चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव अब टीम इंडिया के स्थायी सदस्य बनने की तरफ बढ़ रहे हैं। वह लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी गेंदें बल्लेबाजों के लिए रहस्य की तरह होती हैं, हालांकि वह ऐसा नहीं मानते। पेश हैं अभिषेक त्रिपाठी से कुलदीप की बातचीत के मुख्य अंश..

 

2014 में वेस्टइंडीज के खिलाफ आपको चुना गया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका 2017 में मिला। इन तीन सालों में क्या-क्या सीखा?

 

तीन सालों में बहुत कुछ बदल गया है। अब काफी परिपक्व हो गया हूं। इन तीन सालों में काफी कुछ देखा। बीच में परेशान भी हुआ। रणजी में एक सत्र में खेलने को नहीं मिला, हालांकि फिर वापसी की। पिछले रणजी सत्र में गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में अच्छा प्रदर्शन किया। दिलीप ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन रहा। उसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौका मिला। अब हर मैच में अच्छा प्रदर्शन करने का लक्ष्य होता है। आत्मविश्वास आ गया है, दबाव कम हुआ है। अब पता है कि आगे करना क्या है। लोग मैच विनर मानने लगे हैं और मुझ पर विश्वास करने लगे हैं। 

 

श्रीलंका दौरे को करियर के टर्निग प्वाइंट की तरह देखते हैं?

 

श्रीलंका दौरा काफी अच्छा रहा। युवाओं को इतनी जल्दी टेस्ट खेलने को नहीं मिलता वह भी जब आपके पास दुनिया के शीर्ष गेंदबाज हों। लेकिन अश्विन-जडेजा को आराम देने की वजह से मुझे मौका मिला और मैंने उसमें अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश की। वनडे और टी-20 में रोटेशन पॉलिसी के जरिए मौका मिला उसमें भी अच्छी गेंदबाजी की। कुल मिलाकर इसे अच्छी शुरुआत कहा जा सकता है।

 

अब आप ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में हैं, कितनी मुश्किल होगी यह सीरीज?

 

यह आसान टीम नहीं है। इसमें काफी बड़े-बड़े खिलाड़ी हैं जो अकेले दम मैच निकालने की क्षमता रखते हैं। क्रिकेट प्रशंसकों को बढ़िया प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। इन मुकाबले में हारने का अंतर एक फीसद ही होगा। युवाओं के लिए यह अच्छा अनुभव होगा।

 

क्या गेंदबाजी में कुछ बदलाव कर रहे हैं?

 

कुछ नया करने और बदलाव करने में मेरा विश्वास नहीं है। मैं अपने बेसिक को मजबूत करता हूं और स्किल पर काम करता हूं। कुछ नया करना खुद को भ्रमित करना होगा। हां, फिटनेस को लेकर मैंने काफी मेहनत की है। जब आपका कप्तान इतना फिट हो तो ऐसा करने के लिए प्रेरणा मिलती है। 2014 की अपेक्षा अब मैं छह किलो हल्का हो गया हूं।

 

ऐसा कहा जाता है कि बल्लेबाज कलाई के गेंदबाजों को जल्दी पढ़ लेते हैं?

 

अगर ऐसा होता तो शेन वॉर्न सात सौ से ज्यादा विकेट नहीं ले पाते। अगर आप स्तरीय गेंदबाज हैं तो आप कहीं भी खेल रहे हों, कोई भी बल्लेबाज आपके सामने हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। लोग कुछ भी कहें मैं खुद को रहस्यमयी गेंदबाज नहीं मानता। मेरी गेंदों में कोई रहस्य नहीं है। बस इतना अंतर है कि जो काम वॉर्न दायें हाथ से करते थे मैं बायें हाथ से करता हूं। न मैं हाथ मोड़कर गेंद फेंकता हूं न बाहें घुमाकर, जो क्रिकेट बुक में लिखा है बिल्कुल वैसे ही गेंद फेंकता हूं।

 

आपको खिलाने को लेकर पूर्व कोच कुंबले और कप्तान कोहली के बीच विवाद की खबरें भी आईं। इस बारे में क्या कहेंगे?

 

मुझे इस बारे में कुछ पता ही नहीं था। मीडिया में ही बातें आ रही थीं। हम लोग टीम में नए हैं, हमें इन सब बातों का पता ही नहीं होता। जिन बातों का पता नहीं उस पर कुछ बोलना बेवकूफी होगी।

 

विराट की कप्तानी के बारे में क्या कहेंगे?

 

वह एक वास्तविक नेतृत्वकर्ता हैं जो आगे आकर नेतृत्व करते हैं। हर सीरीज में वह एक जैसे रहते हैं। युवाओं को प्रमोट करते हैं। सबसे बात करते हैं, टीम को एकजुट रखते हैं। उनका फोकस व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरी टीम पर होता है। उन्होंने वेस्टइंडीज से लेकर श्रीलंका तक मेरा सहयोग किया। चाहे मैच में गेंद फेंक रहा हूं या नेट पर हमेशा बात करते हैं। वह आपकी काबिलियत को उभारते हैं और बताते हैं कि कैसे प्रदर्शन करना है। ऐसे कप्तान का साथ युवा क्रिकेटरों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

 

चहल-अक्षर भी आपके साथ टीम में हैं। अश्विन-जडेजा बाहर हैं। आपको अपनी जगह बरकरार रखने के जबरदस्त प्रतिद्वंद्विता नजर नहीं आती?

 

मेरी प्रतिद्वंद्विता किसी से नहीं है। जो है वह खुद से है। जब तक आप अच्छा प्रदर्शन करोगे तब तक ही टीम इंडिया में रहोगे। अगर मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं करता तो मुझे टीम में बने रहने का हक नहीं है। जहां तक इतने अच्छे स्पिनरों की बात है तो यह भारत के लिए अच्छा है, क्योंकि उसके पास इतनी बेंच स्ट्रेंथ मौजूद है।

क्रिकेट की खबरों के लिए यहां क्लिक करें

अन्य खेलों की खबरों के लिए यहां क्लिक करें

Posted By: Bharat Singh