नई दिल्ली, जेएनएन। महज 16 वर्ष की उम्र में ही उन्मुक्त चंद (Unmukt Chand) को घरेलू क्रिकेट में खेलने का मौका मिल गया था और उस वक्त उन्हें टीम इंडिया के भविष्य के तौर पर देखा जाता था। उन्मुक्त चंद ने अपने पहले घरेलू मैच में गुजरात के खिलाफ 35 रन की पारी खेली थी और अगले ही मैच में अर्धशतक लगाया था। इसके बाद वो भारतीय अंडर19 टीम के कप्तान बना दिए गए और उनकी कप्तानी में भारत ने 2012 में वर्ल्ड कप भी जीत लिया। 

उन्मुक्त चंद के लिए सबकुछ ठीक जा रहा था, लेकिन उनकी फॉर्म में एकदम से गिरावट आई वो अपनी स्टेट टीम में भी बने रहने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पिछले सीजन में वो दिल्ली टीम से बाहर कर दिए गए और विजय हजारे ट्रॉफी के लिए उनका टीम में चयन नहीं किया गया। उन्होंने आइपीएल में भी खेला, लेकिन उनकी खराब फॉर्म की वजह से वो वहां से भी बाहर हो गए। 

अब उन्मुक्त एक बार फिर से नई टीम के साथ नई शुरुआत करने की तैयारी में हैं। आने वाले घरेलू सीजन में वो अब उत्तराखंड के लिए खेलते नजर आएंगे और वो टीम के कप्तान भी बनाए गए हैं। 26 वर्ष का ये बल्लेबाज दिल्ली की टीम से पिछले कुछ वर्षों में अंदर-बाहर होता रहा है। इसकी वजह से वो अपनी रणजी टीम बदलने को मजबूर हे गए। 

उन्मुक्त ने कहा कि पिछले 2-3 साल से दिल्ली के लिए वो अच्छा नहीं खेल पाए। उन्होंने कई बार वापसी भी की, लेकिन मुझे बार-बार ड्रॉप किया गया। अब मेरे लिए हर मैच मेरे कमबैक मैच की तरह है। दिल्ली के लिए खेलना मेरे लिए काफी कमाल का अनुभव रहा, लेकिन उत्ताखंड अब मेरे लिए अगली चुनौती है। ये जगह मेरे लिए घर के जैसा है। मुझे उम्मीद है कि मैं इस टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन कर पाउंगा।

दिल्ली ने उन्मुक्त को एओसी दे दिया है जिससे कि वो उत्तराखंड की टीम की तरफ से खेल सकें। हालांकि अपनी टीम दिल्ली को छोड़ने की बात पर उन्होंने कहा कि ये मेरे लिए काफी भावुक पल है। टीम का साथ छोड़ना कठिन फैसला था। मैंने दिल्ली में क्रिकेट खेलने का काफी लुत्फ उठाया। उन्होंने अब तक कुल 60 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं जिसमें 34.23 की औसत से कुल 3184 रन बनाए हैं। उन्होंने अब तक 8 शतक और 16 अर्धशतक लगाए हैं। 

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Posted By: Sanjay Savern

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