(रवि शास्त्री का कॉलम) 

दिल्ली के बचाव में एक बात यह जाती है कि वे अपने विरोधियों को परेशान कर रहे हैं। वे उतार-चढ़ाव के दौर से बेशक गुजरे हों, लेकिन शायद ही कभी आपने उन्हें बीच में किसी भी बात पर समझौता करते हुए देखा हो। यह एक ऐसा पहलू है जिसकी वजह से पुणे को आज के मुकाबले के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।

निश्चित तौर पर यह मैच पुणे के लिए एक बड़ा मुकाबला होगा। वह संभवत: पहले से ही रिंग जोन में है, लेकिन उसके जो एक-दो मैच बचे हैं वे उसके लिए काफी महत्वाकांक्षा वाले हैं। दिल्ली ने जिस तरह उन्मुक्त होकर स्कोर बनाए हैं वैसे ही रन भी दिए हैं। विकेट के बीच वे हास्यास्पद हो सकते हैं, लेकिन अपने बेहतर दिन उनके बल्ले से शानदार रन निकलते हैं।

हालांकि, जहां तक अनुशासन की बात है तो पुणे इस संबंध में शीर्ष पर है। यह एक वजह है कि क्यों वे इतनी दूर तक पहुंचे हैं और इसी का उलटा दिल्ली के लिए है जिनके लिए कहना पड़ रहा है कि उन्होंने अपने प्रशंसकों को काफी निराश किया है। यह विडंबना है कि दिल्ली के युवा खिलाडि़यों को एक ऐसी पारी खेलने की समझ बहुत कम है जो उनके मेंटर राहुल द्रविड़ की विशेषता थी। ज्यादातर समय वे घबराए हुए नजर आए हैं।

वह जो भी हो, लेकिन पुणे को अपने शीर्ष क्रम से अभी भी थोड़ी ज्यादा उम्मीद होगी। इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता कि एमएस धौनी विध्वंसक रूप में लौट आएं। स्टीव स्मिथ ने काफी दिन से कोई सुर्खियां नहीं बटोरी हैं जो उनके कद से मेल नहीं खाता है।

(टीसीएम)

Posted By: Shivam

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