सुप्रीम कोर्ट में बीसीसीआइ केस के मुख्य याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने बीसीसीआइ पदाधिकारियों में चल रही तनातनी पर नाखुशी जताते हुए सीओए से कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी को बर्खास्त करने की मांग की है। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (सीएबी) के सचिव आदित्य वर्मा से अभिषेक त्रिपाठी ने बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश-

 

क्या आप सीओए के अब तक के कामकाज से संतुष्ट हैं?

 

एक याचिकाकर्ता के तौर पर मैं जो देख रहा हूं उससे पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जिस चीज के लिए भेजा था, उसी के लिए वह सुप्रीम कोर्ट चले जाते हैं। अगर उन्हें किसी पदाधिकारी को बर्खास्त करना है तो वे खुद कर सकते थे लेकिन उसके लिए वे सुप्रीम कोर्ट चले गए। इससे मामले अटकते ही हैं। 

 

लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने में कहां देरी हो रही है?

 

सीओए प्रमुख विनोद राय की ईमानदारी पर कोई शक नहीं लेकिन उन्हें जितनी तेजी दिखानी थी, वह नहीं दिखी। वहीं अन्य लोग बीसीसीआइ और नेशनल क्रिकेट अकादमी की राजनीति में व्यस्त हैं। डायना इडुलजी से मुझे उम्मीद नहीं है। रामचंद्र गुहा, विक्रम लिमाये सीओए छोड़ चुके हैं। उनकी जगह तत्काल दो क्रिकेटरों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए। मैं एमीकस क्यूरी से अपील करूंगा कि वह पहल करें। लोकपाल की भी नियुक्ति की जानी चाहिए। 

 

कार्यवाहक सचिव अमिताभ कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना को ही अंधेरे में रख रहे हैं? कोषाध्यक्ष ने भी कुछ ऐसी ही मेल लिखी है?

 

सुप्रीम कोर्ट ने अंडरटेकिंग देने के बाद इन तीनों को बीसीसीआइ का काम करने का अधिकार दिया था। इस तरह से देखा जाए तो इन तीनों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट ने की है। बीसीसीआइ के संविधान के तौर पर कार्यवाहक सचिव को कार्यवाहक अध्यक्ष के अधीन ही काम करना होता है लेकिन दैनिक जागरण में छपी हालिया ईमेल ने सच्चाई सामने ला दी है। सीओए को अमिताभ सर्वगुण संपन्न क्यों लगते हैं ये तो वही बता सकते हैं लेकिन मैं सीओए से मांग करता हूं कि अमिताभ को तत्काल पद से हटाकर सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया जाए।

 

लेकिन अमिताभ ने स्वीकारा है कि सीओए के अंडर में काम करने वाले सीईओ राहुल जौहरी उन्हें जानकारी दे रहे हैं?

 

सीओए ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी अपनी चौथी स्टेटस रिपोर्ट में अमिताभ की तारीफ की थी लेकिन दिल्ली में हुई बीसीसीआइ की बैठक में राहुल जौहरी को बाहर निकालने के बाद पांचवीं स्टेटस रिपोर्ट में खन्ना, अमिताभ और अनिरुद्ध को लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने में रोड़ा बताते हुए हटाने के लिए कहा गया। तो अब वही अमिताभ सीओए के इतने करीबी कैसे हो गए? अमिताभ 2002 से पुराने बिहार क्रिकेट संघ, झारखंड क्रिकेट संघ और बीसीसीआइ से जुड़े रहे हैं। उनके कार्यकाल की न्यायिक जांच हो और अगर वह सही हैं तो सीओए उन्हें बरकरार रखें।

 

विनोद राय के होते हुए भी बिहार की टीम रणजी ट्रॉफी नहीं खेल पाई?

 

आप यह देखिए कि उत्तर प्रदेश से टूटकर उत्तराखंड बना तो मूल सदस्य उप्र ही बीसीसीआइ का सदस्य रहा। उत्तराखंड को अभी भी मान्यता नहीं है। मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ बना तो मप्र की सदस्यता बरकरार रही। छत्तीसगढ़ को पिछले साल मान्यता मिली है लेकिन बिहार से टूटकर झारखंड बना तो मूल सदस्य बिहार बीसीसीआइ से बाहर हो गया जबकि झारखंड को बोर्ड से मान्यता मिली हुई है। बीसीसीआइ के इतिहास में यह इकौलता मामला है जिसमें राज्य संघ का नाम ही नहीं एरिया ऑफ ऑपरेशन भी बदला। ये सब अमिताभ के रहते हुए हुआ। सीओए को बिहार क्रिकेट को सुचारू रूप से चलाने के लिए तत्काल एक एडहॉक कमेटी बनानी चाहिए। हालत यह है कि बिहार के जिस राज्य संघ पर बीसीसीआइ के रुपयों के गबन का आरोप लगा था वर्तमान बोर्ड उसी पर भरोसा जता रहा है।

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By Bharat Singh