बर्मिंघम, अभिषेक त्रिपाठी। अमूमन भारत और पाकिस्तान के बीच मैच के दौरान ही स्टेडियम का इतना गर्म दिखता है, लेकिन बांग्लादेशी प्रशंसकों के अति उत्साह ने बर्मिघम के एजबेस्टन स्टेडियम को जरूरत से ज्यादा गर्म कर दिया था। बांग्लादेश की टीम पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंची थी और यही कारण है कि उनके प्रशंसक काफी उत्साह में थे। 

मैच शुरू होने से पहले ही वे स्टेडियम के बाहर बांग्लादेश-बांग्लादेश के नारे लगा रहे थे। उनको कोई भी भारतीय प्रशंसक दिखता तो वे यही कहते कि इस मैच में अलीम डार और इयान गोल्ड नहीं हैं। मालूम हो कि ऑस्ट्रेलिया में 2015 में हुए विश्व कप में जब भारत ने बांग्लादेश को दूसरे क्वार्टर फाइनल में पराजित किया था तो यही दोनों अंपायर थे। 

इन दोनों अंपायरों ने कई ऐसे फैसले दिए थे जो भारत के पक्ष में गए थे। उसके बाद बांग्लादेशी टीम, प्रशंसक और वहां के बोर्ड के मुखिया ने इस पर सवाल उठाए थे। उन्हें ऐसा लगता है कि भारतीय टीम अंपायरिंग की वजह से वह मुकाबला जीता था। 

जमकर दिखी प्रतिद्वंद्विता

जो कभी भारत-पाकिस्तान मैच में देखने को मिलता था वह अब भारत-बांग्लादेश मैच में दिखने लगा है। खासतौर पर बांग्लादेशी प्रशंसक भारत को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानने लगे हैं। इसी कारण दोनों देशों के प्रशंसक कई बार आमने-सामने आ गए। हालांकि अगर संख्या की बात की जाए तो 25,000 दर्शकों की क्षमता वाले इस स्टेडियम में 24,340 दर्शक पहुंचे थे, जिसमें सबसे ज्यादा भारतीय ही थे। एजबेस्टन स्टेडियम में वनडे देखने पहली बार इतनी संख्या में दर्शक पहुंचे थे जो एक रिकॉर्ड है। 

जहां तक भारत-बांग्लादेशी प्रशंसकों के बीच प्रतिद्वंद्विता की बात है तो यहां जैसे ही भारतीय दर्शक भांगड़ा करते और इंडिया-इंडिया चिल्लाते वैसे ही बांग्लादेशी ड्रम बजाने लगते और बांग्लादेश-बांग्लादेश चिल्लाने लगते। कुल मिलाकर जिस तरह भारत और बांग्लादेश की टीम मैदान के अंदर आपस में टक्कर दे रही थी वैसे ही दोनों देशों के प्रशंसक दर्शक दीर्घा में एक दूसरे से द्वंद्व कर रहे थे।

हालांकि जब भारतीय टीम बल्लेबाजी करने आई और धवन, रोहित के साथ विराट कोहली ने बांग्लादेशी गेंदबाजों की पिटाई की उसके बाद बांग्लादेशी प्रशंसक भी ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे गाने लगे। जब भारतीय टीम मैच जीती तो स्टेडियम में चक दे इंडिया गाना बज रहा था और पूरे स्टेडियम में भारतीय तिरंगे लहरा रहे थे। 

भारत के खिलाफ इतना उत्साह क्यों

हालत यह है कि बांग्लादेश के प्रशंसक और मीडिया भारत को दुश्मन की तरह मानने लगे हैं। इसका कारण यह है कि पिछले कुछ सालों में बांग्लादेशी क्रिकेट टीम के प्रदर्शन में सुधार हुआ है और उसने बड़े टूर्नामेंट के नॉकआउट मुकाबलों में पहुंचना शुरू किया है। संयोग से जब-जब वह बड़े खिताब को जीतने के लिए आगे बढ़ा तब-तब पड़ोसी भारत ने उसका रास्ता रोका। पिछले साल टी-20 विश्व कप का मुकाबला हो या 2015 विश्व कप का क्वार्टर फाइनल। दोनों मैचों में भारत से हारने के बाद बांग्लादेशी खिलाड़ी, प्रशंसक, अधिकारी और यहां तक कि वहां की मीडिया बौखला गई। हमारे पड़ोसी इस मैच को किस हद तक ले रहे हैं इस का उदाहरण इस बात से मिलता है कि जब कुछ भारतीय पत्रकार बर्मिघम स्टेडियम में बांग्लादेशी टीम के अभ्यास सत्र में पहुंचे तो वहां के एक पत्रकार ने यह तंज कसा कि इस बार जीतने के लिए कुमार धर्मसेना को कितने रुपये दिए हैं? यही नहीं, उसके एक पत्रकार ने तो कोच चंडिका की प्रेस कांफ्रेंस में यह सवाल भी पूछा कि धर्मसेना के अंपायर होने से कोई फर्क तो नहीं पड़ेगा?

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Posted By: Bharat Singh

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