नई दिल्ली, [जागरण स्पेशल]। क्रिकेट के इतिहास में 14 अगस्त का दिन काफी खास है। इसकी एक नहीं दो-दो वजह हैं। क्रिकेट के दो दिग्गजों सचिन तेंदुलकर और सर डॉन ब्रेडमैन की वजह से ये दिन खास बना। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने आज ही के दिन 1990 में अपने करियर का पहला टेस्ट शतक जड़ा था और आज ही के दिन क्रिकेट के महान दिग्गज सर डॉन ब्रेडमैन ने अपने आखिरी टेस्ट में अपनी आखिरी पारी खेली थी जिसमें वे शून्य पर आउट हो गए थे। क्रिकेट इतिहास में ये शून्य सबसे चर्चित रहा है।   

मैनचेस्टर में सचिन ने ठोका था पहला शतक

1990 में मोहम्मद अजहरुद्दीन भारतीय टीम के कप्तान थे और भारतीय टीम इंग्लैंड के दौरे पर गई थी। उस भारतीय टीम में एक से बढ़कर एक दिग्गज खिलाड़ी थे। अजहर के अलावा उस टीम में दिलीप वेंगसरकर, कपिल देव और संजय मांजरेकर जैसे खिलाड़ी मौजूद थे। लेकिन सचिन ने अपने बल्ले का दम दिखाते हुए शानदार 119 रन की पारी खेली और एक समय हार की कगार पर खड़ी भारतीय टीम को मुश्किलों से उबारते हुए टेस्ट मैच ड्रॉ करवा दिया।

सचिन ने ऐसे ड्रॉ करवाया टेस्ट

तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में टीम इंडिया पहला टेस्ट 247 रनों से हारकर सीरीज में 1-0 से पीछे चल रही थी। दूसरा टेस्ट मैच मैनचेस्टर में खेला जा रहा था। इंग्लैंड के कप्तान ग्राहम गूच ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। इंग्लैंड ने गूच, माइक आर्थटन और रॉबिन स्मिथ के शतकों के दम पर पहली पारी में 519 रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया था। जिसका टीम इंडिया ने भी मोहम्मद अजहरुद्दीन की शानदार 179 रन, संजय मांजरेकर की 93 रन और सचिन की 63 रनों की पारियों से माकूल जवाब देते हुए 432 रन बनाए थे। इंग्लैंड ने दूसरी पारी में एलन लैंब के शतक की मदद से 320 रन बनाकर टीम इंडिया के लिए 408 रनों का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य का पीछा करते समय टीम इंडिया का स्कोर एक समय 4 विकेट के नुकसान पर 109 रन हो गया था। ऐसे में सचिन तेंदुलकर ने 119 रनों की शानदार पारी खेल कर अपने टेस्ट करियर का पहला शतक लगाते हुए मैच ड्रॉ करवा दिया।

जब ब्रेडमैन ने खेली आखिरी पारी

1948 में 14 अगस्त को ही ऑस्ट्रेलिया के सर डॉन ब्रेडमैन ने अपने आखिरी टेस्ट की आखिरी पारी खेली थी। लंदन के ओवल में हुए इस मैच में इंग्लैंड के कप्तान नॉर्मन यार्डली ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया था लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने उसकी पारी केवल 50 रन पर समेट दी थी। इसमें सर लियोनार्ड ह्यूटन ने सबसे ज्यादा 30 रन बनाए थे। बाकी कोई भी इंग्लैंड का बल्लेबाज दहाई का भी आंकड़ा नहीं छू सका था। इसके जवाब में पहली पारी में कप्तान ब्रेडमैन दो ही गेंद खेलकर होलीज की गेंद पर शून्य पर बोल्ड हो गए थे। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया को दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने का मौका ही नहीं मिला क्योंकि इंग्लैंड को इस मैच में पारी की हार का सामना करना पड़ा। इस तरह से यह पारी ब्रेडमैन की पारी की आखिरी पारी हो गई।

100 का टेस्ट औसत नहीं कर सके ब्रेडमैन

अगर वे इस पारी में 04 रन भी बना लेते तो 52 टेस्ट मैचों के करियर में उनका औसत 99.94 न होकर 100 हो जाता। इसी लिए ब्रेडमैन की यह आखिरी पारी की हमेशा ही चर्चा की जाती है। ब्रेडमैन के इस औसत के नजदीक आज तक दुनिया का कोई भी बल्लेबाज नहीं पहुंच सका है। ब्रेडमैन के बाद ऑस्ट्रेलिया के ही एसी वोग्स का औसत है जोकि केवल 61.87 है। उनके बाद बॉल टेम्परिंग विवाद के चलते इन दिनों अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर चल रहे ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ हैं जिनका औसत 61.37 है।

 

भारतीय खिलाड़ियों में कांबली हैं सबसे आगे

भारत की बात की जाए तो शीर्ष पर विनोद कांबली हैं। उनका औसत 53.64 है लेकिन वे दुनिया के बल्लेबाजों में 19वें स्थान पर हैं। वहीं सचिन तेंदलुकर का औसत 53.78 है और वे 23 नंबर हैं और उनके पीछे विराट कोहली 53.64 के औसत पर हैं। इसके बाद राहुल द्रविड़ 52.31 के औसत के साथ 22वें नंबर पर हैं। 31वें नंबर सुनील गावस्कर हैं।


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Posted By: Pradeep Sehgal