इंग्लैंड की पिचों से अब स्पिनरों को मदद मिलने लगी है। ऐसे में विश्व कप में भी इस बार स्पिनरों की भूमिका अहम होगी। पिछले दो साल से भारतीय टीम में प्रमुख स्पिनर की हैसियत से खेल रहे चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव अपने शहर और राज्य के साथ देश का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि आइपीएल में उनके खराब प्रदर्शन का असर विश्व कप पर नहीं पड़ेगा। इन्हीं सभी सवालों को लेकर अभिषेक त्रिपाठी ने कुलदीप यादव से खास बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश :

-विश्व कप को लेकर कैसी तैयारियां चल रही हैं और बचे हुए दिनों में विश्व कप के लिए खुद को कैसे तैयार करेंगे?

-विश्व कप की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इंग्लैंड रवाना होने में अब बहुत कम समय ही बचा है। यह एक बहुत बड़ा टूर्नामेंट है तो इसकी तैयारियां भी उसी हिसाब से चल रही हैं। हम अपनी खूबियों को निखारने में लगे हुए हैं।

-आइपीएल में केकेआर के साथ आपका प्रदर्शन उम्मीदों के हिसाब से नहीं रहा। क्या इसका असर विश्व कप पर पड़ेगा ?

-ये बात सही है कि मेरे लिए आइपीएल उतना अच्छा नहीं गया लेकिन मुझे नहीं लगता कि उसका फर्क विश्व कप पर पड़ेगा। आइपीएल टी-20 प्रारूप में खेला जाता है जबकि विश्व कप 50 ओवरों का प्रारूप है। विकेट भी अलग तरह की होंगी। आइपीएल में टीम अलग थी, खिलाड़ी अलग थे। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि आइपीएल में मेरे खराब प्रदर्शन का असर विश्व कप पर पड़ेगा। ऐसा भी नहीं है कि मैंने आइपीएल में खराब गेंदबाजी की और छोटी गेंदें या फुलटॉस फेंक रहा था।

-आखिर क्या वजह थी कि आइपीएल में इस बार हमें कुलदीप का प्रदर्शन उनकी ख्याति के मुताबिक देखने को नहीं मिला ?

-मुझे ऐसा लगता कि टीम प्रबंधन और कप्तान सोचते थे कि उनके पास विकल्प हैं। इस बार ईडन गार्डेस की विकेट बल्लेबाजी के लिए भी अच्छी थी जहां स्पिनर ज्यादा विकेट ले नहीं पाए। वहां गेंदबाजी करना बहुत मुश्किल था क्योंकि गेंद स्पिन नहीं कर रही थी और जब गेंद स्पिन नहीं होती है तो एक स्पिनर को गेंदबाजी करने में मुश्किल होती है। ईडन की सपाट विकेट थी और मैदान भी छोटा है जिसका असर मेरी गेंदबाजी पर भी पड़ा। आप चेन्नई को देख लीजिए। वहां की विकेट स्पिनरों के माकूल थी जिसकी वजह से उसके स्पिनर सफल रहे। कुल मिलाकर टी-20 में विकेट से बहुत फर्क पड़ता है।

-पिछली बार जब आप इंग्लैंड गए थे तब आपने सफेद गेंद से अच्छा प्रदर्शन किया था। इस बार लोग कह रहे हैं कि गर्मी के कारण इंग्लैंड की पिचों से स्पिनरों को ज्यादा मदद मिलेगी। आप इसे कैसे देख रहे हैं ?

-देखिए किसी खास रणनीति के साथ मैं इंग्लैंड नहीं जा रहा हूं। विदेशी विकेटों पर गेंदबाजी करना ज्यादा आसान होता है क्योंकि गेंद तेजी से निकलती है। वहां अच्छी उछाल मिलती है और गेंद तेज निकलती है जिसकी वजह से बल्लेबाजों को रन बनाने कठिनाई होती है। मुझे इंग्लैंड में गेंदबाजी करना रास आता है। ऐसे में मैंने जो कुछ अनुभव वहां हासिल किया है उसका फायदा विश्व कप में उठाने की कोशिश करूंगा।

-कानपुर से निकलकर इतने बड़े मंच पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करना आपके, परिवार के, कोच के और आपके शहर के लिए कितना मायने रखता है ?

