सुनील गावस्कर का कॉलम। आइसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल का समय नजदीक आ चुका है। न्यूजीलैंड (कीवी) की टीम को जहां इंग्लैंड के खिलाफ उसके घर में पहले दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है, तो वहीं टीम इंडिया भी साउथैंप्टन में क्वारंटाइन के लिए तैयार है। सबका कहना है कि इस बड़े फाइनल मुकबले से पहले न्यूजीलैंड की टीम को इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने का काफी फायदा होने वाला है। उसे वहां की परिस्थितियों के हिसाब से ढलने का मौका मिल जाएगा। दूसरी तरफ देखें, अगर इंग्लैंड से न्यूजीलैंड की टीम हारती है, तो उनका फाइनल में मनोबल गिरा हुआ रहेगा। इतना ही नहीं सीरीज के दौरान अगर उनके प्रमुख खिलाड़ी चोटिल हो जाते हैं तो इससे कीवी टीम का नुकसान भी हो सकता है।

ऐसा नहीं है कि भारतीय टीम कमजोर न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलकर जीतना चाहती है। हालांकि, इन सबसे न्यूजीलैंड को फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने पहले भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी क्षमता दिखाई है। कीवी कभी भी किसी टीम को हरा सकते हैं। डब्ल्यूटीसी फाइनल खेलने के लिए भारतीय खिलाड़ी तरोताजा होकर मैदान में उतरेंगे और पूरी ताकत के साथ खेलेंगे क्योंकि काफी समय से उन्होंने क्रिकेट नहीं खेला है। यह चीज फाइनल में टीम इंडिया को फायदा पहुंचा सकती है। यह एक ऐसी टीम है, जिसने विषम परिस्थितियों में भी विरोधी टीम को धूल चटाई है। भारतीय खिलाड़ी जानते हैं कि उन्हें कैसे पलटवार करना है।

इंग्लैंड को हराने का सुनहरा मौका

इंग्लैंड की गर्मियों इस साल भारतीय क्रिकेट के लिए सुनहरी साबित होने वाली है, क्योंकि डब्ल्यूटीसी फाइनल के बाद इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज होने से पहले लगभग छह सप्ताह का समय है। मेरे विचार से इतना समय किसी टीम के लिए वहां की परिस्थितियों में ढलने और अपनी लय हासिल करने के लिए पर्याप्त है, जिससे उनके पास इंग्लैंड को हराने का सुनहरा मौका है।

इंग्लैंड में अगस्त का महीना भी टीम इंडिया को रास आने वाला है

इंग्लैंड के भारत दौरे पर स्पिनरों की मददगार पिचों को लेकर चारों तरफ रोना फैल गया था। इसके बाद हमें इंग्लैंड में इस बात पर हैरानी नहीं होनी चाहिए कि उनके मैदानकर्मी हरी घास वाली पिच तैयार करें। भारत के पास भी काफी शानदार तेज गेंदबाज है, जो इंग्लैंड के बल्लेबजों को उनकी ही पिच पर परेशानी में डाल सकते हैं। इंग्लैंड में जून के महीने में अक्सर कड़ाके की ठंड भी देखी जाती थी लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के चलते अब कुछ खिलाड़ी हाफ टी-शर्ट या हाफ स्वेटर में खेलते दिखाई देते है। मौसम के लिहाज से देखा जाए तो इंग्लैंड में अगस्त का महीना भी टीम इंडिया के खिलाड़ियों को रास आने वाला है। यह इंग्लैंड में भारत की गर्मियों जैसा समय होगा, जिसके चलते टीम इंडिया बढे़ हुए आत्मविश्वास के साथ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में भी उतरेगी। एक बात और कोई मूर्ख ही होगा जो इस सीरीज के नतीजे की भाविष्यवाणी करेगा।

खिलाड़ी अगर आइपीएल में खेलते हैं तो उन्हे टी-20 विश्वकप में काफी फायदा होगा

आइपीएल की बात करें तो इसे आइसीसी टी-20 विश्वकप से ठीक पहले खेला जाना है। मेरे विचार से यह सभी देशों के खिलाड़ियों के लिहाज से काफी फायदे वाला साबित होगा। खिलाड़ी अगर आइपीएल में खेलते हैं तो उन्हे टी-20 विश्वकप में काफी फायदा होगा। हां, मैं इस बात को मानता हूं कि भारत ने साल 2013 के बाद से कई टीमों वाला कोई टूर्नामेंट नहीं जीता है। उन्होंने एशिया कप और निदहास ट्रॉफी ही जीती है, लेकिन जिस तरह के खिलाड़ी इस समय टीम इंडिया में शामिल हैं, उससे यह बात कही जा सकती है कि यह टीम भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सर्वश्रेष्ठ टीम है। हालांकि, इसके अलावा साल 1971 से 74 तक अजीत वाडेकर की कप्तानी वाली टीम और 1981 से 85 तक कपिल देव की कप्तानी वाली टीम इंडिया और वर्तमान टीम में कौन सर्वश्रेष्ठ है, इसको लेकर क्रिकेट प्रशंसकों के बीच बहस जारी रहेगी।

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का इंतजार

अगर टीम इंडिया सर्दियों में दक्षिण अफ्रीका की टीम को उसके घर में टेस्ट सीरीज में हरा देती है, तो इस बात को खुलेआम कहा जा सकता है कि वर्तमान टीम इंडिया भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे सर्वश्रेष्ठ है। जिसने ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में लगातार दो बार हराकर धूल चटाई और फिर अफ्रीका को उसके घर में भी पहली बार हराया। यह ऐतिहासिक होगा और मुझे विश्वास है कि इस टीम इंडिया को ऐसा करने में ज्यादा तकलीफ नहीं होने वाली है। हालांकि, मेरे जैसे क्रिकेट खेल प्रशंसक को बस उस पल का इंतजार है, जब विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिए मैदानी अंपायर कहेगा, 'मैच शुरू करो।'

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