(गावस्कर की कलम )

चैंपियंस लीग से अंतिम आइपीएल फ्रेंचाइची की निकासी पर दक्षिण अफ्रीका में खूब खुशी मनाई गई। इसका संबंध इस बात से भी नहीं था कि कोई घरेलू टीम फाइनल में पहुंची हो। सेमीफाइनल में दिल्ली की हार पर की गई टिप्पणियां निराशाजनक थीं। खासकर इसलिए क्योंकि चैंपियंस लीग में दक्षिण अफ्रीका भी बीसीसीआइ और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के साथ साझेदार हैं। चैंपियंस लीग से होने वाली कमाई दक्षिण अफ्रीका के लिए कोई मामूली नहीं है और कई दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी आइपीएल की टीमों में हैं। यही वजह है कि वे केवल दक्षिण अफ्रीका में खेलने की तुलना में आइपीएल के कारण अधिक आरामदायक स्थिति में हैं। बीसीसीआइ द्वारा आइपीएल और चैंपियंस लीग की पहले के चलते उनके क्रिकेटरों के लिए कमाई के अवसर बने हैं।

इंग्लैंड की ओर से आलोचना होने की बात समझी जा सकती है। क्योंकि उनके इक्का दुक्का खिलाड़ी ही आइपीएल टीमों से खेलते हैं। वैसे चैंपियंस लीग के लिए क्वालीफाई करने वाली इंग्लैंड की दो टीमों को भी खेलने के लिए खूब पैसा मिला है। चैंपियंस लीग के बजाय स्टैनफोर्ड के साथ जाने का फैसला इंग्लैंड का था, जबकि सरल सा गणित ये बता देता है कि चैंपियंस लीग में लंबे समय तक साझेदार बने रहना उनके बोर्ड के लिए लाभकारी होता।

इस बारे में काफी बातें हुई हैं कि किस तरह से आइपीएल में सिर्फ छह सप्ताह के लिए और चैंपियंस लीग में तीन सप्ताह के लिए साथ आने वाली आइपीएल टीमों की तुलना में साल भर साथ खेलने वाली टीमें बेहतर होती हैं। इस तथ्य से यह बात काटी जा सकती है कि आइपीएल टीमों ने अभी तक दो चैंपियंस लीग जीती हैं और इनमें से एक जीत तो दक्षिण अफ्रीका में हुई थी।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर