नई दिल्ली, अभिषेक त्रिपाठी। दुनिया के सबसे अमीर और समृद्ध क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआइ की हालत इतनी दयनीय हो गई है कि अंपायरों की कमी का हवाला देकर उसे अपने दो टूर्नामेंटों के मुकाबलों को टालना पड़ा है। हाल ही में बीसीसीआइ तकनीकि समिति के प्रमुख और पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) की देखरेख में चल रहे बोर्ड के कामकाज पर सवाल उठाए थे।

दैनिक जागरण के पास मौजूद बीसीसीआइ के महाप्रबंधक (क्रिकेट ऑपरेशन) सबा करीम की ईमेल के मुताबिक कूच बिहार ट्रॉफी और सीनियर महिला वनडे टूर्नामेंटों के मुकाबलों की तारीखें अंपायर की कमी की वजह से आगे बढ़ा दी गईं हैं। सबा ने बुधवार को बीसीसीआइ के सभी राज्य संघों के सचिवों और उत्तराखंड, मिजोरम और पुडुचेरी को ईमेल के जरिये इसकी सूचना दी है और इसके लिए जरूरी तैयारियों करने को कहा है। इस मेल की कॉपी उन्होंने सीओए, बीसीसीआइ के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना, सचिव अमिताभ चौधरी और कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी को भी भेजी है।

बीसीसीआइ के एक पदाधिकारी ने कहा कि यह बीसीसीआइ के इतिहास में पहली बार हुआ है। यह शर्मनाक है। सबा करीम छह करोड़ रुपये सालाना किस बात की तनख्वाह ले रहे हैं। जब सब टूर्नामेंट की तारीखें पहले से ही तय हैं तो ऐसा कैसे हुआ। मुझे इस पर हंसी और शर्म जा रही। क्या था बीसीसीआइ और क्या हो गया।

ये हुए हैं बदलाव 

बदले हुए कार्यक्रम के मुताबिक कूच बिहार ट्रॉफी में 17 से 20 दिसंबर को होने वाले तीसरे दौर के मुकाबले को अगले साल 21 से 24 जनवरी को स्थानांतरित कर दिया गया है। साथ ही कूच बिहार ट्रॉफी के 29 जनवरी से शुरू होने वाले नॉकआउट दौर के मुकाबले को 18 फरवरी से आयोजित करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा 24 से 29 दिसंबर के बीच होने वाले सीनियर महिला वनडे टूर्नामेंट के नॉकआउट दौर के मुकाबले अब 26 से 31 दिसंबर के बीच आयोजित होंगे।

अंपायर की कमी 

मेल में सबा ने स्पष्ट लिखा है कि दिसंबर के महीने में अंपायरों की कमी की वजह से इन मैचों की तारीखों को बदल दिया गया है। मजेदार बात यह है कि इस मेल में सबा अगले साल जनवरी में होने वाले मैचों की तारीख को 2018 की जनवरी में बताया है जबकि यह 2019 होना चाहिए। बड़ा सवाल यह है कि क्या बीसीसीआइ के पास सही मायने में अंपायर की कमी है। क्या बोर्ड के पास रिजर्व अंपायर की सुविधा नहीं है। जवाब सबा ही दे सकते हैं लेकिन फिलहाल बीसीसीआइ के क्रिकेट ऑपरेशन के महाप्रबंधक एक बार फिर अपने प्रबंधन में फेल हो गए हैं। पहले ही गांगुली सबा द्वारा बीसीसीआइ के घरेलू टूर्नामेंट के दौरान नियमों में बदलाव पर सवाल उठा चुके हैं और अब उन्होंने बोर्ड के पास अंपायरों की कमी को गिनाकर एक बार फिर अपने लिए परेशानियां बढ़ा ली हैं।

इसलिए खड़ी हुई समस्या

दरअसल रणजी ट्रॉफी का घरेलू सत्र गुरुवार से शुरू हो रहा है। इस दौरान सात नए राज्य मैदान में उतरेंगे जिससे अंपायर और रेफरी की कमी हो गई है। इसकी वजह से बीसीसीआइ को अंडर-19 राष्ट्रीय टूर्नामेंट के मैचों के आयोजन में भी टालना पड़ सकता है। बीसीसीआइ की वेबसाइट के मुताबिक कूच बिहार ट्रॉफी की शुरुआत 19 नवंबर से हो रही है लेकिन इसी दौरान रणजी ट्रॉफी के भी कई मुकाबले चल रहे होंगे। जुलाई 2018 तक बीसीसीआइ के पास कुल 97 प्रथम श्रेणी के अंपायर और 54 मैच रेफरी थे जो 2018-19 में होने वाले 2017 मैचों (लड़के, लड़कियों, पुरुष और महिला टीमें) के लिए नाकाफी हैं। हाल ही में बीसीसीआइ ने अंपायरों के लिए लेवल-2 कोर्स शुरू किया था लेकिन अभी तक पता नहीं चल पाया कि उससे कितने अंपायरों को नियुक्त किया गया।

बीसीसीआइ के एक अधिकारी ने कहा कि लंबे समय से अंपायरों की कमी एक समस्या रही है। जब सुप्रीम कोर्ट ने नए राज्यों को शामिल करने का आदेश पारित किया तब क्रिकेट ऑपरेशन टीम को तैयार रहना चाहिए था। थकान और पूरे देश में सफर के तथ्य को भी ध्यान रखना चाहिए।

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Posted By: Pradeep Sehgal

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