अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) चेयरमैन के तौर पर शशांक मनोहर का बढ़ा हुआ कार्यकाल जुलाई में खत्म हो रहा है और अब इस पद पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) ने अपनी नजरें गड़ा दी हैं।

बीसीसीआइ अध्यक्ष सौरव गांगुली, पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और पूर्व बीसीसीआइ व आइसीसी अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन इसके प्रमुख दावेदार हैं। हालांकि श्रीनि तभी आइसीसी का दरवाजा खटखटा पाएंगे जब सुप्रीम कोर्ट बीसीसीआइ की याचिका मान ले। बीसीसीआइ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल रखी है जिसमें उसने आइसीसी में अपने प्रतिनिधि के लिए अधिकतम 70 वर्ष की समयसीमा के पुराने आदेश को बदलने की मांग की है।

मालूम हो कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार बीसीसीआइ में 70 साल से अधिक उम्र का कोई पदाधिकारी नहीं हो सकता। यही नहीं आइसीसी में भी बीसीसीआइ की तरफ से 70 साल से अधिक उम्र का प्रतिनिधि नहीं जा सकता। यही नियम श्रीनिवासन के आइसीसी अध्यक्ष बनने की राह में बड़ी बाधा है।

अक्टूबर में जब दिल्ली में केंद्र सरकार के एक बड़े मंत्री के घर में जय शाह को सचिव और सौरव गांगुली को अध्यक्ष बनाने का निर्णय हुआ था तब श्रीनिवासन से भी वादा किया गया था कि उन्हें आइसीसी भेजा जाएगा और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत ली जाएगी। बीसीसीआइ ने पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में याचिका तो लगा दी है लेकिन उसे अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।

बीसीसीआइ सूत्रों के अनुसार केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी आइसीसी में जाने की इच्छा रखते हैं। उधर दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ सहित कई लोगों ने सौरव गांगुली को अध्यक्ष पद का दावेदार बताया है। सुप्रीम कोर्ट अगर बीसीसीआइ की याचिका में मांगी गई राहत को स्वीकार नहीं करता है तो वैसे भी गांगुली को कूलिंग ऑफ नियम के कारण (राज्य और बीसीसीआइ में मिलाकर लगातार छह साल पदाधिकारी होने के कारण तीन साल का आराम) बोर्ड अध्यक्ष से इस्तीफा देना पड़ सकता है।

ऐसे में वह भी आइसीसी जाना चाहते हैं क्योंकि वहां पर बीसीसीआइ का संविधान लागू नहीं होता। आइसीसी 26 तारीख से नामांकन प्रक्रिया शुरू कर देगा और इसके एक-दो दिन बाद ही स्थितियां साफ हो जाएंगी। आइसीसी के वर्तमान चेयरमैन और पूर्व बीसीसीआइ अध्यक्ष शशांक मनोहर नहीं चाहते कि श्रीनि किसी तरह भी उनकी जगह लें।

यही कारण है कि शशांक ने पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश से गांगुली के समर्थन की बात भी की है। कोरोना के बाद उपजी स्थितियों के बाद ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे मजबूत क्रिकेट बोर्डो के लिए भी भारतीय टीम का दौरा बहुत महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि उन्हें धन तभी मिलेगा जब भारतीय टीम उनके यहां का दौरा करेगी। ऐसे में भारत के लिए इन दोनों बोर्डो का समर्थन लेना मुश्किल नहीं होगा।

दक्षिण अफ्रीका ने जो तीन टी-20 सीरीज खेलने की बात कही है उस पर भी बीसीसीआइ की तरफ से मंजूरी तभी मिलेगी जब दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट बोर्ड भारत को कोई लिखित आश्वासन देगा। आइसीसी चेयरमैन वही बन सकता है जो आइसीसी का डायरेक्टर रहा हो। गांगुली फिलहाल आइसीसी के डायरेक्टर हैं जबकि श्रीनि व अनुराग पहले डायरेक्टर रह चुके हैं।

Posted By: Sanjay Savern

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