नई दिल्ली, जेएनएन। एक साल बाद भारतीय टीम में वापसी कर रहे बायें हाथ के बल्लेबाज सुरेश रैना फिर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छा जाने को तैयार हैं। वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 18 फरवरी से शुरू हो रही तीन टी-20 मैचों की सीरीज के लिए जल्द ही दक्षिण अफ्रीका रवाना होंगे। उन्होंने कहा कि इतनी विपरीत परिस्थितियों में वापसी करना महत्वपूर्ण है। दक्षिण अफ्रीकी दौरे, कप्तान विराट कोहली और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी सहित कई मुद्दों को लेकर सुरेश रैना ने अभिषेक त्रिपाठी से बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश

सवाल: एक साल बाद टीम इंडिया में फिर से वापसी आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण है?

जवाब: निश्चित तौर पर ये बेहद महत्वपूर्ण है। मैंने पिछले एक साल में दलीप ट्रॉफी, रणजी ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी सहित सभी महत्वपूर्ण टूर्नामेंट खेलने के साथ बेंगलुरु में एनसीए में कड़ा अभ्यास किया। मेरा फोकस सिर्फ इस बात पर ही था कि मेहनत करनी है और यही मुङो टीम इंडिया में वापसी कराएगी। उसी कड़ी मेहनत का फल है यह वापसी।

सवाल:क्या यह आपके लिए आखिरी मौका है?

जवाब: 31 की उम्र में इतनी विपरीत परिस्थितियों में वापसी करना बहुत मुश्किल है। खिलाड़ी की जिंदगी में काफी परेशानियां आती हैं। महत्वपूर्ण यह है कि आप इन बाधाओं को पार पाकर कैसे वापसी करते हैं। जिस तरह से मेरा कमबैक हुआ है वह महत्वपूर्ण है। यह मेरे क्रिकेट करियर के नए जीवन की तरह है।

सवाल: क्या चयनकर्ताओं, बीसीसीआइ या कप्तान की तरफ से आपको कोई संकेत दिया गया है?

जवाब: पिछले एक साल के दौरान मैं लगातार कोच रवि शास्त्री, कप्तान विराट कोहली, चयनकर्ताओं और बीसीसीआइ के कुछ अधिकारियों के संपर्क में था। सभी ने मुझे काफी प्रेरित किया और घरेलू मैचों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद मेरी वापसी हुई। सबको पता है कि मेरे अंदर क्रिकेट की आग है और मैं क्या कर सकता हूं। 

सवाल: द. अफ्रीका में तीन टी-20 मैचों में आपकी क्या रणनीति रहेगी?

जवाब: मैं वहां की परिस्थितियों में खुद को जल्द से जल्द ढालकर अच्छा प्रदर्शन करना चाहूंगा। मेहनत करना मेरे हाथ में है और बाकी सब भगवान के हाथ में। दक्षिण अफ्रीका में भारत की रणनीति फिलहाल आक्रामक नजर आ रही है और जब मैं वहां पहुंचूंगा तो मुझे पता चलेगा कि टीम की टी-20 सीरीज में क्या योजना रहती है। मुझे जो रोल दिया जाएगा उसको देखते हुए ही काम करूंगा। मैंने वहां आइपीएल के अलावा भी क्रिकेट खेला है। मुझे वहां खेलने का अच्छा अनुभव है।

सवाल: अगले साल इंग्लैंड में विश्व कप है और अभी टीम इंडिया में एक-दो स्पॉट खाली हैं। क्या उस पर भी आपकी नजर है?

जवाब: निश्चित तौर पर हर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का लक्ष्य विश्व कप में खेलना होता है। अच्छी बात यह है कि अभी उसमें एक साल है और उससे पहले मुङो ये तीन मैच खेलने हैं। इसके बाद एशिया कप और आइपीएल भी है। मैं इसमें अच्छा प्रदर्शन करके आगे का रास्ता बनाना चाहूंगा। फिलहाल फोकस टी-20 सीरीज पर है।

सवाल: धौनी विराट की कप्तानी में क्या अंतर पाते हैं?

जवाब: दोनों ही महान कप्तान हैं। फर्क इतना है कि धौनी विकेटकीपर-कप्तान हैं जबकि विराट आक्रामक कप्तान। धौनी भाई विकेट के पीछे रहते हैं, इसलिए उन्हें पता रहता है कि गेंद कितनी घूम रही है, वह विकेट को आसानी से पढ़ लेते हैं, वह बेहद तेज हैं। संगकारा, गिलक्रिस्ट और इयान हीली भी अच्छे विकेटकीपर कप्तान रहे हैं। वहीं विराट आक्रामक हैं। गांगुली और धौनी के बाद वह भारतीय क्रिकेट को अच्छी तरह से आगे ले जा रहे हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट जीता और पहली बार उस धरती पर लगातार तीन वनडे जीते। मुझे विराट का रवैया पता है। वह खिलाड़ियों को अपना खेल खेलने देते हैं। निश्चित तौर पर ये मेरे लिए मददगार साबित होगा।

सवाल: यो-यो टेस्ट में फेल होने के बाद कैसा लगा?

जवाब: नहीं, मैं यो-यो टेस्ट में फेल नहीं हुआ था। पहली बार मुझे सही समय पर नहीं बुलाया गया था, या यूं कहूं कि मुझे उसकी तैयारी के लिए कम समय मिला था। इसके बाद जब दोबारा मैंने पूरी तैयारी से टेस्ट दिया तो पास हो गया। इस टेस्ट के जरिये पता चलता है कि आप खेल के कितने टच में हैं। इसमें आपकी दौड़, फिटनेस और लचीलेपन का पता चलता है। एनसीए में ऐसे डॉक्टर और ट्रेनर हैं जो आपकी 12-13 साल की फाइल को देखकर बताते हैं कि आपको क्या जरूरत है, क्या परिवर्तन करने हैं। ये मंत्र भारतीय क्रिकेट के लिए काफी मददगार है।

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Posted By: Pradeep Sehgal