाकी के रन विकेटों के बीच तेज भागकर बनाए जा सकते हैं।
और हां, उन्हें विश्वास है कि वह गेंदबाजी की तुलना में कम दबाव में हैं, इसलिए वह हमेशा खुद को एक विजेता होने का विश्वास दिलाते हैं। मगर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब वह असफल होते हैं, तो कंधे हिलाते हुए तुरंत आगे बढ़ जाते हैं, यही बात उन्हें चैंपियनों में खास बनाती है।
