(रवि शास्त्री का कॉलम) 

सनराइजर्स हैदराबाद के बारे में प्रशंसा करने के लिए काफी कुछ है। उसके गेंदबाजों में से कम से कम चार दस या इससे ज्यादा विकेट ले चुके हैं। उसका शीर्ष क्रम हमेशा मैच का रुख बदल देता है। उसके खिलाड़ी हर लड़ाई के लिए तैयार रहते हैं। यह एक ऐसे ड्रेसिंग रूम की ओर इशारा करता है जो कल्पना और खुशमिजाजी के साथ पूरी तरह उपजाऊ है।

कमरे के पीछे का प्रबंधन लंबे सत्र का मूल्यांकन करने में व्यस्त है। यदि मुंबई की टीम छह बदलाव करने के बाद भी जीत सकती है या हैदराबाद विलियमसन और युवराज के बिना भी लोहा ले सकती है, तो इसका मतलब यहां बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जिस पर लोगों की नजर नहीं है।

यह नहीं कहना चाहिए कि कोलकाता नाइटराइडर्स इससे पार नहीं पा सकती। यह सभी पर लागू होता है, लेकिन वे एक रन को दो में बदलने में परेशान हो रहे हैं। उनके बल्लेबाज हाल ही में कुछ नरम पड़े हैं, लेकिन आप कभी भी स्वभाव में बदलाव नहीं कर सकते हैं।

पिछली बार वार्नर ने उनकी धज्जियां उड़ा दी थीं। स्पिनरों के खिलाफ उनके रिवर्स स्वीप और स्विच हिट बेहतरीन थे। गंभीर भी इसे समझ रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि अपने स्पिनरों पर उनका भरोसा कम होगा। वह आक्रामक फील्ड ही देंगे जो वह उन्हे हमेशा देते हैं। शीर्ष टीमें आमतौर पर वहां हमला करती हैं जहां आप सबसे कमजोर होते हैं। यही वजह है कि वे प्रशंसकों को जोश दिलाते हैं और विरोधियों को लाचार बना देते हैं।

बेंगलूर के मैदान पर आमतौर पर ठीक-ठाक स्कोर देखने को मिलता है। यहां टीमों के लिए 160 या इससे ज्यादा के लक्ष्य का पीछा करना मुश्किल होता है। बीच के ओवर आपको मैच में परेशानी में डाल सकते हैं जिससे आप एक पल में बाहर हो सकते हो। यहां पहले बल्लेबाजी करना बुरा विचार नहीं हैं।

इन दोनों दिलचस्प टीमों में से एक का आइपीएल में अभियान आज समाप्त हो जाएगा। उनके लिए कोई दूसरा मौका नहीं है। ऐसे में दोनों अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे और वो सब करेंगे जो वे कर सकते हैं। उम्मीद है कि यह पर्याप्त होना चाहिए।

(टीसीएम)

Posted By: Shivam

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