नई दिल्ली, लक्ष्य शर्मा। भारत को इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट में भी 60 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार से ना केवल उसने मैच गंवाया बल्कि सीरीज भी गंवा दी। आप याद कीजिए जब इस दौरे की शुरुआत हो रही थी तो हर जगह बात हो रही थी कि ये टीम टी-20, वनडे और टेस्ट तीनों सीरीज जीत सकती है। कप्तान कोहली और कोच रवि शास्त्री भी बड़ी बड़ी बातें कर के गए थे लेकिन हुआ क्या। पहले टीम वनडे सीरीज हारी और फिर टेस्ट सीरीज।

टीम इंडिया दुनिया की नंबर वन टेस्ट टीम है। लेकिन आप खुद सोचिए क्या वह इसकी हकदार है। पहले साउथ अफ्रीका और अब इंग्लैंड में हार। अब अगर आपको घऱ में जीत कर नंबर वन बनना है तो आप असल में नंबर वन नहीं है। अपने घर में तो बांग्लादेश भी ऑस्ट्रेलिया को हरा देती है, ये कोई बड़ी बात नहीं है। अगर आप सच में नंबर वन है तो आपको देश के साथ विदेश में भी जीत हासिल करनी होगी।

हम टेस्ट सीरीज की बात करते हैं। आखिर फैंस को समझ नहीं आ रहा कि ये हुआ कैसे। पहले टेस्ट में हम 200 से कम का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए तो लॉर्ड्स में हमने सरेंडर ही कर दिया। तीसरा टेस्ट जीते जरूर लेकिन इसे भी अब उलटफेर ही कहना होगा। भारतीय बल्लेबाजी जो कभी सबसे मजबूत कही जाती थी, वह अब पुराने जमाने की बात हो गई है। अगर इस टीम में विराट कोहली को छोड़ दे तो किसी से ये उम्मीद नहीं की जा सकती की वह अपने दम पर मैच जीता देगा। 

विराट कोहली को भी बल्लेबाजी में ही श्रेय देना चाहिए क्योंकि कप्तानी में तो उनका भी बुरा हाल है। अपने खास खिलाड़ियों को खिलाने की जिद्द ने उन्हें सीरीज गंवाने पर मजबूर कर दिया। किसी को समझ नहीं आया कि क्यों मुरली विजय जैसे बल्लेबाज को आखिरी दो टेस्ट से बाहर ही कर दिया गया। वह भी किस खिलाड़ी के लिए, लोकेश राहुल।

विराट की स्टाइल और दाढ़ी में कॉपी करने वाले राहुल अगर बल्लेबाजी में भी उनकी तरह प्रदर्शन करते तो शायद टीम इंडिया का भला हो जाता। इस खिलाड़ी को मौके मिले बार बार मिले, लेकिन इस खिलाड़ी की भी जिद थी कि रन नहीं बनाएगा। इस सीरीज में वह औसत रहा केवल 14 का। अब इस औसत से टीम का ओपनर रन बनाए तो हाल बेहाल ही होगा। जिस टेस्ट में दो स्पिनर उतरने थे वहां एक उतार दिया और ओवरकास्ट कंडीशन में विराट कोहली ने दो स्पिनर खिलाकर सभी को कप्तान से हैरान करने की कोशिश की लेकिन बाद भी खुद ही हैरान रह गए।

अब बात टीम के नए कपिल देव की। इस खिलाड़ी ने तीसरे टेस्ट के बाद कहा था कि मुझे कपिल देव नहीं बनना, मैं हार्दिक बन कर ही खुश हूं। लेकिन सही बात तो ये है कि हार्दिक साहब आप कपिल देव बन भी नहीं सकते, हां आप टीम पर बोझ अच्छे तरीके से बन रहे है। तीसरे टेस्ट को छोड़ किस खिलाड़ी ने इतना घटिया प्रदर्शन किया, जैसे वह इंग्लैंड को नहीं भारत को हराने के इरादे से आए हैं।

चौथे टेस्ट में ही देख लीजिए, कम स्कोर के मैच में इस खिलाडी ने 5 से ज्यादा की इकॉनोमी से रन दिए और विकेट के मामले में उनका हाथ रहा बिल्कुल खाली। अब फैंस तो समझ गए कि ये खिलाड़ी भारत को कितने मैच जिता सकता है, अब कोहली और टीम मैनेजमेंट में जितनी जल्दी जान ले अच्छा ही है। 

चौथे टेस्ट में भले ही रहाणे और पुजारा अच्छा खेले लेकिन सीरीज हार में इन दोनों का भी बड़ा रोल है, इन दोनों के लिए कहा जाता है कि इनकी तकनीक मजबूत है, अब मैदान पर तो फैंस को ऐसा दिखा नहीं, हां शायद सपाट पिच या नेट्स पर जरूर इनकी तकनीक काम आती होगी। रिषभ पंत, इनके क्या कहने। बड़ी उम्मीद से इनको टीम में शामिल किया गया था लेकिन प्रदर्शन से तो लगता है कि जितनी जल्दी आए हैं, उतनी ही जल्दी बाहर भी जाएंगे।

भारत की पिछली 5 सीरीज ( एशिया के बाहर)

भारत का साउथ अफ्रीका दौरा ( साल 2017-18) भारत टेस्ट सीरीज 2-1 से हारा

भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा साल (2014-15) भारत 2-0 से हारा टेस्ट सीरीज

भारत का इंग्लैंड दौरा (साल 2013-14)       भारत 3-1 से टेस्ट सीरीज हारा

भारत का साउथ अफ्रीका दौरा ( साल 2013) भारत 1-0 से हारा टेस्ट सीरीज

भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा ( साल 2011-12) भारत 4-0 से टेस्ट सीरीज हारा

इनमें वेस्टइंडीज की कमजोर टीम के दौरे को शामिल नहीं किया गया है, वैसे भारत वहां जीतने में सफल रहा था

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Posted By: Lakshya Sharma