कोलकाता, विशाल श्रेष्ठ। एक मुकाबला मैदान पर चलता है, तो एक मुकाबला दर्शकदीर्घा में अपनी-अपनी टीम की हौसलाअफजाई करने वाले फैंस के बीच भी चलता है। दुनिया की तमाम टीमों के पास कुछ ऐसे फैन हैं जो टीम के साथ चलते हैं। भारत के पास अगर सुधीर कुमार चौधरी, पाकिस्तान के पास चाचा और श्रीलंका के पास पर्सी जैसे जबरदस्त समर्थक हैं तो बांग्लादेश के पास भी 'नूर' है। यह हैं 81 साल के नूर बख्श। बांग्लादेश की फौज के पूर्व सिपाही।

बांग्लादेश की क्रिकेट टीम जहां भी खेलने जाती है, नूर टीम के पीछे चल देते हैं। जी नहीं, बाकियों की तरह उनका कोई प्रायोजक नहीं है। अपने से ही सारा खर्च उठाते हैं। बांग्लादेश के निर्माण के लिए 1971 में हुए मुक्ति युद्ध में भी उन्होंने हिस्सा लिया था। 1972 में बांग्लादेश की फौज में शामिल हुए और 1987 तक अपनी सेवाएं प्रदान कीं। जंग का मैदान छूटा तो क्रिकेट के मैदान में होने वाली जंग से दिल लगा बैठे। तब से क्रिकेट को लेकर उनमें ऐसी दीवानगी है कि बांग्लादेश की टीम जहां भी खेलने जाती है, वह अपनी जीवनभर की जमा पूंजी से वहां पहुंच जाते हैं।

दुबली-पतली काया, शरीर पर रंग-बिरंगा चोला, लंबी सफेद दाढ़ी, सिर पर बांग्लादेश के राष्ट्रध्वज की छाप वाली टोपी, और हां, हाथों में इकतारा। यही उनकी पहचान है। ऐतिहासिक डे-नाइट टेस्ट मैच के दौरान ईडन गाडर्ेंस स्टेडियम में भी वह इसी अंदाज में नजर आए। बांग्लादेश क्रिकेट टीम के पूरे भारत दौरे के समय वह छाया-संगी की तरह उनके आसपास रहे। बांग्लादेश से पहले दिल्ली पहुंचे, वहां से राजकोट का रुख किया, फिर नागपुर आए और वहां से इंदौर होते हुए कोलकाता पहुंच गए। अब यहां से अपने वतन लौट जाएंगे।

हारा कोई नहीं, टेस्ट क्रिकेट जीता

बांग्लादेश के निराशाजनक प्रदर्शन से नूर बख्श निराश नहीं हैं। उन्होंने कहा, "मैं अपने देश की क्रिकेट टीम से बेहद प्यार करता हूं और उसे हर जगह जीतते देखना चाहता हूं, लेकिन मैं जानता हूं कि हमेशा यह संभव नहीं है। खेल में हार-जीत चलती रहती है। और यह मैच तो कोई हारा ही नहीं है। सही मायने में यह टेस्ट क्रिकेट की जीत है।"

बांग्लादेश के झिनाइदह जिले के डुमुरतला इलाके के रहने वाले नूर बख्श का भरा-पूरा परिवार है। घर में बीवी और कामकाज में लग चुके बच्चे हैं। नूर बख्श इससे पहले भी कई मर्तबा कोलकाता आ चुके हैं। उन्होंने ईडन में आइपीएल के कई मैच भी देखे हैं। इकतारा लेकर घूमने की वजह पूछे जाने पर नूर ने कहा, "अरे, यही तो मेरी पहचान है। मैं गाता-बजाता रहता हूं और क्रिकेट में मस्त रहता हूं।"

शाकिब प्रकरण ने झकझोर दिया था

शाकिब अल हसन प्रकरण ने बांग्लादेश क्रिकेट टीम के इस पुरजोर समर्थक को झकझोर दिया था। उन्होंने कहा, "बुरा तो बहुत लगा था, लेकिन गलत काम का कभी समर्थन नहीं किया जा सकता। क्रिकेट से ऊपर कुछ नहीं है।" टीम इंडिया के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा नूर बक्श के पसंदीदा खिलाड़ी हैं। भारतीय कप्तान विराट कोहली भी उन्हें काफी अच्छे लगते हैं। 

 

Posted By: Vikash Gaur

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