नई दिल्ली [

जागरण ब्यूरो]। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कोई फैसला सुनाए बगैर एन श्रीनिवासन और उनकी दुकान सी बन गए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) के पैरों तले जमीन खिसका दी। इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) के पिछले सत्र में सामने आए स्पॉट फिक्सिंग और संट्टेबाजी के मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने अपनी ओर से तीन सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया और उस पर क्रिकेट बोर्ड को 24 घंटे के अंदर राय देने को कहा। शीर्ष अदालत अपने प्रस्ताव पर बोर्ड की राय जानने के बाद शुक्रवार को फैसला सुनाएगा।

न्यायमूर्ति एके पटनायक की पीठ ने श्रीनिवासन की जगह जानेमाने क्रिकेटर सुनील गावस्कर को बीसीसीआइ का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाने का संकेत दिया। इतना ही नहीं कोर्ट ने श्रीनिवासन की टीम चेन्नई सुपरकिंग्स और मैच फिक्सिंग में आरोपी राजस्थान रॉयल्स टीम को सातवें आइपीएल टूर्नामेंट से बाहर रखने का भी प्रस्ताव दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि क्रिकेट और कानून के लिए जो च्च्छा होगा वो करेंगे। आइपीएल टूर्नामेंट 16 अप्रैल से शुरू होने वाला है ऐसे में दो टीमों के बाहर होने की आशंका से मैचों का कार्यक्रम गड़बड़ा सकता है।

पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि श्रीनिवासन को बीसीसीआइ के अध्यक्ष पद से हट जाना चाहिए। उनके पद पर बने रहने से आइपीएल फिक्सिंग मामले की निष्पक्ष जांच हो पाना संभव नहीं है। गुरुवार को इस मामले पर जब सुनवाई शुरू हुई तो बीसीसीआइ ने श्रीनिवासन के पद छोड़ने के बारे में कुछ नहीं कहा, बस एक प्रस्ताव पेश कर इतना कहा कि वह मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के मुताबिक संबंधित लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को तैयार है। यह कहा कि वह किसी भी तरह की जांच कराने को तैयार है। कोर्ट जो चाहे आदेश दे सकता है।

पीठ ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे की भी दलीलें सुनी। उन्होंने जांच पूरी होने तक चेन्नई सुपर किंग्स को आइपीएल से निलंबित करने की भी मांग रखी। पीठ ने इसके बाद इंडिया सीमेंट के अधिकारियों को बीसीसीआइ के कामकाज में शामिल होने से रोकने की पेशकश की। साल्वे ने यह मसला उठाया कि इस तरह के कई अधिकारी अभी बीसीसीआइ टीम का हिस्सा हैं, जिसके बाद कोर्ट ने यह प्रस्ताव रखा।

शीर्ष कोर्ट का तीन सूत्रीय प्रस्ताव

1- स्पॅाट फिक्सिंग की जांच तक सुनील गावस्कर या अन्य कोई अनुभवी क्रिकेटर क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष बने

2-श्रीनिवासन की कंपनी इंडिया सीमेंट का कोई भी कर्मचारी आइपीएल या बोर्ड का हिस्सा न रहे

3-चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स को आइपीएल-7 से निलंबित किया जाए

चपेट में आ सकते हैं धौनी

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के रवैये से भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। कोर्ट ने कहा है कि इंडिया सीमेंट के कर्मचारी आइपीएल या बोर्ड का हिस्सा न रहें, लेकिन धौनी श्रीनिवासन की इस कंपनी में वाइस प्रेसीडेंट हैं। गुरुवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि धौनी ने गलत आचरण के साथ-साथ मुदं्गल समिति के सामने श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन के बारे में झूठ बोला। उन्होंने कहा कि धौनी के खिलाफ हितों के टकराव का मामला बनता है। धौनी के अलावा आइपीएल के सीईओ सुंदर रमन सहित बोर्ड से जुड़े कई अन्य लोग चेन्नई सुपरकिंग्स के स्वामित्व वाली कंपनी इंडिया सीमेंट का हिस्सा हैं।

'क्रिकेट के हित के लिए हमें गहनता से सोचना होगा और आदेश पारित करना होगा। सुनील गावस्कर बीसीसीआइ का काम देखें और उन्हें बोर्ड का अंतरिम अध्यक्ष बनाया जाए।' -सुप्रीम कोर्ट

'फिलहाल मेरे लिए कुछ कहना मुश्किल है, लेकिन अगर देश की शीर्ष अदालत कुछ करने को कहती है तो यह मेरे लिए सम्मान की बात होगी।'- सुनील गावस्कर

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