(गावस्कर का कॉलम)

उत्कृष्ट बल्लेबाजी के बदौलत भारत ऑस्ट्रेलिया के 530 रन के विशाल स्कोर के करीब पहुंच सका और इसके साथ ही मेलबर्न टेस्ट जीतने की संभावनाएं भी बन गईं। विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे ने एक चमचमाती हुई पारी खेली। जब रहाणे क्रीज पर कोहली का साथ देने आए तबतक भारत ने शनिवार के नाबाद बल्लेबाज मुरली विजय और चेतेश्वर पुजारा के विकेट गंवा दिए थे। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने खून चख लिया था और वे शिकार को खत्म करने के मूड से आगे बढ़ रहे थे। इस जोड़ी ने न सिर्फ अपना बचाव किया, बल्कि कुछ इस तरह से पलटवार किया कि विशाल स्कोर होने के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान को रक्षात्मक क्षेत्ररक्षण सजाने को मजबूर होना पड़ा।

कोहली को अच्छी भागीदारी के लिए सामने वाले बल्लेबाज से अच्छे सहयोग की उम्मीद थी और रहाणे ने उन्हें वह विश्वास दिया। इस साझेदारी में रहाणे ही वह बल्लेबाज थे, जिन्होंने अपने लुभावने शॉट्स से कोहली को भी एक समय पीछे छोड़ दिया। किस्मत भी दोनों के साथ थी। ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्ररक्षकों ने कुछ कैच भी टपकाए। रहाणे-कोहली ने क्षेत्ररक्षण की खामियों का पूरा फायदा उठाते हुए मैदान के चारों तरफ जानदार शॉट लगाए और 262 रन की रिकॉर्ड साझेदारी कर डाली।

कोहली अच्छी तरह से गेंद की लाइन के पीछे आकर अपनी मजबूती के अनुसार शॉट खेल रहे थे। खास बात यह रही कि वह हर शॉट अपने शरीर के बहुत करीब से खेल रहे थे। उन्होंने ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंद का पीछा नहीं किया, जैसा की वह इंग्लैंड में कर रहे थे। दूसरी तरफ रहाणे बेहद ही कूल नजर आ रहे थे। छोटे-छोटे गैप को ढूंढ कर वह आसानी से गेंद को सीमारेखा के पार भेज रहे थे। इन दोनों की पारी ने भारतीय खेमे में एक बार फिर उम्मीद की किरण जगा दी है। अब गेंदबाजों खासकर अश्विन की जिम्मेदारी बनती है कि वह भारत को बढ़त लेने का मौका प्रदान करें। लियोन को पिच से टर्न मिल रहा था और यदि अश्विन ने इस टर्न का इस्तेमाल करके मेजबान टीम को कम स्कोर में समेटने में अच्छा सहयोग दिया तो भारतीय टीम के सामने आखिरी पारी में जीत के लिए ज्यादा बड़ा लक्ष्य नहीं होगा और उसे हासिल कर टीम इंडिया खुद को सीरीज में बरकरार रख सकती है।

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Posted By: sanjay savern

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