(गावस्कर का कॉलम) 

तीसरे और आखिरी टेस्ट में जीत से वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ेगा। इसके अलावा पहले तीन मैचों में एबी डीविलियर्स के बाहर होने से भी भारत की जीत की संभावना बढ़ गई है। सबसे मुश्किल पिच पर बल्लेबाजी को देखना बेहद अच्छा अनुभव था और इससे यह मिथक हमेशा के लिए खत्म हो जाना चाहिए कि भारतीय तेज गेंदबाजी को नहीं खेल सकते। सचाई यह है कि कोई भी अच्छी तेज गेंदबाजी का सामना नहीं कर सकता।

 

यहां तक कि डॉन ब्रैडमैन को भी बॉडी लाइन सीरीज में परेशानी हुई थी और दुनिया का कोई भी बल्लेबाज अपने दिल पर हाथ रखकर यह नहीं कह सकता कि उसे तेज गेंदबाजी का सामना करना पसंद है। कई बार बल्लेबाज अपनी योग्यता के आधार इसका सामना कर सकता है। भारतीय बल्लेबाजों ने वांडरर्स में ऐसा करके दिखाया। उन्होंने गजब का संघर्ष, जज्बा और प्रतिबद्धता दिखाई। गेंद लगने के बावजूद वे पिच पर टिके रहे। दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज जिस ढंग से डगमगाए, उसे देखकर क्या हमें यह कहना चाहिए कि वे तेज गेंदबाजी नहीं खेल सकते?

 

भारतीय चयनकर्ताओं को भी यही सीखना चाहिए कि टीम चुनते समय किसी एक प्रदर्शन के आधार पर ही नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए। पिच को लेकर थ्योरी, किसी खास पिच पर कौन बल्लेबाजी या गेंदबाजी कर सकता है, इस तरह की सोच को निकालकर बाहर फेंक देना चाहिए। पुरानी कहावत है, फॉर्म अस्थायी है और क्लास स्थायी। दूसरी पारी में अंजिक्य रहाणे की बल्लेबाजी को देखकर यह कहावत पूरी तरह से चरितार्थ होती है। इसके बावजूद उन्हें वनडे टीम में जगह मुश्किल ही मिलेगी, क्योंकि उन्हें एक ओपनर के तौर पर रखा गया है। यहीं पर थोड़ी सी उलझन होती है।

 

राहुल टेस्ट में ओपनिंग करते हैं, लेकिन टी-20 में मध्य क्रम में खेलते हैं और रहाणे टेस्ट में मध्य क्रम में उतरते हैं, लेकिन वनडे में उन्हें सिर्फ ओपनर के तौर पर देखा जाता है। दोनों को शायद जगह नहीं मिले, लेकिन दोनों को यह समझाना बेहद जरूरी है कि वे किसी भी क्रम पर खेलने में सक्षम हैं।

 

डरबन की पिच आमतौर पर बल्लेबाजी के लिए अच्छी होती है क्योंकि यहां गेंद अच्छे से बल्ले पर आती है। स्क्वॉयर  बाउंड्री छोटी है, जिससे गेंदबाजों को इस चीज को लेकर सतर्क रहना होता है। भारत के पास दक्षिण अफ्रीका में पहली बार वनडे सीरीज जीतने का बेहतरीन मौका है। वे करीब एक महीने से यहां पर हैं और इसलिए उन्हें चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए। 

 

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By Sanjay Savern