गावस्कर का कॉलम

इंग्लैंड में चेतेश्वर पुजारा के पहले शतक से भारत को ना सिर्फ बढ़त मिली, बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त भी हासिल हुई। उनकी पारी पूरी तरह से एक टेस्ट पारी थी, जिसमें संयम की जरूरत थी और पिच पर खड़े रहने की जिद थी। आज के अधिकतर बल्लेबाज वो शॉट खेलने जाते हैं जिन्हें वे सीमित ओवरों के मैच में बहुत अच्छे से खेलते हैं, लेकिन वे भूल जाते हैं कि लाल गेंद सफेद की तुलना में ज्यादा हरकत करती है। इसी चक्कर में वे आउट हो जाते हैं। पुजारा ने अपना समय लिया, मुश्किल समय निकाला और शानदार शतक बनाया। उन्होंने इशांत और बुमराह के योगदान की सराहना करके भी अच्छा काम किया। इनके साथ के बिना पुजारा का शतक और भारत को बढ़त नहीं मिल पाती। पहले दो दिन में 20 विकेट गिरने के बाद ऐसा लगने लगा कि पिच में कुछ गड़बड़ है, हालांकि गेंद मूव कर रही थी, लेकिन बल्लेबाजों के आउट होने में उनकी साधारण तकनीक और सिर की पोजीशन ज्यादा अहम रही।

भारत को इस बात की चिंता होनी चाहिए कि मोइन अली ने ऐसी पिच पर पांच विकेट लिए जो स्पिनर के लिए मददगार नहीं थी। इशांत के पैरों ने जरूर पिच पर कुछ निशान बना दिए थे, जिसका इस्तेमाल मोइन ने किया। इससे बल्लेबाजों के मन में कुछ शंकाएं पैदा हुईं, लेकिन उन्होंने खराब शॉट का चयन किया। भारत को पता है कि वो दूसरी पारी में 150-200 से ज्यादा के स्कोर का पीछा नहीं करना चाहेगा क्योंकि चौथी पारी में बल्लेबाजी आसान नहीं होगी।

भारतीय गेंदबाज शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और बुमराह उनका नेतृत्व कर रहे हैं। वह तेज गति से गेंदबाजी करते हुए दोनों तरफ स्विंग करा रहे हैं। वो हर गेंद के साथ खतरनाक लग रहे हैं। इशांत बिना खतरनाक दिखे अच्छी गेंदबाजी कर रहे हैं। शमी भी अच्छा कर रहे हैं, लेकिन थोड़े दुर्भाग्यशाली रहे हैं। उनकी कई गेंद बल्ले के पास से गुजर गई। पहले दिन के बाद उन्होंने भारत को मौका दिया था और एक बार फिर से उन्होंने सीरीज बराबर करने का मौका दे दिया है।

Posted By: Sanjay Savern