नॉटिंघम, अभिषेक त्रिपाठी।  2014 में भारतीय टीम ने इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जिसकी शुरुआत ट्रेंट ब्रिज टेस्ट में ड्रॉ के साथ हुई थी। लॉ‌र्ड्स टेस्ट भारत ने अपने नाम किया और सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल की, लेकिन इसके बाद इंग्लैंड ने लगातार तीनों टेस्ट अपने नाम करके सीरीज को 3-1 से अपने नाम किया और मेहमान टीम की सीरीज में धमाकेदार शुरुआत एक मायूसी भरे नतीजे में बदल गई।

वह दौरा वर्तमान भारतीय कप्तान विराट कोहली के लिए बुरे सपने की तरह था। वह 2014 में पूरी तरह असफल रहे थे और पांच टेस्ट मैचों की 10 पारियों में 134 रन ही बना पाए थे, लेकिन हालिया इंग्लैंड दौरे में उन्होंने तीन टेस्ट मैचों की छह पारियों में ही 440 रन तो बनाए ही साथ ही हारी बाजी को भी पलट दिया। 

जहां 2014 में टीम इंडिया एक टेस्ट जीतने के बाद सीरीज हार गई थी तो यहां विराट के शानदार प्रदर्शन के बाद उसने शुरुआती दो टेस्ट हारने के बाद जीत हासिल की है। इसके साथ ही विराट इंग्लिश कंडीशन के चक्रव्यूह से भी बाहर निकल गए हैं। 2014 में इंग्लिश कंडीशन उन्हें सताने वाले जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड जैसे स्विंग गेंदबाज अब उन्हें परेशान नहीं कर पा रहे हैं।

विराट का फॉर्म में होना जरूरी

भारतीय कप्तान ने इस सीरीज के पहले मैच में 200 रन बनाए थे, लेकिन भारतीय टीम का दूसरा कोई बल्लेबाज उनका साथ नहीं दे सका और नतीजा यह हुआ कि चौथी पारी में महज 194 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही टीम इंडिया 31 रनों से मैच हार गई।

तीसरे टेस्ट में कोहली के बल्ले ने फिर कमाल दिखाया और इस बार उन्हें दूसरे बल्लेबाजों का भी साथ मिला। संयोग से इस बार भी दोनों पारियों में मिलाकर उन्होंने 200 रन बनाए। पहली पारी में 97 रन और दूसरी में 103 रन की पारी खेलने वाले विराट मैन ऑफ द मैच तो बने ही, साथ ही उन्होंने टीम को जीत भी दिलाई। 

साल 2014 में उनका बल्ला खामोश रहा था और उनकी काफी आलोचना भी हुई थी। वह पिछले दौरे से इतना डर गए थे कि इस बार टूर्नामेंट से पहले काउंटी खेलना चाहते थे। उन्होंने सरे के साथ करार भी किया था, लेकिन चोटिल होने के कारण वह काउंटी में नहीं खेल पाए। हालांकि चार साल में उन्होंने अपनी तकनीक में इतना सुधार किया है कि अंग्रेज गेंदबाज उन्हें छका नहीं पा रहे हैं।

कमजोरी को पीछे छोड़ा 

चार साल पहले एक खिलाड़ी के तौर पर 25 वर्षीय विराट का इंग्लैंड दौरा पूरी तरह असफल रहा था। उनका 13.40 का औसत पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में एक से छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले खिलाडि़यों में सबसे कम था, जबकि इस सीरीज में वह रन और औसत के मामले में नंबर वन पर हैं।

पिछले दौरे में ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों के सामने उनकी कमजोरी सामने आई थी और वह खुद को साबित कर पाने में असफल रहे। सीरीज में नौ मौकों पर उन्हें तेज गेंदबाजों ने आउट किया था जिसमें से चार बार वह जेम्स एंडरसन का शिकार बने, जबकि दो-दो बार उन्हें स्टुअर्ट ब्रॉड और क्रिस जॉर्डन ने चलता किया। एक बार लियाम प्लंकेट का शिकार बने थे। 

इस बार उन्होंने गेंद को बल्ले तक आने का समय दिया। वह गेंद को जल्दी खेलने की गलती नहीं कर रहे हैं, यही कारण है कि इंग्लिश गेंदबाज उन्हें जल्दी आउट नहीं कर पा रहे हैं। इस बार वह स्पिनर आदिल राशिद का जरूर दो बार शिकार बने हैं। वह इस बार वह इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में 75, 45 और 71 का स्कोर बना चुके हैं।

तीन टी-20 मैचों में उन्होंने नाबाद 20, 47 और 43 रन की पारी खेली थी। विराट पहले ऑफ स्टंप से बाहर जाती गेंदों पर चूक जाते थे, लेकिन अब वह लंबा पैर निकालकर खेलना सीख गए हैं। वह अब आसानी से गेंद तक पहुंच जाते हैं। इसका लाभ उन्हें मिल रहा है। यह बड़े खिलाड़ी की निशानी है। उन्होंने अपने फुटवर्क में गजब का सुधार किया है। 

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Posted By: Lakshya Sharma