अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। जहां बीसीसीआइ भारत में इंडियन प्रीमियर लीग का आयोजन करता है तो तमिलनाडु क्रिकेट संघ (टीएनसीए), मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) और कर्नाटक क्रिकेट संघ (केसीए) भी इसी तर्ज पर अपनी-अपनी क्रिकेट लीग आयोजित कर सकते हैं। देश के कई प्रसारणकर्ता अन्य राज्यों से भी ऐसी लीग शुरू करने की उम्मीद कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) सहित कई राज्य संघों ने इसके लिए हाथ भी बढ़ाए थे लेकिन फिक्सिंग से बदनामी के डर ने उन्हें कदम पीछे खींचने को मजबूर कर दिया।

आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले ने देश के क्रिकेट को कठघरे में खड़ा ही किया था और उसकी वजह से लोढ़ा समिति की सिफारिशें भी बीसीसीआइ पर लागू हुई। इसके अलावा तमिलनाडु प्रीमियर लीग में भी कई बार फिक्सिंग की खबरें सामने आई और गुरुवार को प्रथम श्रेणी क्रिकेटर और तीन आइपीएल टीमों का हिस्सा रहे सीएम गौतम एवं कर्नाटक रणजी टीम के उनके साथी अबरार काजी को कथित तौर पर कर्नाटक प्रीमियर लीग (केपीएल) में स्पॉट फिक्सिंग करने के लिए धनराशि स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज और केपीएल की टीम बेल्लारी टस्कर्स के कप्तान गौतम एवं उनके टीम साथी काजी को शहर की केंद्रीय अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया, जो केपीएल के पिछले दो सत्रों में स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों की जांच कर रही है। इसने बाकी राज्य संघों को इस तरह की लीग चालू करने की योजना के बारे में पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया है।

यूपीसीए के एक अधिकारी ने कहा कि हमारे पास कई बार यूपी प्रीमियर लीग चालू करने के प्रस्ताव आए। हमने कई बार मन भी बनाया। कई प्रसारणकर्ता भी हमारे पीछे पड़े रहे लेकिन जब तक फिक्सिंग रोकने की कोई फुलप्रूफ योजना नहीं सामने आती तब तक हम इसे चालू नहीं करेंगे। एक और राज्य संघ के अधिकारी ने भी इसी तरह की चिंता जताई।

जब उनसे पूछा गया कि एंटी करप्शन यूनिट को मजबूत करके लीग चालू की जा सकती हैं तो उन्होंने कहा कि अगर कोई मालिक ही ऐसा करने लगे तो आप क्या करेंगे? ऐसी लीग में फ्रेंचाइजी को जब बहुत ज्यादा फायदा नहीं होता है तो वे अन्य हथकंडे अपनाने लगती हैं। आपने देखा ही होगा कि कर्नाटक प्रीमियर लीग का जो हालिया मामला सामने आया है उसमें बेलागावी पैंथर्स टीम के मालिक को भी गिरफ्तार किया गया था। ऐसे में एंटी करप्शन यूनिट क्या कर लेगी।

Posted By: Sanjay Savern

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