कभी बल्ला खरीदने तक के नहीं थे पैसे, अब कोलंबो में टीम इंडिया के लिए बना काल; मिलिए श्रीलंका के सोनल दिनुशा से
दिनुशा ने भारत के खिलाफ सीरीज में 140 की औसत से कुल 420 रन बनाए, लेकिन उनका सबसे अहम योगदान कोलंबो में देखने को मिला।
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सोनल दिनुशा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारत के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज में सोनल दिनुशा श्रीलंका के लिए सबसे बड़ी खोज बनकर उभरे। उन्होंने अपनी सालों की कड़ी मेहनत को इंटरनेशनल लेवल पर शानदार प्रदर्शन में बदल दिया। उनके सफर की शुरुआत परिवार के एक बड़े त्याग से हुई। उनका पहला क्रिकेट बैट उनकी बहन ने पैसे उधार लेकर खरीदा था।
ड्रॉ कराया मुकाबला
दिनुशा ने भारत के खिलाफ सीरीज में 140 की औसत से कुल 420 रन बनाए, लेकिन उनका सबसे अहम योगदान कोलंबो में देखने को मिला। पहली पारी में 290 रन पर ऑलआउट होने और 213 रनों की बढ़त गंवाने के बाद श्रीलंका को फॉलो-ऑन के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन दूसरी पारी में दिनुशा 264 गेंदों पर 133 रन बनाकर नाबाद रहे। उनकी इस पारी ने मेजबान टीम को 429/9 के स्कोर तक पहुंचाने और मैच ड्रॉ कराने में मदद की।
कोच ने त्याग को याद किया
PTI से बात करते हुए दिनुशा के कोच अशान प्रियंजन ने उनके शुरुआती क्रिकेट के दिनों की मुश्किल परिस्थितियों और उनके परिवार द्वारा किए गए त्याग को याद किया। प्रियांजन ने कहा, "उनकी बहन ने कुछ पैसे उधार लेकर उनके लिए एक बैट खरीदा, उनका पहला क्रिकेट बैट। परिवार के पास ज्यादा पैसे नहीं थे और अब जो भी कमाई हो रही है, वह दिनुशा की वजह से ही है। यही उनकी एकमात्र कमाई का जरिया है।"
Sonal Dinusha anchored the innings time and time again this series. That is true lion-hearted determination! 🦁🇱🇰 #SLvIND #SriLankaCricket pic.twitter.com/kkhqgH2PEZ
— Sri Lanka Cricket 🇱🇰 (@OfficialSLC) August 27, 2026
जबरदस्त तैयारी की थी
प्रियंजन ने कहा, "वह अपने माता-पिता और भाई-बहनों से बहुत जुड़ा हुआ है। मुझे लगता है कि उसका क्रिकेट से भी वैसा ही लगाव है।" कोलंबो में दिनुशा की मैराथन पारी के पीछे जबरदस्त तैयारी थी। टेस्ट से पहले उन्होंने भारत के स्पिन अटैक के बारे में चर्चा करने के लिए प्रियंजन से बात की और उसके बाद कोलंबो क्रिकेट क्लब में लेफ्ट-आर्म और ऑफ-स्पिन के खिलाफ अपने स्वीप और रिवर्स स्वीप शॉट्स पर खास तौर पर काम किया।
बास्केटबॉल खेल रहे थे
दिनुशा का क्रिकेट का सफर आसान नहीं था। स्कूल के कोच सुसंथा फेलिक्स डायस की नजर उन पर तब पड़ी जब वह बास्केटबॉल खेल रहे थे। कोच ने ही उन्हें क्रिकेट टीम में शामिल किया। उस समय इस युवा खिलाड़ी के पास न तो बल्ला था और न ही क्रिकेट का सही सामान। उसकी बहन ने पैसे उधार लेकर उसे उसका पहला बल्ला खरीदकर दिया। यह उसके करियर का एक अहम मोड़ साबित हुआ और आज वह इंटरनेशनल लेवल तक पहुंच चुके हैं।
दो घंटे तक स्वीप शॉट की प्रैक्टिस की
प्रियांजन ने दिनुशा को पहली बार कोलंबो क्रिकेट क्लब में ट्रेनिंग करते हुए देखा था। तब वह लगभग 11 या 12 साल के थे और तभी उसने दिनुशा के खेल के प्रति समर्पण को भांप लिया था। प्रियांजन ने कहा, "मैंने एक बार उससे कहा था कि स्पिनरों के खिलाफ सफल होने के लिए उसे एक अच्छा स्वीप शॉट खेलना आना चाहिए। उसे एशियाई देशों में काफी क्रिकेट खेलना है। उस समय के बाद से उसने नेट्स में लगभग दो घंटे तक स्वीप शॉट की ही प्रैक्टिस की।"
यही शॉट बना हथियार
बाद में यही शॉट भारत के खिलाफ दिनुशा के सबसे बड़े हथियारों में से एक बन गया। सीरीज के दौरान स्पिन के खिलाफ स्वीप शॉट्स से उसने 173 रन बनाए और टेस्ट सीरीज में जो रूट के 160 रनों के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। श्रीलंका A टीम के पूर्व बल्लेबाज अविष्का गुणवर्धने ने भी ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान खुद को ढालने की यही इच्छाशक्ति देखी थी। शॉर्ट बॉल्स के खिलाफ संघर्ष करने के बाद दिनुशा ने थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट के साथ अतिरिक्त सेशन की मांग की और इसके बाद लगातार अनौपचारिक टेस्ट मैचों में 105 और 88 रन बनाए।
सोनल के कुछ रिकॉर्ड
- सोनल दिनुशा ने चार पारियों में 140 के औसत से 420 रन बनाए।
- 2 मैचों की सीरीज में तीन शतक और एक अर्धशतक लगाया।
- कोलंबो टेस्ट की दूसरी पारी में 264 गेंदों पर नाबाद 133 रन बनाए।
- कोलंबो टेस्ट की पहली पारी में 103 रन की शानदान पारी खेली।
- स्पिन के खिलाफ स्वीप शॉट्स से 173 रन बनाए और जो रूट (160) का रिकॉर्ड तोड़ा।
- भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज बने।
- दो टेस्ट मैचों की सीरीज में तीन शतक लगाने वाले आठवें बल्लेबाज बने।
- टेस्ट मैच में नंबर 6 या उससे नीचे आकर दो शतक लगाने वाले पांचवें बल्लेबाज बने।
अंगद की तरह जम गए
सोनल की सबसे अहम पारी तब आई जब श्रीलंका फॉलोऑन के बाद हार की कगार पर था। भारत को सीरीज में क्लीन स्वीप करने के लिए आखिरी दिन चार विकेट चाहिए थे, लेकिन दिनुशा अंगद की तरह पैर जमाए रहे। उन्हें दूसरे टेस्ट में प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
