केपटाउन, अभिषेक त्रिपाठी। एक हाथ में बड़ा बैग तो दूसरे में धूप से बचने के लिए छाते। बैग के अंदर पानी की बोतल, कोल्ड डिंक व बीयर के केन के साथ खाने का सामान। केपटाउन के न्यूलैंड्स स्टेडियम में इन दिनों कुछ इस तरह ही छुट्टियां बिताईं जा रही हैं। देश ही नहीं विदेश से आने वाले सैलानी भी क्रिकेट स्टेडियम में पिकनिक मना रहे हैं। टेबल माउंटेन की तलहटी में बने इस खूबसूरत स्टेडियम में शुक्रवार को मैच के पहले दिन यहां कुछ ऐसा ही मजमा लगा था लेकिन शनिवार को तो स्टेडियम का माहौल ही कुछ अलग था।

बादलों के बीच से झांकती धूप के बीच टेस्ट क्रिकेट का आनंद लेने का मजा दुनिया के कुछ चुनिंदा स्टेडियमों में ही मिलता है। जब दुनिया में टी-20 क्रिकेट का बोलबाला हो और कई देशों में टेस्ट क्रिकेट मर रहा हो तो ऐसे में किसी स्टेडियम में क्रिकेट के सबसे पुराने फॉर्मेट का मजा लेते हुए जोशीले दर्शकों को देखना वाकई में अद्भुत है। ऐसे में इसे टेस्ट क्रिकेट के लिए जन्नत कहा जाए तो कम नहीं है। निश्चित तौर पर यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। आइसीसी टेस्ट क्रिकेट को बचाने के लिए डे-नाइट टेस्ट, चार दिनी टेस्ट और टेस्ट लीग आयोजित कर रही है। निश्चित तौर उसके लिए यह सुखद पल होगा।

केपटाउन में शनिवार और रविवार को छुट्टी का माहौल रहता है और यही कारण है कि इन दो दिन यहां सड़कों पर सन्नाटा छाया रहता है और इन दो दिनों को लोग खुलकर जीते हैं। यही कारण है कि नए साल के पहले सप्ताहांत में लोग स्टेडियम में उमड़कर आए। दक्षिण अफ्रीकी टीम ने उनके मजे को दोगुना कर दिया। आपको ऐसा माहौल भारत के क्रिकेट स्टेडियमों में कम ही देखने को मिलता है क्योंकि वहां तो सुरक्षा कारणों से मैदान के अंदर पानी की बोतल भी ले जाना भी मना होता है। हालांकि इसके बावजूद भारत में क्रिकेट के चाहने वाले दक्षिण अफ्रीका से ज्यादा हैं। दक्षिण अफ्रीका में भी सुरक्षा को लेकर तमाम समस्याएं हैं लेकिन अच्छी बात ये है कि वे मैदान के अंदर नहीं हैं।

(केपटाउन में टेस्ट मैच का आनंद लेते दर्शक)

खास है टेस्ट क्रिकेट 

टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत इंग्लैंड से हुई। धीरे-धीरे इस खेल में ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज, भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और न्यूजीलैंड उतर आए। दक्षिण अफ्रीका की इसमें एंट्री थोड़ी देर से हुई। अब तो बांग्लादेश, आयरलैंड और अफगानिस्तान जैसे देश भी टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले देश बन गए हैं। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली एशेज सीरीज को टेस्ट क्रिकेट की सर्वोच्च प्रतिद्वंद्विता माना जाता है। संयोग की बात है जहां ऑस्ट्रेलिया में एशेज सीरीज में प्रतिद्वंद्विता चल रही है तो वहीं द. अफ्रीका में फ्रीडम सीरीज में दुनिया की नंबर वन टीम भारत और नंबर दो द. अफ्रीका आपस में खेलकर पुरानी दोस्ती की मिसाल पेश कर रही हैं।

टी-20 के दौर में भी कुछ ऐसी टीमें और ऐसे स्टेडियम हैं जहां पर ये आपस में भिड़ते हैं तो असली क्रिकेट का मजा मिलता है।

