नई दिल्ली। टेस्ट मैच खेलने वाले देशों में गुरुवार को अफगानिस्तान का नाम भी शामिल हो जाएगा। भारत के खिलाफ अफगानिस्तान अपना पहला टेस्ट मैच बंगलुरु में खेलेगा। क्रिकेट की दुनिया में इस मैच की जो भी अहमियत हो लेकिन भारत की सॉफ्ट डिप्लोमेसी के लिहाज से भी यह मैच एक मील का पत्थर साबित होगा। यह पहला उदाहरण है जब भारत ने एक लोकप्रिय गेम को अपनी डिप्लोमेसी का हथियार बनाया है। भारत को उम्मीद है कि दशकों से हिंसा ग्रस्त अफगानिस्तान के समाज में क्रिकेट की लोकप्रियता मरहम लगाने का काम करेगी और वहां के विभिन्न वर्गो को एक सूत्र में बांधने का काम करेगा। यही वजह है कि भारत आने वाले दिनों में अफगान में क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने के लिए और कदम उठाएगा।

भारत ने सॉफ्ट डिप्लोमेसी के तहत ही यह सुनिश्चित किया है कि जब भारत व अफगानिस्तान के मैच की शुरुआत हो तो उसे देखने के लिए अफगानिस्तान के चीफ एक्जीक्यूटिव अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह भी उपस्थित हो। देश के सूचना व प्रसारण, युवा मामलों और खेल मंत्री राजव‌र्द्धन राठौर भारत के प्रतिनिधित्व के तौर पर वहां रहेंगे। विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि तकरीबन 17 वर्षो से भारत हर तरह के अफगानिस्तान में क्रिकेट को बढ़ावा देने की कोशिश में जुटा है। वर्ष 2001 में अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघ की सदस्यता मिली थी और उसके बाद से भारत वहां के खिलाडि़यों को तमाम तरह की सुविधाएं दे रहा है। ग्रेटर नोएडा (दिल्ली एनसीआर) में एक बेहद आधुनिक स्टेडियम अफगानिस्तान के खिलाडि़यों को उपलब्ध कराया गया है जो एक तरह से अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम का ''होम ग्राउंड'' है। वैसे भारत की मदद से कंधार व अन्य शहरों में क्रिकेट स्टेडियम भी तैयार किया गया है लेकिन सुरक्षा वजहों से खिलाड़ी वहां लगातार नहीं रहते।

बताते चलें कि आइपीएल में पाकिस्तानी खिलाडि़यों को शामिल नहीं किया जाता है लेकिन अफगानिस्तान के खिलाडि़यों ने इसमें धूम मचा रखी है। हाल ही में इंडियन प्रीमियम लीग में अफगानिस्तान के दो क्रिकेट खिलाडि़यों राशीद खान और मोहम्मद नबी को बेहद ज्यादा कीमत पर खरीदा गया और इन दोनों का प्रदर्शन भी बेहद शानदार रहा। आईपीएल मैचों में इन दोनों खिलाडि़यों के प्रशंसकों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है। इससे अफगानिस्तान में क्रिकेट की लोकप्रियता और तेजी से बढ़ी है। भारत हमेशा से अफगानिस्तान में सॉफ्ट डिप्लोमेसी का हिमायती रहा है जिसके तहत वहां विकास से जुड़ी तमाम परियोजनाओं को मदद दी जाती है। इसके तहत अफगानिस्तान में अस्पताल निर्माण से लेकर वहां संसद भवन तक का निर्माण किया गया है। वहां के सैन्य बल व पुलिस बल को भी भारत प्रशिक्षित कर रहा है और उन्हें हथियारों की सीमित मात्रा में आपूर्ति भी की जाती है।

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By Sanjay Savern