रोहित को कप्तानी से हटाया और... अजीत अगरकर के 2 सबसे विवादस्पद फैसले, जिसने भारतीय क्रिकेट को किया शर्मसार
वनडे वर्ल्ड कप के 2027 एडिशन में रोहित के हिस्सा लेने को लेकर पहले से ही काफी बातें हो रही थीं और अगरकर एंड कंपनी ने अटकलों को और हवा दी। जिस कप्तान ने भारत को 2023 ODI वर्ल्ड कप फाइनल, 2024 T20 वर्ल्ड कप खिताब और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जिताया, उसे ODI कप्तान के पद से यह कहकर हटा दिया गया कि अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग-अलग कप्तानों से कन्फ्यूजन पैदा होता।

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। रोहित शर्मा को ODI कप्तान के पद से हटाना वो भी भारत को चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब दिलाने के कुछ महीने बाद। हार्दिक पांड्या को 2024 T20 वर्ल्ड कप में उप-कप्तान बनने के कुछ हफ्ते बाद व्हाइट-बॉल टीम की लीडरशिप से हटाना। मेंस सीनियर सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन अजीत अगरकर के सबसे खास फैसलों में से एक रहे।
वनडे वर्ल्ड कप के 2027 एडिशन में रोहित के हिस्सा लेने को लेकर पहले से ही काफी बातें हो रही थीं और अगरकर एंड कंपनी ने अटकलों को और हवा दी। जिस कप्तान ने भारत को 2023 ODI वर्ल्ड कप फाइनल, 2024 T20 वर्ल्ड कप खिताब और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जिताया, उसे ODI कप्तान के पद से यह कहकर हटा दिया गया कि अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग-अलग कप्तानों से कन्फ्यूजन पैदा होता।
क्रिकेटिंग लॉजिक से सही साबित करने की कोशिश
भले ही वह कप्तान वही हो जिसकी लीडरशिप में भारत तीन ICC टूर्नामेंट में सिर्फ एक गेम हारा था और जिसने 50 ओवर के फॉर्मेट में भारत के खेलने का तरीका बदल दिया था। चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी ने भारत के लिए अपना अगला गेम बिना कप्तानी के खेला। सिलेक्टर्स की नजरें 2027 वर्ल्ड कप पर टिकी थीं और वे बड़े हिंट देने के लिए तैयार थे।
अगरकर ने गिल के मूव के अपने कारण बताए। इसे क्रिकेटिंग लॉजिक से सपोर्ट करने की कोशिश की, लेकिन जब उनसे सीधे तौर पर रोहित के साथ कैप्टेंसी बदलने पर हुई बातचीत के बारे में पूछा गया तो वे कुछ नहीं कह पाए। अहमदाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनका सबसे छोटा जवाब था, 'यह मेरे और रोहित के बीच की बातचीत है। लेकिन, जाहिर है- उन्हें बता दिया गया है।'
रोहित को सच में 'बता दिया गया था' और सिलेक्टर्स कम से कम इतना तो कर ही सकते थे, लेकिन जब इंडिया-वेस्टइंडीज टेस्ट के बीच में घटनाएं हुईं, तो सही बातचीत नहीं हुई। इस बड़े कदम से पहले जिस तरह की बातचीत की जरूरत थी, वैसी नहीं थी। यह कहानी महीनों पहले गढ़ी गई थी। इंग्लैंड में ओवल टेस्ट से ही, लेकिन इसने रोहित को जरूर चौंका दिया, जो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ODI के लिए तैयार होने के लिए एक्स्ट्रा वजन कम करने में बिजी थे।
इसके बाद उन्हें धोखे का एहसास होना स्वाभाविक था। खासकर तब जब रोहित ने बार-बार 2027 में होने वाले मल्टी-नेशन इवेंट की तैयारी का जिक्र किया। 38 साल की उम्र में भी उनके अंदर 50 ओवर का टाइटल जीतने के अपने सबसे बड़े सपने को पूरा करने की नई आग थी। कुछ ऐसा जो वह 2023 में करने के बहुत करीब थे, लेकिन उन्हें भी इतनी जल्दी इतनी बड़ी चीज की उम्मीद नहीं थी।
हार्दिक को भी कर दिया गया साइड लाइन!
कैप्टन्सी में अचानक बदलाव का यह पहला मामला नहीं था। कुछ ऐसा ही तब हुआ जब सूर्यकुमार यादव T20I कप्तान बने और उन्होंने इस रोल के लिए हार्दिक पांड्या को पीछे छोड़ दिया। पांड्या इस फॉर्मेट में रोहित के डिप्टी थे और उन्हें व्हाइट-बॉल लीडरशिप ग्रुप का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ लिमिटेड-ओवर्स सीरीज से पहले सिलेक्टर्स ने SKY की बात मानने का फैसला किया।
उस दौरान भी पता चला है कि अगरकर ने BCCI के एक सीनियर अधिकारी को भरोसा दिलाया था कि वह इस बारे में पांड्या से बात करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जब सिलेक्शन कमिटी अगले कदम का प्लान कर रही थी। तब भारत के सबसे अच्छे ऑलराउंडर को अंधेरे में रखा गया था। फैसला लेने वालों ने 'अवेलेबिलिटी' को रेड-फ्लैग बताया था। एक खिलाड़ी जिसने गुजरात टाइटन्स को उसके पहले सीजन में टाइटल जिताया, अगले साल रनर-अप रहा, 2023 ODI वर्ल्ड कप और 2024 T20 वर्ल्ड कप में रोहित का डिप्टी था। उसे फिटनेस और अवेलेबिलिटी की चिंताओं का हवाला देकर हटा दिया गया।
'वह (हार्दिक) अभी भी हमारे लिए बहुत जरूरी खिलाड़ी है और हम चाहते हैं कि वह वैसा खिलाड़ी बने जैसा वह हो सकता है। क्योंकि इस तरह के स्किल सेट मिलना बहुत मुश्किल है। पिछले कुछ सालों में फिटनेस उसके लिए एक चुनौती रही है और फिर यह एक कोच या हमारे यानी सिलेक्टर्स के लिए थोड़ा और मुश्किल हो जाता है। हम ऐसा कोई चाहते हैं जो ज्यादातर समय उपलब्ध रहे।'
यह सब अजीत अगरकर ने हार्दिक को लेकर कहा था। वहीं, T20I कप्तान बनने के बाद से सूर्यकुमार यादव के बैटिंग स्टॉक्स में गिरावट आई है, लेकिन अगरकर के लिए यह कभी चिंता की बात नहीं रही। वह चाहते थे कि कप्तान 'ज्यादातर समय उपलब्ध रहे' और जब हार्दिक ने श्रीलंका ODI से ब्रेक मांगा तो थिंकटैंक को यह फैसला लेने का एक और कारण मिल गया।
रोहित और हार्दिक के फैसले समय और दबाव की कसौटी पर खरे उतरते हैं या नहीं। यह अगले दो ICC टूर्नामेंट में साफ हो जाएगा। एक तो बस कुछ ही महीने (टी20 वर्ल्ड कप 2026) दूर है।

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