इंदौर, अभिषेक त्रिपाठी। तूफानों से आंख मिलाओ, सैलाबों पे वार करो, मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर कर दरिया पार करो। मशहूर शायर राहत इंदौरी की ये दो लाइनें उनके ही शहर में हुए मुकाबले में भारतीय टीम के प्रदर्शन पर मुफीद बैठती हैं। टीम इंडिया ने कुछ इसी तरह बिना थके, बिना हारे, बिना किसी के सहारे ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराकर वनडे में नंबर वन का रैंक भी हासिल कर लिया।

विराट की सेना टेस्ट में पहले से ही नंबर वन है। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को इस मैदान के इतिहास को देखते हुए 294 रनों का लक्ष्य दिया था जिसे भारत ने पांच विकेट पर हासिल कर लिया। फिंच ने ऑस्ट्रेलिया के लिए शतकीय पारी जरूर खेली पर कुलदीप के दो विकेट और ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की अर्धशतकीय पारी मेहमानों पर भारी पड़ गई।

पाटा पिच के मास्टर रोहित 

पाटा पिच पर हमेशा अच्छी बल्लेबाजी करने वाले रोहित शर्मा (71) ने अजिंक्य रहाणो (70) के साथ मिलकर टीम को अच्छी शुरुआत भी दिलाई। रोहित ने छह चौकों के साथ चार शानदार छक्के मारे। एक बार तो गेंद स्टेडियम के बाहर भी चली गई।

ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज केन रिचर्डसन ने नौवें ओवर की तीसरी गेंद फेंकी तो रोहित ने आगे बढ़ने की कोशिश की। रिचर्डसन ने लेग स्टंप के ऊपर शॉर्ट गेंद फेंकी। रोहित ने कमर से ऊपर आई गेंद को आराम से पकड़ा और स्टेडियम के बाहर भेज दिया। उन्होंने जैसे ही यह किया पूरा स्टेडियम गूंज उठा। हालांकि 139 के स्कोर पर रोहित को कूल्टर नील ने तो 147 के कुल स्कोर पर कमिंस ने रहाणो को आउट करके भारत को दो झटके दिए।

कप्तान कोहली (28) और केदार जाधव (02) गंदे शॉट खेलकर आउट हुए। जब लग रहा था कि टीम दबाव में आ जाएगी तो कलाकार पांड्या (78) और मनीष पांडे (नाबाद 36) ने पांचवें विकेट के लिए 78 रनों की साझेदारी कर जीत की राह प्रशस्त कर दी।

पांड्या ने 72 गेंदों की पारी में पांच चौके और चार शानदार छक्के लगाए। जब पांड्या क्रीज पर आए तो इंदौरियों ने सबसे ज्यादा शोर मचाया।

उन्हें भी पता था कि यह बंदा मैच में जीत के साथ मजा भी दिलाएगा। पांड्या ने किया भी वैसा ही। 37वें ओवर में स्मिथ ने उनका कैच भी छोड़ा। 45वें ओवर की चौथी गेंद पर उन्होंने जो शॉट मारा उसने सभी का दिल लूट लिया। स्टोइनिस की शॉर्ट स्लो गेंद को आखिरी क्षणों पर ऐसा बल्ला लगाया कि गेंद कीपर के ऊपर से चौके के लिए गई। इसकी टाइमिंग इतनी अच्छी थी कि हर कोई वाह-वाह करने लगा। अगले ओवर में कमिंस ने 146 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फेंकी गेंद पर उन्हें मिड ऑन पर रिचर्डसन के हाथों लपकवाया। जब वह आउट हुए तो टीम को 24 गेंदों पर सिर्फ नौ रनों की जरूरत थी। पांडे और धौनी (नाबाद 03) ने यह काम आसानी से पूरा कर लिया।

ऑस्ट्रेलिया की सधी शुरुआत 

ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी का निर्णय किया। जैसा कि एक दिन पहले डेविड वार्नर ने कहा था कि वे शुरू में विकेट बचाकर भारतीय स्पिनरों से लड़ने की रणनीति अपनाएंगे वैसा ही उन्होंने रविवार को किया। उन्होंने 13 ओवर तक कोई विकेट नहीं गिरने दिया। 14वें ओवर की तीसरी गेंद पर वार्नर (42) पांड्या का शिकार बने। पांड्या की बेहतरीन गेंद पर वह बोल्ड हो गए। हालांकि इसके बाद फिट होकर लौटे फिंच (124) और स्मिथ (63) ने भारतीय खेमे में बेचैनी ला दी और एक समय ऐसा लगने लगा कि मेहमान टीम इस छोटे और बल्लेबाजी के मुफीद मैदान में 350 रनों का आंकड़ा पार कर लेगी लेकिन आखिरी के ओवरों में कुलदीप, चहल और बुमराह ने उन्हें 300 के अंदर ही रोक दिया।

फिंच की शानदार बल्लेबाजी 

चोटिल होने के कारण पिछले दो वनडे में नहीं खेलने वाले फिंच ने वापसी करते हुए वनडे करियर का आठवां और भारत के खिलाफ दूसरा शतक लगाया। इससे पहले भारत के खिलाफ उन्होंने अपना पहला शतक (107) 20 जनवरी 2016 को कैनबरा में लगाया था। वनडे में ये फिंच का आखिरी शतक था। इसके 19 महीने बाद एक बार फिर उन्होंने भारत के खिलाफ ही शतक लगाया। यह एशियाई सरजमीं पर भी उनका पहला शतक है।

कुलदीप, बुमराह का कमाल 

ऑस्ट्रेलिया ने 37.4 ओवर में दो विकेट पर 224 रन बना लिए थे और ऐसा लग रहा था कि अगले 12 ओवरों में टीम बड़ा स्कोर बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुलदीप ने उन्हें इसी स्कोर पर जाधव के हाथों फिर फिर 243 के कुल योग पर स्मिथ को बुमराह के हाथों आउट कराकर उनकी स्पीड में ब्रेक लगा दी। हमेशा की तरह लंबे शॉट खेलने के चक्कर में विकेट गंवाने वाले ग्लेन मैक्सवेल (05) चहल की गेंद पर स्टंप हो गए। चहल ने इस सीरीज में लगातार तीसरी बार मैक्सवेल को आउट किया। इसके बाद तो रन गति थम गई। बुमराह ने हेड (04) व हैंड्सकोंब (03) को आउट करके रही सही कसर भी पूरी कर दी। मेहमानों ने आखिरी 10 ओवरों में 59 रन ही बनाए।

छा गए पांडे जी 

पांडे के कैच ने बहुत तालियां बटोरीं। ऑस्ट्रेलियाई पारी का 48वां ओवर बुमराह फेंक रहे थे। ओवर की पांचवीं गेंद को हैंड्सकोंब ने लांग ऑफ पर उठाकर मारा। ऐसा लगा कि गेंद छह रन के लिए सीमा रेखा के बाहर गिरेगी। तभी पांडे ने हवा में छलांग लगा शानदार कैच लपका पर उन्हें लगा कि वह सीमा रेखा पार कर जाएंगे। फिर क्या था, उन्होंने गेंद को वापस मैदान के अंदर उछाला और खुद सीमा रेखा के अंदर आकर एक बार फिर कैच लपक लिया।

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Posted By: Mohit Tanwar

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