नई दिल्ली, विकाश गौड़। Attack on Sri Lanka Cricket Team in Pakistan: साल 2009 की शुरुआत में श्रीलंकाई टीम पाकिस्तान के दौरे पर गई थी। इसी दौरान फरवरी के आखिरी और मार्च के पहले सप्ताह में दोनों टीमों को दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी थी। सीरीज का पहला मैच 22 फरवरी से 25 फरवरी तक खेला गया जो ड्रॉ रहा। वहीं, दूसरा मैच 1 मार्च से 5 मार्च तक खेला जाना था, लेकिन इसी दौरान एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने श्रीलंका ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के क्रिकेटरों के दिलों में खौफ पैदा कर दिया था।

दरअसल, दूसरा टेस्ट लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में 1 मार्च से 5 मार्च तक खेला जाना था। मैच के दो दिन का खेल सकुशल समाप्त हुआ था और मैच के तीसरे दिन यानी 3 मार्च 2009 को सोमवार के दिन सुबह के करीब 8 सवा 8 बजे श्रीलंकाई टीम एक बस में सवार होकर होटल से स्टेडियम के लिए निकली थी, जहां दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन का खेल शुरू होना था। टीम बस अपनी रफ्तार से चल रही थी कि इसी बीच पाकिस्तान के समयानुसार करीब साढ़े 8 बजे कुछ अनहोनी सी हुई, देखते ही देखते श्रीलंकाई टीम बस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसने लगीं।

टेस्ट मैच के लिए गद्दाफी स्टेडियम के लिए निकली श्रीलंकाई टीम के खिलाड़ियों ने सोचा नहीं होगा कि उनके साथ ऐसा हो सकता है। हालांकि, श्रीलंकाई टीम बस के साथ पाकिस्तान की ओर से मुहैया कराई गए सुरक्षाकर्मी भी थे जो काफिले के साथ थे, लेकिन 12 आतंकवादियों ने श्रीलंकाई टीम को खत्म करने के इरादे से बस पर गोलियों की बौछार कर दी। सिर्फ गोलियां ही नहीं, बल्कि रॉकेट लॉन्चर और ग्रेनेड से भी टीम बस पर हमला किया गया। हमलावरों ने श्रीलंकाई टीम बस पर रॉकेट लॉन्चर भी दागा, लेकिन ये निशाना चूक गया। अगर निशाना सटीक होता तो फिर खिलाड़ियों का बचना नामुमकिन था।

गनीमत ये रही कि किसी खिलाड़ी की जान नहीं गई, लेकिन कई सुरक्षाकर्मियों की जान इस हमले में चली गई। आज ही के दिन यानी 3 मार्च 2009 को पाकिस्तान दुनियाभर में उसी समय बेनकाब हुआ था जब श्रीलंकाई टीम पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 6 श्रीलंकाई खिलाड़ी बुरी तरह घायल हुए थे। इसके अलावा टीम के 2 स्टाफ और एक अंपायर को भी चोट लगी थी। वहीं, इस आतंकवादी हमले में पाकिस्तान के 6 पुलिसकर्मी और 2 आतंकवादी मारे गए थे।

ड्राइवर ने दिखाई बहादुरी  

हमले के दौरान श्रीलंकाई टीम बस को मेहर मोहम्मद खलील नाम का ड्राइवर चला रहा था। मोहम्मद खलील ने इस दहशत भरे माहौल में अपनी सूझबूझ से काम लिया और बस को ताबड़तोड़ बरसती गोलियों के बावजूद नहीं रोका। भारी गोलीबारी के बीच ड्राइवर ने बस को लगातार चलाया और वहां से कुछ दूर स्थित स्टेडियम तक पहुंचा दिया। हालांकि, इस दौरान कई खिलाड़ी चोटिल हो गए थे।  

हमले के बाद बस ड्राइवर खलील ने एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा था, "पहले मुझे लगा कि मेहमान टीम के स्वागत में कुछ लोग पटाखे चला रहे हैं ये उसकी आवाज है, लेकिन एकाएक एक बंदूकधारी आदमी हमारी बस के ठीक सामने आ गया और तड़ातड़ गोलियां दागने लगा। इसके बाद मुझे लग गया कि ये पटाखों की आवाज नहीं, बल्कि हमारे ऊपर हमला हुआ है। उस वक्त मैं घबरा गया था, लेकिन तभी पीछे से श्रीलंकाई टीम के खिलाड़ियों ने चिल्लाते हुए कहा कि बस को भगाओ। खिलाड़ियों ने इतनी तेज चीखा कि मुझे 440 वोल्ट का करंट जैसा महसूस हुआ और फिर इसके बाद मैं बिना कुछ सोचे-समझे बस को भगाने लगा और टीम को सेफ लोकेशन पर पहुंचा दिया।" इस बहादुरी के लिए बस ड्राइवर खलील को श्रीलंका के राष्ट्रपति ने सम्मानित भी किया था।

ये श्रीलंकाई खिलाड़ी हुए थे घायल 

पाकिस्तान के लाहौर में हुए इस आतंकवादी हमले में श्रीलंकाई टीम के तत्कालीन कप्तान महेला जयवर्धने, उपकप्तान कुमार संगकारा समेत 6 बड़े खिलाड़ियों को गंभीर चोट लगी थी। वहीं, हमले के बाद पाकिस्तान आर्मी के हेलिकॉप्टर से श्रीलंकाई खिलाड़ियों को गद्दाफी स्टेडियम से एयरलिफ्ट कर एयरपोर्ट पहुंचाया गया था।

बता दें कि इस घटना को अब 11 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी तमाम श्रीलंकाई क्रिकेटर ऐसे हैं जो पाकिस्तान जाने से कतराते हैं। हाल ही में श्रीलंकाई और बांग्लादेश की टीम पाकिस्तान दौरे पर गई थी, लेकिन कई बड़े खिलाड़ियों ने पाकिस्तान जाने की जहमत नहीं उठाई थी। वहीं, दुनिया की बड़ी टीमें तो पाकिस्तान का दौरा ही नहीं करती हैं। 

Posted By: Vikash Gaur

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