-वाकई में यह बहुत बड़ी बात है कि मैं कानपुर से विश्व कप में खेलने वाला पहला खिलाड़ी बनने जा रहा हूं। इस खास मौके के लिए मेरा परिवार, मेरे कोच, मेरे दोस्त, सभी खुश हैं। यह मेरे लिए एक अच्छा मौका है। दो साल से मैं भारतीय टीम के साथ क्रिकेट खेल रहा हूं लेकिन विश्व कप जैसे मंच पर खेलने को लेकर मैं ज्यादा रोमांचित हूं। अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगा। यह पूरे उत्तर प्रदेश और कानपुर के लिए खुशी की बात है।

-आप हाल के वर्षो में भारतीय टीम के नियमित सदस्य रहे हैं। बड़े मुकाबलों से पहले टीम का माहौल कैसा रहता है और कैसे खिलाड़ी एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते हैं ?

-भारतीय टीम के अंदर माहौल बहुत अच्छा है क्योंकि खिलाडि़यों के बीच सीनियर और जूनियर का ज्यादा फर्क नहीं है। सभी एक-दूसरे की इज्जत करते हैं। सीनियर अपने जूनियर का मनोबल बढ़ाते हैं और जूनियर उनकी इज्जत करते हैं। ऐसे में टीम में अच्छी तालमेल है। कभी ऐसा नहीं लगता कि टीम बिखरी हुई है, सभी एकजुट होकर खेलते हैं। कप्तान, कोच, सहायक कोच सभी अच्छे हैं और वे सभी की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। ऐसे माहौल में उनके साथ खेलना और ड्रेसिंग रूम साझा करना बहुत अच्छा लगता है।

-धौनी की मौजूदगी से टीम पर कितना फर्क पड़ता है और धौनी के साथ कोहली की जुगलबंदी से टीम को कितना फायदा मिलता है ?

-इन दोनों के टीम में रहने से बहुत फर्क पड़ता है क्योंकि ये दोनों टीम के बहुत बड़े खिलाड़ी हैं। इन्होंने हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है। कप्तान के अलावा विकेटों के पीछे से धौनी भाई गेंदबाजों को बहुत मदद करते हैं। उन्हें पूरी टीम को साथ लेकर चलना आता है। वह विराट भाई को भी पूरा सहयोग करते हैं। यह टीम के लिए अच्छी बात है कि सीनियर और जूनियर खिलाड़ी मिलकर अच्छा कर रहे हैं।

-धौनी के विकेट के पीछे होने से एक स्पिनर के तौर पर आपको इसका कितना फायदा मिलता है ?

-वह विकेटों के पीछे से अपने अनुभव से हमें फायदा पहुंचाते हैं। उनके पास बहुत अनुभव है जिसकी वजह से वह अक्सर हमें छोटी-छोटी गलतियों के बारे में बताते रहते हैं। यह एक अच्छी टीम कीनिशानी है। एक सकारात्मक टीम ऐसे ही काम करती है।

-चयनकर्ताओं ने जो 15 सदस्यीय टीम चुनी उस पर कुछ सवाल उठे। आप इसे कैसे देखते हैं? कैसी टीम है और टीम किस लक्ष्य के साथ इंग्लैंड जाएगी ?

-भारतीय टीम संतुलित है। हम पिछले दो साल से अच्छी क्रिकेट खेलते आ रहे हैं और टीम में वहीं सभी खिलाड़ी हैं। टीम का तालमेल बहुत अच्छा है और मुझे उम्मीद है कि यह टीम विश्व कप में भी अच्छा प्रदर्शन करेगी।

-1983 और 2011 में भारत विश्व चैंपियन बना, उन जीतों को आपने महसूस किया होगा। अब 2019 में खुद विश्व कप खेलने जा रहे हैं। आप इन तीनों अलग-अलग समय को कैसे देखते हैं ?

-1983 में हमारी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया जिसके बाद भारतीय क्रिकेट टीम के खेल में बहुत बदलाव आया। 2011 में भी हम विश्व विजेता बने जिसके बाद देश में क्रिकेट संस्कृति का विकास हो चुका है। ऐसे में अब 2019 विश्व कप में हमारे सामने अच्छा प्रदर्शन करने की एक चुनौती होगी और हम एक अच्छी चुनौती पेश करेंगे।

-विश्व कप में कौन से ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्हें देखकर आप सोच रहे हैं कि उन्हें गेंदबाजी करके मजा आएगा ?

-कई टीमों में कई अच्छे बल्लेबाज हैं। विश्व कप एक ऐसा टूर्नामेंट है जहां विश्व स्तर के खिलाड़ी आपके सामने चुनौती पेश करते हैं। हालांकि मैंने किसी खास खिलाड़ी को लेकर ऐसा कुछ सोचा नहीं है। इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान जैसी टीमें में अच्छे खिलाड़ी हैं। हम किसी एक या दो खिलाड़ी के बजाये टीम पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

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Posted By: Sanjay Savern