(गावस्कर का कॉलम)

ऑस्ट्रेलिया, भारत, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका और इंग्लैंड की दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो रही भिड़ंत के चलते यह हफ्ता काफी एक्शन भरा रहा। ह्यूज की मौत से क्रिकेट की दुनिया में शोक छा गया था और इस वजह से आपस में खेल रही टीमों के बीच जुबानी जंग कम देखने को मिल रही थी। हालांकि यह सब थोड़े समय के लिए ही रहा। डेविड वार्नर को आउट न कर पाने की वजह से भारत की हताशा उन पर हावी हो गई। हालांकि उन्हें पता होना चाहिए कि जहां तक जुबानी जंग की बात है, तो वह ऑस्ट्रेलिया को हरा नहीं सकते। भले ही कुछ भारतीय क्रिकेटर इसका फायदा खुद को प्रेरित करने के लिए करते हों, लेकिन अधिकतर खिलाड़ी इस वजह से अपने खेल को प्रभावित करते हैं। मुझे यह समझ में नहीं आता है कि अगर आप खुद नो बॉल करते हैं, तो इसमें बल्लेबाज से भिडऩे से क्या होगा। आखिर उसका क्या कसूर है।

न्यूजीलैंड और इंग्लैंड ने अपने-अपने मुकाबलों में अच्छी वापसी की। बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बेहद प्रभावशाली प्रदर्शन की बदौलत न्यूजीलैंड ने टेस्ट सीरीज में बराबरी हासिल की। पाकिस्तान के बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता। एक दिन यह टीम चैंपियन की तरह खेलती है, तो दूसरे दिन ताश के पत्तों की तरह ढह जाती है। न्यूजीलैंड के खिलाफ ऐसा ही हुआ, जहां पहली पारी में अच्छा स्कोर बनाने के बावजूद पाकिस्तान ने मैच पर से पकड़ गंवाई और हार झेली। शुरुआती कुछ मुकाबलों में हार झेलने के बाद इंग्लैंड ने भी अच्छी वापसी की। लेकिन वह लय में आने के बावजूद श्रीलंकाई टीम को उन्हीं के घर में हराने के असंभव काम को पूरा नहीं कर सकी।

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Posted By: sanjay savern

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