(वीवीएस लक्ष्मण का कॉलम)

ओवल टेस्ट में एलिस्टेयर कुक के गौरवशाली करियर की झलक देखने को मिली। एक खिलाड़ी के रूप में शीर्ष पर रहते हुए जाने से बेहतर कुछ भी नहीं होता। कुक ने अपने आखिरी मैच को यादगार बना दिया। एक शतक के साथ उन्होंने इंग्लैंड की आसान जीत में अहम भूमिका निभाई।

दिखा टेस्ट का असली रोमांच

इंग्लैंड के पक्ष में सीरीज का नतीजा 4-1 से रहा, लेकिन इससे सही मायने में दोनों टीमों की गुणवत्ता को नहीं आंका जाना चाहिए। सीरीज में इस तथ्य को दोहराया गया कि टेस्ट क्रिकेट में आप गेंद से एक घंटे के लिए भी अपनी नजर नहीं हटा सकते हैं। भारत के पास मौके थे, लेकिन ट्रेंट ब्रिज को छोड़कर उसने उसका फायदा नहीं उठाया। इसके विपरीत इंग्लैंड ने अपने खेल को जब सबसे ज्यादा जरूरत पड़ी तब और भी बेहतर किया।

इंग्लैंड ने खेला बेहतर खेल

ट्रेंट ब्रिज में हार के बाद साउथैंप्टन में जिस तरीके से उसने वापसी की और जिस गति से उन्होंने ओवल में जीत हासिल की, वह कुछ ऐसा है जिसका अनुकरण भारत को आने वाले समय में करना चाहिए। मुझे यकीन है कि भारतीय विशेषज्ञ दल सीरीज हार के कारणों का आत्ममंथन करेगा। वह पहचान लेंगे कि उन्होंने गलतियों को दोहराया। शीर्ष क्रम ने अच्छी शुरुआत नहीं की और निचले क्रम को मुश्किल परिस्थितियों में पहुंचाने का काम किया जो दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम का प्रतीक नहीं है।

आजादी से खेले राहुल और पंत  

मैं ओवल में एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए केएल राहुल और रिषभ पंत के दृष्टिकोण से खुश था। नाउम्मीदी की परिस्थिति से उन्होंने आजादी के साथ बल्लेबाजी की और सीरीज के कुछ बेहतरीन स्ट्रोक खेलने के साथ खुद को खूबसूरती से पेश किया। दोनों को शतक बनाने की जरूरत थी। राहुल ने ओवल तक निराशाजनक दौरा किया था, जबकि पंत ने ट्रेंट ब्रिज में अपने पदार्पण के बाद फीकी बल्लेबाजी की थी। इन दोनों के दृढ़ विश्वास और सकारात्मकता से भारतीय टीम सीख ले सकती है।

जीत के लिए खेला भारत

राहुल के आउट होने के ठीक बाद भारत ड्रॉ के लिए खेल सकता था, लेकिन जब तक पंत क्रीज पर थे वह लक्ष्य का पीछा करने के बारे में सोचते रहे। कुछ उसी तरह जैसे भारतीय टीम ने 2014 में एडिलेड में विराट कोहली के बतौर कप्तान पहले टेस्ट में किया था। यह इस टीम का चरित्र है, इनको कोई फर्क नहीं पड़ता और यह परिणाम के लिए प्रयास करते रहते हैं। भारत को इस साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया का दौरा करना है जहां अगर अपनी गलतियों से सीख लेते हैं और उसे अपनाते हैं तो उन्हें इससे छुटकारा मिल सकता है।

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Posted By: Pradeep Sehgal