(गावस्कर का कॉलम)

दूसरे टेस्ट में शानदार प्रदर्शन के दम पर न्यूजीलैंड का मैच जीतकर सीरीज बराबर करना कई मायनों में दिल जीतने वाला रहा। हालांकि पहला टेस्ट हारने पर कीवी मीडिया ने सवाल खड़े कर दिए थे कि आखिर कैसे कोई टीम पहली पारी में 500 रन बनाने के बाद भी हार सकती है। वास्तव में ऐसा पहले भी हो चुका है। 2003-04 में एडिलेड में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐसा ही किया था, जब पोंटिंग ने दोहरा शतक जड़ा था और इसके बाद आगरकर ने दूसरी पारी में छह विकेट लेकर भारत की मैच में वापसी करा दी थी। भारत को छोटा लक्ष्य मिला। द्रविड़ ने पोंटिंग को जवाब देते हुए भारत की ओर दोहरा शतक जड़ा और दूसरी पारी में जीत में अहम भूमिका निभाई। सभी को याद है कि दोहरा शतक लगाने के बाद पोंटिंग ने अपनी पत्नी की ओर फ्लाइंग किस किया था, इसलिए यह कोई नया नहीं है। हो सकता है कि ऑस्ट्रेलिया की हवा में रोमांस हो। मुझे हैरानी नहीं होती कि वहां मैदान में भावनाओं को ज्यादा दिखाया जाता है।

न्यूजीलैंड की जीत की खास वजह एक यह भी रही कि मैच जीतने के बावजूद किसी तरह की बयानबाजी देखने को नहीं मिली। ब्रेंडन मैकुलम के नेतृत्व में टीम बेखौफ ब्रांड का क्रिकेट खेल रही है और तेजी से रन बना रही है। जब गेंदबाजी की बात आती है, तो उनके गेंदबाज चुपचाप अपना काम कर देते हैं। हां, कभी-कभी थोड़ी बहुत नोंक-झोंक जरूर देखने को मिलती है, लेकिन खिलाड़ी कभी सीमा लांघते नहीं दिखते। इस समय वह एक ऐसी टीम है, जिसे हर कोई देखना चाहता है।

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Posted By: sanjay savern

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