नई दिल्ली,जागरण न्यूज नेटवर्क। टीम इंडिया जब बुधवार से विशाखापट्टनम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का आगाज करेगी तो टीम प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी सही टीम संयोजन की होगी। टेस्ट रैंकिंग में दुनिया की नंबर एक टीम के कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री के दिमाग में कई चीजें घूम रही होंगी। खासकर विश्वस्तरीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की तालिका में शीर्ष स्थान बरकरार रखने के लिए कोहली और शास्त्री को जीत का ब्रह्मास्त्र खोजने की चुनौती होगी।

रोहित शर्मा का होगा 'टेस्ट'

शॉर्ट फॉर्मेट में दुनिया के सबसे खतरनाक सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा का 2 अक्टूबर से एक बड़ा टेस्ट होने जा रहा है। रोहित शर्मा पहली बार टेस्ट क्रिकेट में ओपनिंग करने उतरेंगे। अभी तक रोहित शर्मा टेस्ट क्रिकेट में मिडिल ऑर्डर से भी नीचे बल्लेबाजी करने उतरे हैं। अब सभी की निगाहें हिटमैन रोहित शर्मा से होंगी, क्योंकि बाकी के सलामी बल्लेबाज फ्लॉफ साबित रहे हैं।

पंत या साहा कौन बनेगा पहली पसंद

कप्तान और कोच के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी युवा रिषभ पंत या अनुभवी रिद्धिमान साहा में से किसी एक को पहली पसंद के तौर पर चुनना है। दुनिया जानती है कि पंत सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में से एक हैं, लेकिन उनकी विकेटकीपिंग में अभी भी सुधार की गुंजाइश है। वहीं दूसरी ओर साहा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपरों में से एक हैं, लेकिन उनकी बल्लेबाजी तेज गेंदबाजों के खिलाफ मुश्किल में हो सकती है।

हालांकि भारत में गति और उछाल ज्यादा नहीं होगा, ऐसे में यह फैक्टर साहा के साथ जाता है। दोनों में से कौन अंतिम-11 में जगह बनाएगा, यह पूरी तरह से कोहली और शास्त्री पर ही निर्भर करता है। शास्त्री ने हाल ही में पंत की सराहना की थी, लेकिन इससे यह पता नहीं चलता कि टीम प्रबंधन दिल्ली के इस विकेटकीपर को सिर्फ सफेद गेंद के क्रिकेट में आगे बढ़ाना चाहता है या फिर टेस्ट क्रिकेट में भी उनका भविष्य देख रहा है।

अश्विन पर माथापच्ची

मूल रूप से ऑफ स्पिनर की हैसियत से खेलने वाले रविचंद्रन अश्विन अपनी गेंदबाजी में लगातार नई-नई विविधताएं जोड़ रहे हैं। इतना ही नहीं बल्लेबाजी में भी वह पूरे भरोसे के साथ बल्ला थामते हैं। उनके नाम चार टेस्ट शतक हैं और विकेट निकालने में भी वह माहिर हैं। इसके बावजूद अश्विन को विंडीज दौरे पर टेस्ट टीम में अंतिम-11 में खेलने का मौका नहीं मिला।

भारत में पिचें स्पिनर्स को मदद करती हैं और ऐसे में यहां भारत दो स्पिनर्स के साथ मैदान में उतरेगा तो अब देखना होगा कि टीम प्रबंधन अश्विन पर भरोसा जताता है या फिर कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव को मौका देता है। कुल मिलाकर इस सीरीज में अंतिम-11 में जगह बनाने के लिए रवींद्र जडेजा, कुलदीप और अश्विन में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।

उमेश के पास मौका

जसप्रीत बुमराह जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज के टीम में नहीं होने से टीम इंडिया की मुश्किलें जरूर बढ़ी है, लेकिन चयनकर्ताओं ने उनकी जगह विदर्भ के अनुभवी तेज गेंदबाज उमेश यादव को टीम में शामिल किया है। इशांत शर्मा और मुहम्मद शमी सीनियर गेंदबाज के टीम में रहने और स्पिनरों के अनुरूप विकेट होने पर उमेश के लिए अंतिम-11 में जगह बनाना चुनौती होगी।

उमेश ने पिछले घरेलू सत्र में बेहद दमदार गेंदबाजी की थी, जहां उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ हैदराबाद में मैच में 10 विकेट चटकाए थे। रिवर्स स्विंग में माहिर उमेश के लिए टीम में जगह बनाए रखने का भी यह मौका होगा, क्योंकि बुमराह की वापसी उनके लिए आने वाले समय में टीम में स्थान बनाना मुश्किल कर देगी। उमेश के नाम 41 टेस्ट में 119 विकेट दर्ज हैं।

घर में रहाणे की चुनौती

करीब दो साल बाद वेस्टइंडीज में टेस्ट शतक लगाने वाले रहाणे अपनी उम्दा लय को यहां कायम रखना चाहेंगे। रहाणे पर एक दबाव यह भी होगा कि वह अपने घर में उतने सफल नहीं हुए, जितना विदेशों में हुए हैं। 10 टेस्ट शतक बना चुके रहाणे के नाम भारत में सिर्फ तीन ही शतक हैं। उनका कुल टेस्ट औसत 42.23 है लेकिन अगर सिर्फ भारत में उनका औसत देखें तो यह गिरकर 34.54 हो जाता है, जबकि विदेशों में वह 46.76 के औसत से रन बनाते हैं। रहाणे अपने आलोचकों को यहां भी जवाब देना चाहेंगे।

हनुमा की निगाहें घर में अच्छे प्रदर्शन पर

पिछले साल इंग्लैंड में टेस्ट पदार्पण करने वाले हनुमा विहारी ने अभी तक सिर्फ छह टेस्ट मैच खेले हैं। 45.60 के औसत से रन बनाने वाले विहारी ने खुद को मध्यक्रम में स्थापित कर लिया है। इस सीरीज में विहारी पहली बार भारत में टेस्ट मैच खेलेंगे। वेस्टइंडीज में अपने टेस्ट करियर का पहला शतक ठोक चुके विहारी भी अपनी लय को कायम रखना चाहेंगे। 

Posted By: Vikash Gaur

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