नई दिल्ली, पीटीआइ। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। बीसीसीआइ की 22 जून को होने वाली आमसभा (एसजीएम) की विशेष बैठक रोकने के प्रशासकों की समिति के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया। यह नहीं, बोर्ड के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने विनोद राय और डायना एडुल्जी पर गंभीर आरोप भी लगाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि वे बिना पारदर्शिता के और किसी अधिकार के लिए गए फैसलों पर बातचीत से बचना चाह रहे हैं। चौधरी ने राय को लिखे ईमेल में कहा कि 22 जून को होने वाली एसजीएम रोकने का साफ तौर पर यही मकसद है कि आमसभा समिति द्वारा बिना किसी अधिकार के और पदाधिकारियों को अंधेरे में रखकर लिए गए फैसलों पर बात नहीं कर सके। उन्होंने विभिन्न नियुक्तियों में सीओए द्वारा लिए गए फैसलों पर भी सवाल उठाए।

बीसीसीआइ में पदाधिकारियों और सीओए के बीच चल रही रस्साकशी ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब विनोद राय की अगुआई वाली समिति ने मान्यता प्राप्त इकाइयों की विशेष आम बैठक को रोकने का निर्देश जारी किया। बीसीसीआइ के पुराने अधिकारी और मौजूदा अधिकारी हालांकि अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। यहां तक कि कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी ने भी राज्य इकाइयों को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि बैठक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगी।

सीओए ने बीसीसीआइ कर्मचारियों से कहा कि वे एसजीएम से जुड़े राज्य इकाइयों के किसी भी बिल का भुगतान नहीं करें। सीओए बैठक को गैरकानूनी मानता है, क्योंकि 15 मार्च के दिशानिर्देशों के अनुसार इसके लिए कोई स्वीकृति नहीं मांगी गई। इन दिशानिर्देशों के अनुसार एसजीएम के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति की पूर्व स्वीकृति की जरूरत होती है।

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Posted By: Pradeep Sehgal

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