सेंचुरियन, पीटीआइ। दक्षिण अफ्रीकी टीम के पूर्व कोच रे जेनिंग्स ने भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पिचों से छेड़छाड़ करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। मालूम हो कि भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज के पहले टेस्ट में मेजबान टीम ने बिलकुल हरी पिच रखी थी जबकि सेंचुरियन में हुए दूसरे टेस्ट में पिच पूरी तरह भारतीय थी। जोहानिसबर्ग में हुए तीसरे टेस्ट की पिच को आइसीसी ने खराब करार दिया था। यह सब पूर्व कोच के आरोपों को दमदार साबित करते हैं।

पिच से छेड़छाड़ का भुगता खामियाज़ा

जेनिंग्स ने कहा कि पिच के साथ छेड़छाड़ की गई जिसका दक्षिण अफ्रीका को खामियाजा भुगतना पड़ा। वे टेस्ट सीरीज हारते-हारते बचे। अब भारत के पास अच्छा तेज गेंदबाजी आक्रमण है। 10 साल पहले भारत के पास अच्छे तेज गेंदबाज नहीं होते थे लेकिन अब अंडर-19 से लेकर सीनियर टीम तक उनके पास ऐसे गेंदबाज हैं। ऐसे में मेजबानों का यह दांव उल्टा पड़ सकता था।

आपको बता दें कि कापटाउन में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भारत को भले ही 72 रन से हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों ने अपनी दमदार लाइन-लैंथ और रफ्तार से मेजबान बल्लेबाज़ों के पसीने छुड़ा दिए थे। सेंचुरियन में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में भी भारत को 135 रन से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस मुकाबले में भी टीम इंडिया के तेज़ गेंदबाज़ों के सामने द. अफ्रीकी बल्लेबाजों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। पहले दोनों टेस्ट मैचों में भारत को अपनी खराब बल्लेबाज़ी के कारण हार का सामना करना पड़ा। तीसरा टेस्ट मैच वांडरर्स में खेला गया उस खराब पिच पर भारतीय तेज़ गेंदबाज़़ों ने तो दम दिखाया ही इसके साथ ही साथ वहां भारतीय कप्तान विराट कोहली और उप-कप्तान अजिंक्य रहाणे ने भी साहसी पारियां खेली।इसके बाद द. अफ्रीकी बल्लेबाज़ अपनी ही पिच पर खेलने से डरने लगे थे। इस टेस्ट मैच को भारत ने जीतकर अपनी लाज बचाई। मैच खत्म होने के बाद आइसीसी ने भी इस पिच को खराब करार दिया था। 

जेनिंग्स ने मार्करम को कप्तान बनाए जाने पर भी उठाए सवाल

जेनिंग्स ने फाफ के चोटिल होने के बाद मार्करम को कप्तान बनाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मेरी नजर में दक्षिण अफ्रीका वनडे सीरीज हार चुकी है। उनके टीम प्रबंधन की रणनीति वनडे सीरीज में पूरी तरह फेल साबित हुई है। जब मार्करम को कप्तान बनाए जाने कि खबर आई तो सभी चौंक गए थे, क्योंकि द.अफ्रीकी टीम में मार्करम से ज़्यादा अभी बहुत से खिलाड़ी मौजूद हैं। एबी डिविलियर्स और फाफ डूप्लेसिस के चोटिल होने के बाद जे पी डुमिनी या फिर मोर्ने मोर्कल को ये जिम्मदारी सौंपी जा सकती थी।

मार्करम ने द. अफ्रीका अंडर19 टीम को वर्ष 2014 में लीड किया था और उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता से काफी प्रभावित किया था। डू प्लेसिस के अचानक चोटिल होने के बाद सेलेक्टर्स ने मार्करम को ये जिम्मेदारी सौंप दी।  भले ही मार्करम ने अंडर 19 टीम का कमान संभाल ली हो लेकिन उनके अंतरराष्ट्रीय करियर पर नजर डाले तों मार्करम ने अब तक सिर्फ तीन वनडे मैच (एक बतौर कप्तान) खेले हैं और उन्होंने अक्टूबर 2017 में बांग्लादेश के खिलाफ अपना डेब्यू किया था। उन्होंने 6 टेस्ट मैच भी खेले हैं। इतने छोटे से अंतरराष्ट्रीय करियर वाले खिलाड़ी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का फैसला अटपटा तो लगता ही है। 

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By Pradeep Sehgal