नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम और छोटा शकील को आज आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में आरोपी घोषित कर दिया है। इन दोनों का नाम काफी पहले से इस मामले में सामने आ रहा था।

गौरतलब है कि इससे पहले पुलिस ने अपने आरोप-पत्र में दावा किया था कि भारत में आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के पीछे 'फिक्सिंग तथा सट्टा बाजार' पर नियंत्रण रखने वाले दाऊद इब्राहिम तथा छोटा शकील का नाम शामिल है। एक कोर्ट ने आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में फरार अंडरव‌र्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम तथा उसके सहयोगी छोटा शकील की संपत्ति जब्ती का भी आदेश दिया था। हालांकि इस बारे में कोर्ट के पहले के आदेश पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कोर्ट को सूचित किया कि 1993 में मुंबई सीरियल बम धमाकों के मामले में दाऊद और शकील के खिलाफ ऐसी ही कार्रवाई की जा चुकी है। लेकिन पुलिस के जवाब से असंतुष्ट कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा ८२ (फरार घोषित करना) और ८३ (फरार व्यक्ति की संपत्ति जब्त करना) के तहत नए सिरे से दोनों की संपत्ति जब्त करने की कार्यवाही शुरू करने का नया आदेश दिया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भरत पाराशर ने कहा था, 'संपत्ति जब्त करने की कार्यवाही के बारे में स्पेशल सेल के एसीपी द्वारा पेश रिपोर्ट में कहीं भी हेड कांस्टेबल (जिसने कार्यवाही की) का बयान नहीं है। जो दस्तावेज पेश किए गए हैं, वे मराठी में हैं और उसका अनुवाद नहीं है। हिंदी में भी दस्तावेज उपयुक्त नहीं हैं। दस्तावेज अदालती भाषा में पेश किए जाने चाहिए।' कोर्ट ने सुनवाई के बार-बार स्थगन पर चिंता जताते हुए पुलिस को निर्देश दिया था कि वह आरोप-पत्र तथा उसके साथ पेश अन्य दस्तावेजों की प्रतियां सभी आरोपियों को उपलब्ध कराए।

उसके पहले स्पेशल सेल ने कोर्ट को बताया कि फरार अभियुक्तों के खिलाफ जारी गैरजमानती वारंट को तामील नहीं किया जा सका क्योंकि वे भारत में अंतिम रूप से ज्ञात पते पर लंबे समय से नहीं रह रहे हैं। दाऊद और शकील के अलावा पाकिस्तान के जावेद चुटानी, सलमान उर्फ मास्टर तथा इहतेशाम के खिलाफ भी गैरजमानती वारंट जारी किए गए थे। ये तीनों भी दाऊद के सहयोगी माने जाते हैं। स्पेशल सेल ने आरोपियों के खिलाफ छह हजार पेज का आरोप-पत्र दायर किया हुआ है। कोर्ट ने इस मामले में पिछले साल 10 जून को क्रिकेटर एस. श्रीसंत, अंकित चव्हाण तथा अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में जमानत दे दी थी। इन पर कड़े प्रावधान वाले मकोका कानून के तहत आरोप लगाए गए थे।

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Posted By: Jagran News Network

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