सुनील गावस्कर का कॉलम

भारतीय गेंदबाजों ने एक बार फिर से लॉ‌र्ड्स में चल रहे दूसरे टेस्ट मैच में भारत को वापसी का मौका दिलाने की जिम्मेदारी उठाई है। जब इंग्लैंड बल्लेबाजी करने आया, तो स्थितियां काफी आसान थी क्योंकि सूरज निकल आया था। इससे भारतीय गेंदबाजों के लिए हवा में स्विंग की संभावना भी कम हो गई थी। इसके बावजूद उन्होंने गेंद को आगे रखते हुए पिच से स्विंग कराया। हालांकि उन्हें वैसी मदद नहीं मिल रही थी, जैसी इंग्लिश गेंदबाजों को मिल रही थी। टीवी पर भले ही ज्यादा स्विंग देखने में अच्छी लगती हो, लेकिन आमतौर पर बल्लेबाज इन्हें छोड़ देते हैं और विकेट लेने की संभावना कम रहती है। कुक ने इशांत की खूबसूरत गेंद पर अपना विकेट गंवाया जबकि शमी ने भी एक शानदार गेंद पर कप्तान रूट को वापस भेज दिया। पांड्या ने भी अपनी सीमाओं को समझा और बाउंसर की कोशिश किए बिना अच्छी गेंदबाजी की। वह बिल्कुल बदले हुए गेंदबाज दिख रहे हैं। यह सही है कि पिच से काफी मदद मिली है, लेकिन पांड्या ने भी गेंद को उपर रखते हुए बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें पैदा की।

पहले टेस्ट मैच में हारने के बावजूद भारत ने अपनी बल्लेबाजी को मजबूत नहीं किया। कोहली को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज पहले मैच में मजबूत नहीं दिखा। हालांकि बलि का बकरा सिर्फ शिखर धवन ही बने। उन्होंने कुलदीप यादव को भी इस उम्मीद से शामिल किया कि वह स्पिन का वही जाल बुन सकेंगे, जिसके दम पर उन्होंने सीमित ओवरों के क्रिकेट में इंग्लिश बल्लेबाजों को धराशायी किया था। भारत को जीत दिलाने के लिए कुलदीप को दूसरी पारी में ऐसा करना होगा। हालांकि इससे पहले भारतीय बल्लेबाजों को अपने खेल का स्तर उठाना होगा और प्रतिबद्धता के साथ मजबूत तकनीक भी दिखानी होगी। लाल गेंद से कम अभ्यास और इंग्लिश परिस्थितियों में तैयारी की कमी पहली तीन पारियों में साफ देखने को मिली है।

जेम्स एंडरसन की जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है। उन्होंने इंग्लिश परिस्थितियों का अच्छे से इस्तेमाल किया और अपनी देर से होने वाली आउट स्विंग से दायें हाथ के बल्लेबाजों को वापस भेजा। उनकी यह आउट स्विंग एक तेज लेग स्पिन जैसी दिखती है। क्रिस वोक्स ने भी उनका भरपूर साथ दिया और गेंद को तेजी से स्विंग कराया जबकि सैम करन ने गेंद को भीतर की तरफ स्विंग कराया। यह अग्निपरीक्षा नहीं बल्कि हिम परीक्षा थी क्योंकि काले बादलों की वजह से भारतीय बल्लेबाजों को ठंड लग रही थी और उनके पांव नहीं चल पा रहे थे। मैं पहले भी कह चुका हूं कि किसी भी टीम के लिए यह आसान नहीं होगा क्योंकि इंग्लैंड का नई गेंद से अटैक शीर्ष स्तरीय है। स्टोक्स की कमी बिल्कुल भी नहीं खली क्योंकि वोक्स ने शानदार गेंदबाजी की। भारत के लिए चीजें आसान कतई नहीं हैं लेकिन पहले टेस्ट में हम देख चुके हैं कि अगर इंग्लैंड को 200 रन के आसपास का लक्ष्य दिया जाए, तो चौथी पारी में मैच का पासा पलट सकता है।

Posted By: Sanjay Savern