अभिषेक त्रिपाठी, मैनचेस्टर। रवींद्र जडेजा... पूरा भारत इस समय सिर्फ इस खिलाड़ी की बात कर रहा है। संजय मांजरेकर ने जिसे टुकड़ों में खेलने वाला क्रिकेटर कहा था, उसने एक हद तक न्यूजीलैंड के टुकड़े-टुकड़े कर ही दिए थे। अगर सब कुछ सही रहता तो वह मैच भी भारत को जिता लाते। उन्होंने इस मैच के हर टुकड़े में शानदार काम किया। उन्होंने गेंदबाजी, क्षेत्ररक्षण और बल्लेबाजी तीनों में टीम इंडिया की लाज रखी।

भारतीय टीम भले ही यह मैच हार गई, लेकिन जडेजा ने सबका दिल जीत लिया। 41 टेस्ट, 153 वनडे और 40 टी-20 मुकाबले खेलने वाले सौराष्ट्र के बायें हाथ के ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने पहले गेंदबाजी में हेनरी निकोलस को बोल्ड किया, फिर टेलर को शानदार तरीके से रन आउट किया और उसके बाद लाथम का शानदार कैच लिया। यही नहीं, जब भारतीय टीम ने 92 रन के कुल स्कोर पर अपने शीर्ष छह बल्लेबाज खो दिए थे तब उन्होंने 130 करोड़ लोगों के अंदर आशा का संचार किया। जिस पिच पर भारत ही नहीं, न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों का बल्ला नहीं चल रहा था वहां वह बेहतरीन तरीके से फ्रंटफुट और बैकफुट दोनों पर खेल रहे थे। न्यूजीलैंड के 10 और भारत के 10 बल्लेबाज मिलकर जिस पिच पर दो छक्के लगा पाए वहां जडेजा ने अकेले चार अद्भुत छक्के लगाए।

उन्होंने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलते हुए 59 गेंदों पर चार चौके और चार छक्कों की बदौलत 77 रन बनाए। वह मैच के सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहे। उन्होंने जब अपना अर्धशतक पूरा किया तो तलवार की तरह बल्ले को भांजा और साथ में ही अपने आलोचकों खासतौर पर संजय मांजरेकर को जवाब दिया। जब विराट से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में जो हुआ है उसमें मुझे नहीं लगता है कि हममें से किसी को जडेजा को कुछ कहने की जरूरत है। उन्होंने हंसते हुए कहा कि मैं ईमानदारी से कहूं तो वह इसके लिए तैयार थे। उन्होंने इतने दबाव में जिस जुझारूपन से खेला वह आपने देखा होगा। हमने कई बार उन्हें टेस्ट में ऐसा करते हुए देखा है। अगर मैं गलत नहीं हूं तो वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में तीन तिहरे शतक लगा चुके हैं। उनके अंदर जबर्दस्त प्रतिभा है। मैं 10 साल से उसके खेल को देख रहा हूं और उसके साथ भी खेला हूं। मेरे हिसाब से यह उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी थी क्योंकि यहां पर जिस तरह का दबाव था, एक तरह से हम मैच से बाहर हो चुके थे और उसके बाद उन्होंने ऐसा किया। यह बहुत ही प्रेरणादायक था। जडेजा अब तक वनडे में 11 अर्धशतकों के साथ 2112 रन तो टेस्ट में एक शतक और 10 अर्धशतक की बदौलत 1485 रन बना चुके हैं।

मालूम हो कि मांजरेकर ने कहा था कि जडेजा बिट्स एंड पीसेस खिलाड़ी हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि रवींद्र जडेजा को वह विश्व कप की अंतिम एकादश में नहीं रखना चाहिए। इसके बाद जडेजा ने मांजरेकर को जवाब देते हुए उन्हें वर्बल डायरिया से पीड़ित बताया था। जडेजा ने ट्वीट किया था कि मैंने अभी तक आपसे दोगुने मैच खेले हैं और और अभी खेल ही रहा हूं। उन लोगों का सम्मान करना सीखिए, जिन्होंने कुछ हासिल किया है। मैंने आपके वर्बल डायरिया के बारे में काफी ज्यादा सुन रखा है। मांजरेकर ने इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच के लिए अपनी टीम चुनी थी, जिसमें उन्होंने जडेजा को स्थान दिया था।

मांजरेकर द्वारा अपनी टीम में जडेजा को स्थान दिए जाने के बाद इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने उनसे चुटकी ली थी। वॉन ने ट्वीट करते हुए मांजरेकर से कहा था कि आखिर आपने जडेजा को अपनी टीम में स्थान दे दिया। इसके बाद दोनों के बीच ट्विटर पर काफी बहस हुई थी। इसके बाद मांजरेकर ने वॉन को इंस्टाग्राम पर ब्लॉक कर दिया था।

निराशानजनक परिणाम, लेकिन भारतीय टीम के अंत तक जारी रहे जुझारूपन को देखकर अच्छा लगा। भारत ने पूरे टूर्नामेंट में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों अच्छी की। हार-जीत खेल का हिस्सा है। भविष्य के मैचों के लिए शुभकामनाएं। - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

टीम से बाहर रहकर भी की मदद
उन्होंने सिर्फ अंतिम एकादश में रहकर ही नहीं, स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर भी टीम की मदद की। वह इस विश्व कप में बतौर क्षेत्ररक्षक सबसे ज्यादा रन बचाने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने इस टूर्नामेंट में कुल 41 रन बचाए। जडेजा टूर्नामेंट के सिर्फ दो मैच ही खेले हैं, जो कि इस लिस्ट में शामिल अन्य क्रिकेटर्स के मुकाबले काफी कम हैं। उन्होंने टूर्नामेंट का अपना पहला मैच श्रीलंका के खिलाफ और दूसरा मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला। टूर्नामेंट के दो मैचों में जडेजा ने अपनी फील्डिंग से कुल 41 रन बचाए। इनमें से 24 रन 30 गज के अंदर रहकर तो 17 रन आउटफील्ड पर बचाए।

इन दो मैचों में उन्होंने दो विकेट लेने के अलावा तीन कैच भी लिए। श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने टूर्नामेंट का अपना पहला मैच खेला, जिसमें उन्होंने एक विकेट लेने के अलावा लाहिरु थिरिमाने का कैच भी लिया था, वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में भी उन्होंने एक विकेट लेने के अलावा दो कैच (केन विलियम्सन और टॉम लाथम) लिए। उन्होंने एक रन आउट भी किया। जडेजा को भले ही सिर्फ दो बार अंतिम एकादश में शामिल होने का मौका मिला लेकिन स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने कुछ मैचों में फील्डिंग भी की। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में उन्होंने दो कैच लिए थे। इस दौरान चहल की गेंद पर ग्लेन मैक्सवेल (28) को लपका था और फिर भुवनेश्वर की बॉल पर एडम जांपा (01) का कैच लिया था। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ मैच में उन्होंने पहले जेसन रॉय (66) को कुलदीप की गेंद पर कैच किया, फिर बेन स्टोक्स (79) को बुमराह की गेंद पर आउट किया।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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