नई दिल्ली, जेएनएन। टीम इंडिया ने पिछले साल अपने घर में काफी क्रिकेट खेला। इस साल भी भारतीय टीम का कार्यक्रम काफी व्यस्त है। इस लेकर टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सामने चिंता जाहिर की है। कोच की इस राय में टीम के खिलाड़ियों की राय भी शामिल है। 

शास्त्री ने कहा है कि भारतीय बोर्ड अंतरराष्ट्रीय मैचों का कार्यक्रम बनाते समय खिलाड़ियों के आराम का भी ध्यान रखे। जानकारी के मुताबिक शास्त्री ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त सीओए और बोर्ड के सीईओ राहुल जौहरी से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बात करते हुए यह अनुरोध किया है। 

भारतीय टीम कुछ दिनों पहले ही श्रीलंका के लंबे दौरे से लौटी है। यहां उसने सभी तीन टेस्ट, पांच वनडे और एक टी-20 मैच जीते। लेकिन इसके बाद भारतीय टीम को ज्यादा आराम नहीं मिला और 17 सितंबर से ही उसे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज खेलनी है। इसमें पांच वनडे और तीन टी-20 मैच हैं। 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि शास्त्री और खिलाड़ी चाहते हैं कि बोर्ड अंतरराष्ट्रीय मैचों को लेकर थोड़ा बेहतर प्रोग्राम बनाए, क्योंकि उनका मानना है कि इस तरह के कड़े प्रोग्राम में खिलाड़ियों को ऊर्जा दोबारा हासिल करने का बहुत कम वक्त मिलता है।

बीसीसीआइ के सूत्र का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल भी इतना टाइट है कि न सिर्फ मैच बल्कि सफर से भी खिलाड़ियों के शरीर पर असर पड़ता है। शास्त्री ने इस बारे में बोर्ड से विचार करने को कहा है, क्योंकि उनका मानना है कि इससे खिलाड़ियों को जल्द रिकवर होने में मदद मिलेगी।

आपको बता दें कि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमें सीरीज के बीच में अच्छा-खासा गैप लेती हैं। इससे उनके खिलाड़ियों को आराम करने का समय मिल जाता है। कई बार तो टेस्ट और वनडे में खिलाड़ी और कप्तान दोनों बदल जाते हैं। हालांकि, भारतीय टीम के साथ ऐसा नहीं है। यहां दो मैचों, दो फॉर्मेट और दो सीरीज के बीच में काफी कम अंतर रहता है। सभी फॉर्मेट में कप्तान एक ही है और ज्यादातर फॉर्मेट में खिलाड़ी  भी कॉमन ही हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के थकने, चोटिल होने और फॉर्म चुकने की आशंका भी बढ़ जाती है। 

वैसे भारतीय टीम के खिलाड़ियों के व्यस्त होने की एक और वजह उनका आइपीएल में खेलना है। बीसीसीआइ अभी तक आइपीएल में खिलाड़ियों के खेलने, न खेलने या कितना खेलना है, इसे लेकर स्पष्ट रूपरेखा नहीं बना सका है। लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक दो अंतरराष्ट्रीय सीरीज के बीच में मिलने वाला समय (15 दिन का गैप) भी काफी नहीं है। आइपीएल के दौरान तो इसका पालन करवाना भी मुश्किल हो जाता है।

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Posted By: Bharat Singh

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