जयपुर। महलों के नगर में जिस शाही अंदाज में टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने भारतीय वनडे इतिहास की सबसे बड़ी जीत दिलाई वो अब अरसे तक याद रहेगी। वैसे इस मैच में वो चीज मौजूद थी जो स्टेडियम में दर्शक देखने आते हैं.. रनों की भरमार। दोनों ही टीमों के बल्लेबाजों ने इस क्षेत्र में कोई चूक नहीं की, वो भी शानदार खेले और भारतीय भी, लेकिन फिर भी आखिर कंगारू टीम इतने बड़े स्कोर के बावजूद क्यों हार गई? आइए आपको रूबरू कराते हैं पांच उन दिलचस्प पलों से जो कहीं ना कहीं कंगारू टीम की हार का सबसे बड़ा कारण बने..

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1. रैना की शानदार फील्डिंग, गजब का रन आउट:

सुरेश रैना उन भारतीय फील्डरों में हैं जिनके पास गेंद जाते ही हर बल्लेबाज सतर्क हो जाता है। फुर्ती और चुस्ती की मिसाल माने जाने वाले इस गजब के फील्डर ने उस समय मैच में पहली बार जान फूंकी जब भारत दौरे पर आने के बाद लगातार तीन अर्धशतक जड़ चुके एरोन फिंच को एक बेहतरीन रन आउट के जरिए पवेलियन भेजा। फिंच ने मिड ऑफ की दिशा में गेंद को धक्का दिया और जमकर दौड़ लगा दी लेकिन रैना की फुर्ती और निशाने के आगे उनकी एक ना चली। बिना किसी चूक और देरी के रैना ने गेंद सीधे विकेटों पर मारी और फिंच को एक बड़ी पारी से महरूम कर दिया।

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2. उफ..भाग बैली भाग:

कंगारू पारी के दौरान जब कप्तान जॉर्ज बैली और ग्लेन मैक्सवेल पूरे जोश में बल्लेबाजी करते हुए 8.3 ओवर के अंदर 96 रनों की धुआंधार साझेदारी कर चुके थे, तभी उनसे एक ऐसी चूक हुई, जिसने ना सिर्फ वह साझेदारी तोड़ी बल्कि रनों की रफ्तार को भी कुछ समय के लिए धीमा कर दिया, वरना स्कोर शायद और भी बड़ा हो सकता था। दरअसल, बैली ने मिड ऑफ की तरफ एक शॉट खेला और उस पर तेजी से रन के लिए दौड़ लगा दी, मैक्सवेल जब कीपर के छोर पर पहुंचे तो उन्हें लगा कि इस बार दो रन मिल सकते हैं, वो चिल्लाए भी लेकिन बैली ने देखकर भी नजरअंदाज सा कर दिया लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और मैक्सवेल इतनी रफ्तार से भागे कि वह भी गेंदबाजी छोर की तरफ पहुंच गए थे। माही के पास गेंद आइ और उन्होंने आराम से गिल्लियां बिखेर दीं।

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3. यह धवन का साल है जनाब, कैच छोड़ना महंगा पड़ेगा ही:

किसी टीम के सबसे जानदार फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज का कैच छोड़ना क्रिकेट में खुदकुशी से कम नहीं माना जाता। ऐसा ही कुछ किया कंगारुओं ने जब 2013 में तकरीबन हर सीरीज में धूम मचाने वाले शिखर धवन का कैच छोड़ दिया गया। धवन ने उस समय महज 18 रन ही बनाए थे और क्लिंट मैके की गेंद पर उनके बल्ले के ऊपरी किनारे से लगकर गेंद सीधे स्कवायर लेग की तरफ हवा में अटक गई, कीपर हैडिन गेंद तक पहुंच गए, अपने ग्लवस भी गेंद के नीचे ले आए लेकिन गेंद को संभालने में नाकाम रहे और फुदक कर गेंद बाहर आ गई। इसके बाद धवन ने जो कहर मचाया वो सबकी नजरों के सामने था, हैडिन की एक गलती का खामियाजा ऑस्ट्रेलिया ने भुगता और धवन ने 86 गेंदों पर 95 रन ठोंक डाले व पहले विकेट के लिए रोहित के साथ 176 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी खड़ी कर डाली।

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4. कोहली को विराट रूप लेने की छूट दी:

कंगारुओं ने धवन के आउट होने के बाद ऐसे राहत की सांस ली जैसे उन्होंने जहान जीत लिया हो, वो भूल गए थे कि इस टीम का दूसरा इन फॉर्म बल्लेबाज व इस भारतीय एकादश में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाला धुरंधर अभी बाकी था। कंगारुओं का पूरा ध्यान रोहित शर्मा पर लगा रहा और दूसरी तरफ देखते-देखते कोहली ने महज 27 गेंदों में 3 चौकों और 4 छक्कों की मदद से धुआंधार अर्धशतक ठोंक डाला। उस लम्हे ने कंगारुओं को हिलाकर रख दिया क्योंकि वे इस बल्लेबाज के हुनर से वाकिफ जरूर थे, बस लापरवाही कर बैठे और फिर कोहली ने महज 52 गेंदों में ही शतक ठोंक डाला जो कि किसी भी भारतीय की तरफ से सबसे तेज शतक रहा।

5. ऐसी ढील दी कि रोहित भी हुए हिट:

कंगारू इस पूरे मुकाबले में तीन बल्लेबाजों (धवन, कोहली और विराट) के बीच कुछ ऐसा उलझे कि असमंजस में वो किसी को भी रोकने में नाकाम रहे। आलम ये रहा कि वो इस बार इतनी ढील कर गए कि टीम के सबसे आउट ऑफ फॉर्म बल्लेबाज रोहित शर्मा ने भी 38वें ओवर में जानदार शतक जड़कर बल्ला हवा में लहराते हुए जमकर जश्न मनाया। दरअसल, वो जश्न कम और कंगारुओं को जीभ चिढ़ाना ज्यादा था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ये जान चुकी थी कि अगर रोहित तक फॉर्म में आ गए हैं तो इसका मतलब अब उनका जीतना आज मुमकिन नहीं होगा, और हुआ भी ठीक वैसा ही, रोहित ने 123 गेंदों पर 141 रनों की धुआंधार पारी खेली।

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