वीवीएस लक्ष्मण का कॉलम :

मेरे पास शब्द नहीं है कि मुझे विराट और उनकी टीम पर ऑस्ट्रेलिया में इतिहास रचने पर कितना गर्व है। ऑस्ट्रेलिया में विजयी टीम का हिस्सा रहना मेरा सपना था। मैं खुश हूं कि मैंने इस टीम की बदौलत अपने इस सपने को जिया। इस टीम ने मेरा सपना पूरा कर दिया।

खास तौर पर पर्थ में बड़ी हार के बाद टीम के खिलाडि़यों ने शानदार चरित्र और लचीलापन दिखाया। जिस तरह से सीरीज में मिली बढ़त को गंवाने के बाद भारतीय टीम ने शानदार तरीके से वापसी की, वह उसकी मानसिक मजबूती को दर्शाता है। भारतीय खिलाडि़यों ने प्रशंसनीय कार्य किया। 3-1 से सीरीज का खत्म होना शानदार होता, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि वे खुशी से 2-1 का परिणाम स्वीकार करेंगे। चेतेश्वर पुजारा को उनकी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में देखकर अच्छा लगा। उन्होंने जिम्मेदारी ली और संयम के साथ बल्लेबाजी की और अकेली सोच हमेशा उनके साथ जुड़ी रही।

पुजारा में अच्छी चीजों को जोड़ने की क्षमता है और जिस तरह से उन्होंने विरोधी टीम के गेंदबाजों को थकाया है यह युवाओं के लिए एक सीख है। उनके रनों का विस्तार, साथ ही साथ जितना समय उन्होंने क्रीज पर बिताया, उसने दोनों टीम के बीच अंतर पैदा किया।

विराट और अजिंक्य रहाणे दोनों ने अहम समय पर रन बनाए, लेकिन मेरे लिए यह मायने रखता है कि कैसे तीन युवा बल्लेबाजों ने रन बनाए। मयंक अग्रवाल के लिए तुरंत बॉक्सिंग-डे टेस्ट में उतरकर अपनी क्षमता दिखाना आसान नहीं था। वह बिना डर के अपना प्राकृतिक खेल खेले। हनुमा विहारी जरूर रन नहीं बना सके, लेकिन वह कुछ भी करने में माहिर रहे, चाहे बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी। रिषभ पंत ने दिखाया कि वह कितना जल्दी सीखते हैं। उनके व्यक्तित्व में पहले टेस्ट और आखिरी टेस्ट में बड़ा बदलाव दिखा। यह भारतीय क्रिकेट के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

कोई भी तारीफ जसप्रीत बुमराह और अन्य तेज गेंदबाजों के लिए बड़ी नहीं हो सकी है। उनकी आक्रामकता निरंतर और अथक थी और इसका श्रेय उनकी फिटनेस और कौशल को जाता है। वह आखिरी मैच में भी उतना ही खतरनाक दिखे, जितना पहले टेस्ट मैच में दिखे थे। अश्विन ने पहले टेस्ट में अहम योगदान दिया। रवींद्र जडेजा ने भी अपने दो टेस्ट में शानदार प्रदर्शन किया। वहीं कुलदीप यादव आखिरी टेस्ट में शानदार थे। यह सभी भारतीय टीम की गहराई को दिखाती है, जो उनकी बल्लेबाजी और गेंदबाजी में है। भारतीय क्रिकेट टीम ने इस जीत से एक नए आयाम को छुआ है।

यह आगे भी करेगा, मैं निश्चित हूं। युवा खिलाड़ी इसे देखकर प्रेरणा लेंगे कि विदेश में कैसे खेला जाता है। साथ ही विराट की क्लास का भी अनुकरण करेंगे। हो भी क्यों ना, आप इसीलिए ही तो क्रिकेट खेलते हो।

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Posted By: Sanjay Savern