नई दिल्ली, अभिषेक त्रिपाठी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) सुधरने की जगह बिगड़ता ही जा रहा है। हर क्षेत्र में इसका असर दिखाई दे रहा है। विजय हजारे ट्रॉफी के लिए टीम चयन में धांधलियों और मेघालय क्रिकेट संघ की टी-20 लीग में फिक्सिंग के आरोपी की एंट्री के बाद अब बिना विज्ञापन के 130 भर्तियों पर सवाल उठने लगे हैं। इससे क्रिकेट ऑपरेशन जीएम सबा करीम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (कैब) के सचिव आदित्य वर्मा ने प्रशासकों की समिति (सीओए) के अध्यक्ष विनोद राय को लिखे ईमेल में कहा है कि बीसीसीआइ ने 130 कोच और सहायकों की नियुक्ति मनमानी तरीके से की है। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि आप सीओए के प्रमुख हैं और हर कोई आपको सुनता है।

आपके ऊपर एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जस्टिस लोढ़ा समिति की सभी सिफारिशों को बीसीसीआइ में लागू कराना है। मुझे उम्मीद है कि आप इसे करेंगे। हालांकि आपका ध्यान इस समय छवि चमकाने और अपने प्रिय लोगों का समर्थन करने में है। हाल ही में अपारदर्शी और मनमानी तरीके से बीसीसीआइ ने 130 कोच और सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति की है।

 इसके लिए किसी भी अखबार और वेबसाइट पर विज्ञापन नहीं दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि बीसीसीआइ वेबसाइट पर अन्य नियुक्तियों के बारे में तो पता चलता है लेकिन इन 130 नियुक्तियों के बारे में वहां भी कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसके अलावा मैंने इन नियुक्तियों के बारे में न तो कहीं देखा और न ही कहीं सुना। इन नौकरियों के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए इसके बारे में भी कहीं कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। 

130 लोगों की नियुक्ति कर दी गई लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ कि बीसीसीआइ ने इन्हें फाइनल कर दिया या नहीं। उन्होंने लिखा, 'यह स्पष्ट है कि इनके लिए खर्च करोड़ में हो सकते हैं और आपकी अध्यक्षता में आपको धोखा देकर यह सब किया जा रहा है। 

मुझे लगता है कि इसके पीछे कोई घपला हो सकता है। आप अनुभवी हैं और आपके लिए इसकी जांच पड़ताल करना मुश्किल नहीं होगा।' उन्होंने कहा कि यह बड़ा घोटाला ही नहीं है बल्कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन भी है।

बीसीसीआइ से संबंधित एक राज्य क्रिकेट संघ के पदाधिकारी ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि हमने जिन लोगों को रखने का आवेदन नहीं दिया उन्हें भी हमारे पास सहायक स्टाफ के तौर पर भेज दिया गया है। बीसीसीआइ के एक पदाधिकारी ने कहा कि यह क्रिकेट ऑपरेशन जीएम सबा करीम के कार्यक्षेत्र का मामला है और निश्चित तौर पर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी है।

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Posted By: Lakshya Sharma