अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान, टीम प्रबंधन और चयनकर्ता कुछ क्रिकेटरों को खिलाने के चक्कर में टीम इंडिया की दुर्दशा करने में जुटे हैं। यही कारण है कि दक्षिण अफ्रीका ही नहीं बांग्लादेश और जिंबाब्वे जैसी टीमों के सामने भी भारतीय टीम बौनी नजर आती है। बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज और शुरुआती चार वनडे में इसका मुजाहिरा हुआ, लेकिन मुंबई में हुए सीरीज के आखिरी मैच ने तो भारतीय क्रिकेट की पोल ही खोलकर रख दी।

मोहित शर्मा को तेज गेंदबाज, अक्षर पटेल को स्पिन ऑलराउंडर और स्टुअर्ट बिन्नी को मीडियम पेसर ऑलराउंडर के तौर पर टीम में स्थापित करने के चक्कर में न जाने कितने अच्छे क्रिकेटरों की बलि तो दी ही जा रही है, साथ ही टीम इंडिया का भी कबाड़ा किया जा रहा है। इसके लिए कप्तान महेंद्र सिंह धौनी और चयनकर्ता ही नहीं बीसीसीआइ भी जिम्मेदार है।

- अक्षर पटेल:

कई प्रेस कांफ्रेंस में धौनी इस गेंदबाज को ऑलराउंडर के तौर पर पेश करते नजर आए, लेकिन अगर इनके रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उन्होंने अब तक खेले 22 वनडे की 15 पारियों में 10.11 की औसत से सिर्फ 91 रन बनाए हैं। उनको सात नंबर जैसे महत्वपूर्ण क्रम पर उतारा जा रहा है और यही टीम इंडिया की हार का सबसे बड़ा कारण है। इस पोजीशन पर तेजी से रन बनाने की जरूरत होती है। अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (39 रन पर तीन विकेट) भी उन्होंने इस सीरीज में किया। वह मुख्य स्पिनर होने के बावजूद 22 वनडे में सिर्फ 28 विकेट ले पाए हैं। पहले रवींद्र जडेजा और अब अक्षर को किसी न किसी बहाने अंतिम एकादश में शामिल करने का जुगाड़ लगाया जाता है। खास बात यह है कि इनकी गेंद स्पिन नहीं करती, वहीं प्रज्ञान ओझा और कुलदीप यादव जैसे वास्तविक स्पिनर टीम में अपनी जगह बनाने के लिए तरस रहे हैं। अमित मिश्रा को भी बड़े जतन के बाद मौका मिला।

- मोहित शर्मा:

निलंबित आइपीएल फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपर किंग्स में धौनी के साथी रहे मोहित को भी टीम का मुख्य मध्यम तेज गेंदबाज बनाने के चक्कर में दो साल से मेहनत की जा रही है। इसको लेकर उमेश यादव और वरुण एरोन जैसे तेज गेंदबाजों को किसी न किसी बहाने बाहर किया जाता रहा। यह पहली टीम होगी जो अपने मुख्य स्ट्राइकर और सबसे तेज गेंदबाज को हटाकर भारत की धीमी पिच पर मोहित जैसे मध्यम गति के गेंदबाज के साथ खेलना पसंद करती है। इस सीरीज में ही दक्षिण अफ्रीका ने डेल स्टेन, मोर्नी मोर्केल, रबादा और काइल एबॉट जैसे तेज गेंदबाजों पर भरोसा किया तो धौनी एक मैच में पिटने के बाद ही उमेश यादव को किनारे लगाकर खुश नजर आए। क्योंकि ऐसा करते ही मोहित का हर मैच में खेलना तय हो गया। लेकिन मुख्य तेज गेंदबाज की तरह खेल रहे मोहित थके हुए गेंदबाज की तरह खेले और दो टी-20 व चार वनडे में सिर्फ पांच विकेट ले सके। पूरी सीरीज में लगा ही नहीं कि वह स्ट्राइक गेंदबाज हैं।

- स्टुअर्ट बिन्नी:

चयनकर्ता रोजर बिन्नी के 31 वर्षीय पुत्र स्टुअर्ट को भी बड़े तोप ऑलराउंडर के तौर पर पेश कर करके टीम इंडिया में जगह दी जा रही है। गाहे-बगाहे वह अंतिम एकादश में भी जगह बनाने में कामयाब हो जाते हैं। रिकॉर्ड भी इनकी पोल खोलते हैं। ऑलराउंडर का जुमला फेंककर कई सीरीज में टीम इंडिया में जगह बना चुके दायें हाथ के इस बल्लेबाज को पांच टेस्ट, 14 वनडे और दो टी-20 मैच खेलने का मौका मिल चुका है। 10 टेस्ट पारियों में वह 21.55 के औसत से सिर्फ 194 रन बना सके और तीन विकेट ले पाए हैं। वनडे में 28.75 के औसत से 230 रन के बनाने के साथ 20 विकेट लेने में सफल हुए। दो टी-20 में वह 35 रन बनाने के साथ सिर्फ एक विकेट ले सके।

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Posted By: Shivam

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