इंदौर, धर्मशाला और कोलकाता 

अगर भारत की बात करें तो वहां लगभग साल भर क्रिकेट होता है। वनडे और टी-20 में तो लगभग हर स्टेडियम हाउसफुल होता है लेकिन टेस्ट को लेकर क्रेज धीमे-धीमे कम हो गया है। इसी को देखते हुए बीसीसीआइ ने हाल ही में कई नए स्टेडियमों को टेस्ट का दर्जा दिया जिसका शानदार असर भी देखने को मिला। इंदौर के होल्कर स्टेडियम में भारत-न्यूजीलैंड के बीच हुए पहले टेस्ट के दौरान तो लगभग पांचों दिन हाउसफुल जैसी स्थिति रही। धर्मशाला के एचपीसीए स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए टेस्ट देखने के लिए दूसरे प्रदेशों से दर्शक पहुंचे थे। इस स्टेडियम को दुनिया का सबसे खूबसूरत स्टेडियम कहा जाता है। यह दुनिया के कई क्रिकेटरों का पसंदीदा मैदान बन गया है। क्रिकेट संस्कृति और दर्शकों की संख्या के मामले में कोलकाता का ईडन गार्डेस आज भी सबसे आगे है।

 

(धर्मशाला में टेस्ट मैच का आनंद लेते दर्शक)

लॉर्डस और ओवल

टेनिस के सबसे पुराने ग्रैंडस्लैम विंबलडन को तो आपने देखा ही होगा। कैसे सूट-बूट में बैठे दर्शक बड़ी शालीनता के साथ हाथों में बियर के मग लेकर बस किसी अच्छे शॉट पर एक साथ तालियां बजा देते हैं। दरअसल ऐसा ही है क्रिकेट को जन्म देने वाले इंग्लैंड के दर्शकों की संस्कृति। 1709 में कांउटी क्रिकेट के जन्म के बाद से ऑस्ट्रेलिया के साथ अभी खेली जा रही एशेज सीरीज तक इंग्लैंड के दर्शकों का मैदान के स्टैंड पर बैठने का रवैया आज तक नहीं बदला। क्रिकेट के मक्का लॉर्डस और ओवल में सूट-बूट पहने और गोल टोपी लगाए दर्शक बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं। किसी भी टीम की तरफ से चौके-छक्के लगने के साथ विकेट लेने या क्षेत्ररक्षक के अच्छे प्रयास पर तालियां बजती हैं और अगली गेंद शुरू होने से पहले ही यह बंद हो जाती हैं। ऐसा लगता है कि कोई निर्देशक पीछे बैठकर उन्हें ऐसा करने को कह रहा हो लेकिन ऐसा नहीं है बल्कि यह यह इस मैदान की क्रिकेट संस्कृति का हिस्सा है।

(लॉर्डस में टेस्ट मैच का लुत्फ उठाते दर्शक)

केपटाउन, सेंचुरियन और जोहानिसबर्ग

दक्षिण अफ्रीकी मैदानों की बात की जाए तो भारतीय टीम इस समय केपटाउन के न्यूलैंड्स स्टेडियम में खेल रही है। इसके बाद उसे सेंचुरियन के सुपर स्पोर्ट्स पार्क और जोहानिसबर्ग के वांडर्स पार्क में खेलना है। यहां पर भी टेस्ट गर्मी में ही खेले जाते हैं। यहां कुछ स्टैंड ढलान वाले पार्क की तरह बनाए गए हैं जिसमें सीटें नहीं लगी हैं। निश्चित तौर पर यह नजारा अद्भुत रहता है। ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों की तरह प्रोटियाज दर्शक इतने उत्तेजित नहीं है।

(केपटाउन में टेस्ट मैच का लुत्फ उठाते दर्शक)

वाका, सिडनी और मेलबर्न

दशकों तक क्रिकेट पर राज करने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम के दर्शक अंग्रेजों की अपेक्षा आक्रामक हैं। वे अपनी टीम को जिताने के लिए अमादा दिखते हैं। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड, सिडनी क्रिकेट ग्राउंड और पर्थ के वाका स्टेडियम में यह दिखने को मिल जाएगा। यहां इंग्लैंड ही नहीं भारत और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाले टेस्ट मैच में भी दर्शकों की जमकर भीड़ होती है। जबसे भारतीय टीम टेस्ट रैंकिंग में ऊपर आई है तबसे इन दोनों टीमों में प्रतिद्वंद्विता काफी बढ़ गई हैं। मंकी कांड इस बात का गवाह है। इंग्लैंड की तरह यहां भी अधिकतर क्रिकेट गर्मी में ही खेला जाता है इसलिए मैदान में शर्ट उतारे दर्शक दिखना आम है। यहां प्रतिद्वंद्वियों को दर्शकों की हूटिंग का सामना करना पड़ता है।

(मेलबर्न में टेस्ट मैच का लुत्फ उठाते दर्शक)

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Posted By: Pradeep Sehgal

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