(रवि शास्त्री का कॉलम) 

आइपीएल 2017 में दो टीमें, पुणे और गुजरात बाकी सभी के लिए आसान शिकार की तरह नजर आ रही हैं। कुछ समय पहले तक मुझे संदेह था कि कुछ ऐसा ही हाल पंजाब का होगा। एक बारगी तो बेंगलूर भी निराश कर रही थी, लेकिन ऐसा अब नहीं है। डिविलियर्स और कोहली आग की तरह हैं जो जल्द ही इस टीम को शीर्ष पर ले जाएंगे। तब यह टीम वाकई अपनी लय में होगी।

वहीं, मुंबई और कोलकाता का अभी भी प्रभुत्व है। वे ज्यादातर आइपीएल में बने रहे हैं। मुंबई की टीम में तीन युवा भारतीय खिलाड़ी हैं। पांड्या बंधुओं और नितीश राणा को लेकर दूसरी टीमों में डर है। इन युवा खिलाडि़यों ने अपने आक्रामक खेल से कई बार दूसरी टीमों से मैच छीना है। डिंडा और बोल्ट अभी भी उनके द्वारा किए गए हमले में मिले घावों की गिनती कर रहे हैं।

दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए भी अपने युवा खिलाडि़यों के साथ आर या पार जैसी स्थिति है। उसकी बल्लेबाजी पूरी तरह से युवा भारतीयों पर निर्भर है। संजू सैमसन ने अभी मैदान पर कदम रखे हैं, लेकिन लगता है कि दिल्ली की निराशाजनक गेंदबाजी की वजह से उसे और अधिक की जरूरत होगी। ब्रेथवेट, एंडरसन और मॉरिस अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने में सक्षम हैं। सनराइजर्स हैदराबाद ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। शिखर धवन और युवराज सिंह पूरी सतर्कता के साथ हमला बोल रहे हैं। डेविड वार्नर अकेले विरोधियों का सामना करने के लिए काफी नहीं हो सकते हैं।

ऊपर जिन टीमों के बारे में लिखा गया है उनसे मुझे उम्मीद है या उन पर संदेह है। मेरा यह अध्ययन ज्यादातर टीमों के संतुलन पर आधारित है। कोई तो वजह है जो मुंबई और कोलकाता सभी सत्रों में बेहतरीन टीमें हैं। वे ज्यादातर बहुत अच्छा खेलती हैं और दो महीनों तक चलने वाले इस थका देने वाले आइपीएल में सिर्फ स्थिरता मायने रखती है।

(टीसीएम)

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