(जैफ थॉमसन का कॉलम)

इतिहास रचने और ऑस्टेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने के लिए भारत को बहुत बधाई। एक ऑस्टेलियाई होने के नाते मैं जानता हूं कि यहां उपमहाद्वीप से आना और सीरीज जीतना कितना कठिन होता है। यहां की पिच, मौसम सभी में बड़ा अंतर होता है। विकेट में अधिक गति और उछाल उपमहाद्वीप के बल्लेबाजों के लिए बड़ी मुश्किल पैदा करता है, लेकिन विराट कोहली और उनकी टीम जब से ऑस्टेलिया में उतरे एक मिशन लेकर उतरे।

कप्तान के तौर पर कोहली बेहद दृढ़ संकल्प के रूप में दिखे कि उन्हें ऑस्टेलिया में टेस्ट सीरीज जीतनी है। मैं एक पुराना क्रिकेटर हूं और मैं मैदान पर बहस में विश्वास नहीं करता हूं। हमारे दिनों में हम मैदान पर बहस नहीं करते थे। क्रिकेट के मैदान पर लड़ाई बस बल्ले और गेंद के बीच होती थी। यही वजह थी कि मुङो लग रहा था कि कोहली गलती कर रहे हैं और टिम पेन के साथ बहस करके अपना ध्यान हटा रहे हैं।

यह कहना भी गलत नहीं होगा कि कोहली अपनी गलतियों से बहुत जल्दी सीख लेते हैं और पर्थ टेस्ट के बाद ऐसी कोई गलती नहीं की। कोहली ने बड़ी शांति के साथ ही मेलबर्न में टीम का नेतृत्व किया और सिडनी में वह शानदार थे। वह कप्तान के तौर पर आखिरी दो टेस्ट में बहुत शानदार दिखे। उनके क्षेत्ररक्षण लगाने की क्षमता बेहद शानदार थी। उन्होंने अच्छा स्वभाव दिखाया।

कोहली को मैदान पर उनके जुनून दिखाने के लिए जानते हैं। वह काफी आक्रामक हैं, लेकिन मैंने आखिरी दो टेस्ट में देखा कि भारतीय कप्तान काफी परिपक्व हो गए हैं। यदि कोहली इसी तालमेल को बनाए रखने में कामयाब रहे, जैसा उन्होंने मेलबर्न और सिडनी में दिखाया तो वह आने वाले वक्त में और भी खतरनाक कप्तान बन सकते हैं और हां ध्यान रखिए ऑस्टेलिया में मिली यह जीत उनकी भूख और बढ़ाएगी, उनके अंदर और भी आत्मविश्वास जगाएगी।

कोहली और उनकी टीम इस जीत की हकदार थी। उन्होंने ऑस्टेलिया को खेल के हर विभाग में पछाड़ा। मैं सुनता आया हूं कि हमारा गेंदबाजी आक्रमण दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन सीरीज का स्कोर कार्ड ऐसा नहीं दर्शाता है।

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Posted By: Pradeep Sehgal