(गावस्कर का कॉलम)

मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपरकिंग्स के फाइनल में पहुंचने के साथ आइपीएल अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। यह टूर्नामेंट काफी शानदार रहा, लीग चरण के आखिरी मैच तक प्लेऑफ में जगह बनाने के लिए टीमें संघर्ष करती नजर आईं।

जब लीग मुकाबला एक नॉकआउट गेम बन जाए, तो सही मायने में तनाव और दबाव बढऩा शुरू हो जाता है। यहीं पर असली खिलाड़ी की पहचान होती है। आप कितना अच्छा खेले हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, उस मैच में आप कैसा खेले हो, यही मायने रखता है। अगर यहां विफल हुए, तो पिछली सारी मेहनत बेकार हो जाती है। सनराइजर्स हैदराबाद ने खराब शुरुआत के बाद अच्छा संघर्ष किया और टूर्नामेंट के बीच में तो वे काफी अच्छी स्थिति में दिख रहे थे। लेकिन आखिरी मैच में जब उन्हें हर हाल में जीतना था, वे घबरा गए और नॉकआउट में पहुंचने का मौका गंवा बैठे। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु भी दमदार तरीके से क्वालीफायर में पहुंची, लेकिन यहां उनके बल्लेबाज चल नहीं पाए और उन्होंने पहली बार फाइनल में पहुंचने का मौंका गंवा दिया। इससे यह साफ हो गया कि जो टीम और खिलाड़ी जल्दी से जल्दी अपनी गलतियों से नहीं सीखेगा, वह बहुत पीछे रह जाएगा।

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Posted By: sanjay savern

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