'बराबरी लाने के लिए फुटबॉल की राह पर चले क्रिकेट', सुनील गावस्कर ने सुझाए क्रांतिकारी बदलाव
सुनील गावस्कर ने टी-20 क्रिकेट में रिकॉर्ड्स की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए टीमों के बीच बड़े अंतर को उजागर ...और पढ़ें


समय कम है?
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सुनील गावस्कर कॉलम
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। एक तरफ वेस्टइंडीज ने रांची में 250 रन का मुश्किल लक्ष्य नौ गेंदें बाकी रहते हुए हासिल कर टी-20 सीरीज बराबर कर ली। वहीं दूसरी तरफ दुनिया के दूसरे हिस्से में टी-20 विश्व कप के क्वालिफायर में मंगोलिया की टीम थाइलैंड के 192/2 के स्कोर के जवाब में सिर्फ 13 रन पर आउट हो गई। जाहिर है, यह इस फॉर्मेट का सबसे कम स्कोर नहीं है।
यह अनचाहा रिकॉर्ड आइवरी कोस्ट के नाम है, जो नाइजीरिया के विरुद्ध सिर्फ सात रन पर आउट हो गई थी। 2024 में मंगोलिया ने सिंगापुर के विरुद्ध टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में सिर्फ 10 रन बनाए थे। इन मैचों को अंतरराष्ट्रीय कहा जाता है, क्योंकि एक देश की टीम दूसरे देश की टीम के विरुद्ध खेलती है।
सवाल यह नहीं है कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय कहा जाना चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि क्या ऐसे बेमेल मैचों के आंकड़ों को रिकॉर्ड में शामिल करने से पहले कोई न्यूनतम मानक तय होना चाहिए। जब कोई टीम इतने कम स्कोर पर आउट हो जाती है तो गेंदबाजों के आंकड़े तभी बेहतर हो सकते हैं जब आईसीसी के उभरते हुए एसोसिएट सदस्य देश एक-दूसरे के विरुद्ध खेलें। इसकी तुलना उन आंकड़ों से करना सही नहीं है जो पूर्ण सदस्य देशों की टीमों के आपस में खेलने पर बनते हैं।
स्तर में इतना बड़ा अंतर होने का मतलब है कि रिकॉर्ड उन खिलाड़ियों के नाम होंगे जिनके बारे में क्रिकेट की दुनिया के ज्यादातर लोगों ने पहले कभी नहीं सुना होगा और शायद आगे भी कभी नहीं सुनेंगे।
फुटबॉल लीग में डिवीजन होते हैं जहां सीजन के आखिर में प्रमोशन और डिमोशन होता है। इसलिए जो भी रिकॉर्ड बनते हैं, उन्हें उसी डिवीजन के रिकॉर्ड के तौर पर बताया जाता है जिसमें वे बने हैं। शायद कुछ ऐसा ही सोचा जा सकता है, जहां देश जिस डिवीजन में खेल रहे हैं, उसके आधार पर अंतर सभी को साफ पता चले। इस तरह, भले ही पूर्ण सदस्य देश और आईसीसी विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने वाले एसोसिएट देश जब आपस में खेलें तो उन्हें इंटरनेशनल कहा जा सकता है, लेकिन बाकियों के लिए इसे डिवीजन-ए इंटरनेशनल या डिवीजन-बी इंटरनेशनल कहा जा सकता है।
इससे खेल को आम तौर पर फॉलो करने वाले लोगों को भी पता चल सकेगा कि क्या हो रहा है। युवराज सिंह के नाम सबसे तेज टी-20 पचासा बनाने का रिकॉर्ड था, जो उन्होंने 2007 आईसीसी टी-20 विश्व कप में इंग्लैंड के विरुद्ध 12 गेंदों में बनाया था। यह रिकॉर्ड तब टूट गया जब नेपाल के दीपेंद्र सिंह ऐरी ने सिर्फ नौ गेंदों में पचास रन पूरे कर लिए, किसके विरुद्ध मंगोलिया के।
इसमें कोई शक नहीं कि नेपाल तेजी से आगे बढ़ रहा है, जैसा कि हमने इस साल की शुरुआत में भारत में हुए टी-20 विश्व कप में देखा था, जब उन्होंने लगभग इंग्लैंड को हरा ही दिया था। इसलिए, इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि उनके बल्लेबाज और गेंदबाज दूसरी एसोसिएट देशों की टीमों को बुरी तरह हरा देते हैं, लेकिन क्या इसे रिकॉर्ड माना जाना चाहिए?
