नई दिल्ली, अभिषेक त्रिपाठी। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) स्पॉट फिक्सिंग मामले के मुख्य याचिकाकर्ता और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (कैब) के सचिव आदित्य वर्मा ने फिर से अपने पुराने दुश्मन और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के (बीसीसीआइ) के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

आदित्य वर्मा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) के चेयरमैन शशांक मनोहर को भेजे पत्र में लिखा है कि आइसीसी के वर्तमान संविधान के मुताबिक क्रिकेट की वैश्विक संस्था में भ्रष्ट लोगों की कोई जगह नहीं है। एक आरोपी आइसीसी की किसी बैठक में भाग नहीं ले सकता। इसके बावजूद अमिताभ बीसीसीआइ के प्रतिनिधि के तौर पर लगातार आइसीसी की बैठक में भाग ले रहे हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध आइसीसी के रवैये को देखते हुए अमिताभ का आइसीसी की बैठक में भाग लेना बंद होना चाहिए।

आदित्य ने इसी पत्र में आगे लिखा है कि भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त क्रिकेट प्रशासकों की समिति (सीओए) ने अपनी पांचवीं स्टेटस रिपोर्ट में अमिताभ को लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने में रोड़ा बताया है। सुप्रीम कोर्ट को अभी इस पर फैसला लेना बाकी है। कैब ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना को लेकर बीसीसीआइ के कार्यवाहक सचिव पर केस कर रखा है। झारखंड कोर्ट में उनके ऊपर भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे हैं। पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर उज्जल दास की याचिका पर जमशेदपुर की एक अदालत झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (जेएससीए) के पूर्व अधिकारी अमिताभ के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दे चुकी है। जिस पर पिछले साल 24 जनवरी को एफआइआर दर्ज भी हो चुकी है।

बीसीसीआइ के राज्य संघों के खर्चो का ऑडिट करने वाली डेलॉइट रिपोर्ट में रांची में बने जेएससीए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण कार्य के दौरान अनियमितता की बात सामने आ चुकी है। इसकी टेंडर प्रक्रिया अमिताभ की देखरेख में ही हुई थी। 2004 में बिहार क्रिकेट संघ को जेएससीए में तब्दील करने में भी अमिताभ की भूमिका विवादास्पद है। इन सभी चीजों को देखते हुए आइसीसी बैठकों में उनके बीसीसीआइ प्रतिनिधि के तौर पर भाग लेने पर आपको तत्काल रोक लगानी चाहिए। आदित्य ने यह ईमेल आइसीसी के सदस्य देशों के निदेशकों को भी भेजी है।

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Posted By: Pradeep Sehgal