नई दिल्ली, अभिषेक त्रिपाठी। भारत की तरफ से सबसे पहले सबसे ज्यादा टेस्ट रनों का रिकॉर्ड बनाने वाले सुनील गावस्कर को 1984 की इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में हार के बाद इस्तीफा दे देना चाहिए था, लेकिन वह 1987 तक खेले। हालांकि अपनी आखिरी पारी में उन्होंने जो बल्लेबाजी की, उसकी मिसाल मिलनी मुश्किल है। भारत की तरफ से सबसे पहले सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट का रिकॉर्ड बनाने वाले कपिल देव 1983 में अपने घुटने के ऑपरेशन के बाद पहले वाले कपिल नहीं रह गए थे, पर वह 1993 तक खेलते रहे।

भारत को पहला विश्व कप दिलाने वाले कपिल उस समय रिचर्ड हेडली का सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए आखिरी के दस मैचों में मजबूरी में टीम में खिलाए गए। क्रिकेट के भगवान और बल्लेबाजी के लगभग हर रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले तेंदुलकर भी कम से कम तीन साल अपने नाम को भुनाते हुए टेस्ट क्रिकेट खेलते रहे। अंत में उन्हें रिटायर होने को मजबूर होना पड़ा था। हालात यह थे कि उनके 200 टेस्ट मैच का रिकॉर्ड बनाने के लिए बीसीसीआइ ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दो मैचों की विशेष सीरीज आयोजित की, लेकिन इस मामले में महेंद्र सिंह धौनी भारतीय दिग्गजों से आगे निकले।

धौनी की तारीफ इसलिए करनी होगी कि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास भी बिना मजबूरी के लिया और वनडे व टी-20 की कप्तानी भी लगभग शिखर पर रहते हुए छोड़ी। दुनिया के तीव्रतम स्टंपर के रूप में अपनी पहचान बना चुके धौनी इस स्तर पर बैकस्टॉपर से महान विकेटकीपर के तौर पर विकसित हुए, यह कम हैरतअंगेज नहीं। उन्होंने युवाओं को इससे एक संदेश दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। बल्लेबाजी व्याकरण में हेलीकॉप्टर शॉट इजाद करने वाले धौनी की मंशा 2019 विश्व कप तक खेलने की है।

चौंकाने वाले फैसलों के मास्टर
धौनी को कप्तानी के दौरान चौंकाने वाले फैसले के लिए जाना जाता है। उनके चौंकाने वाले फैसले की शुरुआत 2007 में हुई जब उन्होंने पहले टी-20 विश्व कप फाइनल का आखिरी ओवर नए नवेले जोगिंदर शर्मा को दे दिया। उनके पास आरपी सिंह, एस श्रीसंत और हरभजन सिंह जैसे अनुभवी गेंदबाज मौजूद थे, लेकिन धौनी ने अपने मन की सुनी और जोगिंदर ने आखिरी ओवर में मिस्बाह का अहम विकेट झटक तीन गेंद बाकी रहते भारतीय टीम को जीत दिला दी।

युवराज की जगह खुद आए
2011 में भारतीय टीम ने विश्व कप जीता, लेकिन फाइनल मुकाबले में एक वक्त लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय पारी लड़खड़ाने लगी और टीम इंडिया ने सहवाग, सचिन और विराट कोहली समेत 114 के स्कोर पर अपने तीन सबसे अहम विकेट गंवा दिए। इसके बाद पूरे टूर्नामेंट में युवराज सिंह बल्लेबाजी करने आते थे, लेकिन धौनी ने फाइनल में युवराज से पहले बल्लेबाजी के लिए आकर श्रीलंकाई टीम की रणनीति पर पानी फेर दिया। धौनी और गौतम गंभीर के बीच हुई 109 रनों की साझेदारी से भारतीय टीम विश्व विजेता बनी।

इशांत को दिया ओवर
2013 में इंग्लैंड में चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने इंग्लैंड के सामने 20 ओवर में 130 रनों का मामूली सा लक्ष्य रखा। लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड 17वें ओवर तक चार विकेट गंवाकर 102 रन बनाकर जीत की तरफ आसानी से बढ़ रहा था, लेकिन धौनी ने पारी का 18वां ओवर तीन ओवर में 27 रन लुटाने वाले इशांत शर्मा को दिया। जानकारों ने धौनी के इस फैसले पर सवाल खड़ा कर दिए, लेकिन ये फैसला धोनी का था और जो बाद में भी सही साबित हुआ। इशांत ने उस ओवर में शानदार बल्लेबाजी कर रहे रवि बोपारा और इयोन मोर्गन के विकेट चटकाकर भारत की वापसी करवा दी। भारत पांच रनों से यह मैच जीता।

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Posted By: Bharat Singh

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