नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान व विकेटकीपर-बल्लेबाज महेंद्र सिंह धौनी (Dhoni) ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए खुद को उपबल्ध नहीं बताया था, जिसके बाद टीम में उनका चयन नहीं किया गया। अब धौनी अपने अगले दो महीने सेना के साथ बिताने वाले हैं। धौनी ने सेना से ये वादा पहले ही कर दिया था जिसे वो निभाने जा रहे हैं। अब धौनी के बारे में एक अहम जानकारी सामने आई है। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक धौनी ने भारतीय सेना के साथ ट्रेनिंग करने की इजाजत मांगी थी जिसे मान ली गई है। थल सेना अध्यक्ष बिपिन रावत ने उन्हें इस बात की इजाजत दे दी है। 

बिपिन रावत से हरी झंडी मिलने के बाद अब धौनी पैराशूट रेजिमेंट बटालियन के साथ ट्रेनिंग लेंगे। उम्मीद की जा रही है कि अपनी ट्रेनिंग का कुछ हिस्सा वो जम्मू-कश्मीर में पूरा करेंगे। हालांकि ये साफ कर दिया गया है कि धौनी भले ही सेना के साथ ट्रेनिंग ले लें, लेकिन वो किसी भी एक्टिव ऑपरेशन का हिस्सा नहीं होंगे। आपको बता दें कि धौनी टैरिटोरियल आर्मी के पैराशूट रेजिमेंट में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल भी हैं और वो अपने अगले दो महीने अपने रेजिमेंट के साथ बिताएंगे। 

Top Army Sources: MS Dhoni’s request to train with the Indian Army has been approved by General Bipin Rawat. He would train with the Parachute Regiment battalion. Some part of the training is also expected to take place in J&K. Army won't allow Dhoni to be part of any active Op. pic.twitter.com/jMCHExc9JS

गौरतलब है कि विश्व कप में धौनी के प्रदर्शन को लेकर काफी सवाल खड़े हुए थे। खासतौर पर उनकी धीमी बल्लेबाजी को लेकर उनकी काफी आलोचना की गई थी। धौनी को लेकर ये कहा जा रहा था कि वो विश्व कप के बाद संन्यास ले लेंगे,लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि वो फिलहाल क्रिकेट को अलविदा नहीं कहने जा रहे हैं। धौनी के संन्यास पर भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने भी कहा है कि धौनी महान खिलाड़ी हैं और उन्हें पता है कि उन्हें कब इसके बारे में फैसला लेना है। संन्यास लेना उनका निजी फैसला है और इस पर कोई दबाव नहीं है।

धौनी को 2011 में इंडियन टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल का रैंक दिया गया था। धौनी का आर्मी प्रेम किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह बचपन से ही फौजी बनना चाहते थे। वो रांची के कैंट एरिया में अक्सर घूमने चले जाते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। वो फौज के अफसर नहीं बन पाए और क्रिकेटर बन गए।

Posted By: Sanjay Savern