(रवि शास्त्री का कॉलम)

दिल्ली डेयरडेविल्स की चिंताएं कुछ अलग हैं। अभी तक किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया है। आप उस टीम के साथ ज्यादा देर तक बने नहीं रह सकते हैं जो आखिरी गेंद पर मैच गंवाती है। दिल्ली को थोड़ी और मेहनत करने की जरूरत है। जल्द ही परिणाम उसके पक्ष में आने लगेंगे। दिल्ली की टीम इस सत्र में अन्य टीमों के लिए बहुत परेशानी खड़ी करने वाली है।

इमरान ताहिर के रूप में उनके पास उम्मीद की किरण है। पिछले दो सत्रों में भी इस लेग स्पिनर ने भाग लिया था, लेकिन इस बार वह पूरी तरह से अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुए हैं। हाल ही में समाप्त हुए विश्व कप में भी उनका प्रदर्शन बेजोड़ रहा था। उनकी गेंद खेलना वाकई बल्लेबाजों के लिए आसान नहीं था। अब ऐसा लग रहा है जैसे कि वह चार हाथों से गेंदबाजी कर रहे हैं। अब उनके हाव-भाव में आत्मविश्वास नजर आता है। विकेट लेने के बाद अब वह खुश होते हैं, जोश में अपनी मुट्ठियों को भींचते हैं, दर्शकों से कहते हैं कि उनसे बात करें। नाटकीय हरकतें करता हुआ सफल इंसान और भी खतरनाक नजर आने लगता है।

अमित मिश्रा ने बड़ी सहजता के साथ सहायक गेंदबाज की भूमिका को स्वीकारा है। यह प्रशंसनीय है। इन दो गेंदबाजों के प्रदर्शन पर दिल्ली की तकदीर टिकी है। ये दोनों लेग स्पिनर बल्लेबाजों को सचमुच परेशान कर रहे हैं। एक बल्लेबाज की आंखों में आंखे डालकर गेंद डालता है तो दूसरे की नजर पिच के उस हिस्से पर होती है जहां से वह ज्यादा से ज्यादा टर्न पा सकता है। ऐसे गेंदबाज सर्कल के अंदर एक अतिरिक्त क्षेत्ररक्षक का स्वागत करते हैं।

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दिल्ली की टीम को अभी ही मध्यक्रम पर निर्भर बता देना बहुत जल्दबाजी होगी। पिछले मैच में राजस्थान रॉयल्स की विश्व स्तरीय गेंदबाजी के खिलाफ मयंक अग्रवाल और श्रेयस अय्यर सलामी बल्लेबाज के तौर पर अत्यधिक विश्वसनीय नजर आए। यदि उनका प्रदर्शन कोई तुक्का नहीं था तो फिर आने वाले वक्त में अन्य टीमों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। समय गुजरने के साथ-साथ युवराज फैक्टर भी अपना असर जरूर दिखाना शुरू करेगा।

(टीसीएम)

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Posted By: Shivam